फॉस्फेट शैल (फ्लुओरऐपेटाइट) की ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से प्राप्त होता है:
(ट्रिपल सुपर फॉस्फेट)।
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फॉस्फेट शैल (फ्लुओरऐपेटाइट) की ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से प्राप्त होता है:
(ट्रिपल सुपर फॉस्फेट)।
निम्नलिखित में से कौन सही है?
अभिकथन : संभवतः ज्ञात नहीं है, क्योंकि Pb(IV) की ऑक्सीकरण क्षमता तथा
अपचायक क्षमता है की।
कारण : आयोडाइड उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व प्रदान करता है।
(C) अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण अधिक स्थायी है। बड़ा होने के कारण आसानी से इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति रखता है।
छोटे तथा अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व जैसे उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व दे सकते हैं,
न कि .
अभिकथन : का उपयोग सुखाने के लिए नहीं किया जाता .
कारण : अम्लीय है तथा क्षारीय है।
(A)
अभिकथन : अधिक प्रबल अम्ल है, की तुलना में .
कारण : में दो नाइट्रोजन-ऑक्सीजन बंध हैं जबकि में केवल एक है।
(C) संयुग्मी क्षार का, अर्थात् अधिक स्थायी है (तीन ऑक्सीजन परमाणुओं पर आवेश का विक्षेपण), संयुग्मी क्षार की तुलना में , अर्थात् (दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर आवेश का विक्षेपण)।
तीन नाइट्रोजन-ऑक्सीजन बंध हैं में तथा दो
अभिकथन : सल्फर का ऑक्सीकरण करके अम्ल ( S + VI) बनाता है, परंतु सेलीनियम का ऑक्सीकरण केवल ( Se + IV ) तक करता है।
कारण : सेलीनियम परमाणुओं में बढ़े हुए नाभिकीय आवेश के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा अधिक दृढ़ता से बँधे रहते हैं।
(A) 3d-उपकोश में 10 इलेक्ट्रॉनों के भरने से दुर्बल परिरक्षण के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है
और इस प्रकार इलेक्ट्रॉन अधिक दृढ़ता से बँधे रहते हैं। यही कारण है कि सेलीनियम (VI) की उच्चतम
ऑक्सीकरण अवस्था प्राप्त करने में अनिच्छुक रहता है।
अभिकथन : सल्फर डाइऑक्साइड क्षारीय माध्यम में अम्लीय माध्यम की तुलना में
अधिक प्रबल अपचायक है।
कारण : सल्फर डाइऑक्साइड नमी की उपस्थिति में हाइड्रोजन सल्फाइड से अभिक्रिया करती है और सल्फर
अवक्षेपित हो जाता है।
(B) (में वृद्धि साम्य को पश्च दिशा में विस्थापित करेगी)
(में वृद्धि साम्य को अग्र दिशा में विस्थापित करेगी)
अभिकथन : का उपयोग उच्च वोल्टता जनित्रों में गैसीय विद्युतरोधी के रूप में किया जाता है।
कारण : यह अक्रिय है तथा इसमें अच्छे परावैद्युत गुण हैं।
(A) की अक्रियता त्रिविम रूप से संरक्षित सल्फर परमाणु की उपस्थिति के कारण है, जो जल-अपघटन जैसी
ऊष्मागतिकीय रूप से अनुकूल अभिक्रियाओं को होने नहीं देता।
अभिकथन : सूक्ष्म विभाजित लोहा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ फेरिक क्लोराइड नहीं बनाता।
कारण : हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लोहे के साथ हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है।
(A)
हाइड्रोजन के मुक्त होने से फेरिक क्लोराइड का बनना रुक जाता है।
निम्नलिखित में से कौन अस्तित्व में नहीं है?
NeF2 अस्तित्व में नहीं है।
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