सबसे छोटा बंध कोण किस अणु का है
बंध कोण इस क्रम में घटता है : H2O > H2S > H2Se > H2Te.
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सबसे छोटा बंध कोण किस अणु का है
बंध कोण इस क्रम में घटता है : H2O > H2S > H2Se > H2Te.
H3PO3 में
H3PO3 है
यहाँ दो हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़े हैं।
प्रबल ऑक्सीकारक तथा प्रबल अपचायक क्रमशः हैं
फ्लुओरीन अपने उच्चतम अपचयन विभव के कारण प्रबलतम ऑक्सीकारक है तथा HI आयोडीन परमाणु के बड़े आकार एवं दुर्बल H-I बंध के कारण प्रबल अपचायक है, जो सरलता से टूटकर हाइड्रोजन देता है।
एक अधातु के ऑक्साइड में निम्नलिखित अभिलक्षण हैं।
(i) यह प्रोटॉन दाता तथा प्रोटॉन ग्राही दोनों है
(ii) यह विद्युत का कुचालक है
(iii) यह क्षारीय तथा अम्लीय ऑक्साइडों से सरलता से अभिक्रिया करता है
(iv) यह क्वथनांक पर Fe का ऑक्सीकरण करता है।
वह ऑक्साइड है
H2O प्रोटॉन दाता तथा प्रोटॉन ग्राही दोनों है। शुद्ध जल विद्युत का कुचालक है। जल क्षारीय तथा अम्लीय ऑक्साइडों से सरलता से अभिक्रिया करता है। जल क्वथनांक पर Fe का ऑक्सीकरण भी करता है।
एक पीले धात्विक चूर्ण को फ्लुओरीन की धारा में जलाने पर एक रंगहीन गैस X प्राप्त होती है जो ऊष्मीय रूप से स्थायी तथा रासायनिक रूप से अक्रिय है। इसके अणु की ज्यामिति अष्टफलकीय है। X के समान संघटक परमाणुओं वाली एक अन्य रंगहीन गैस Y तब प्राप्त होती है जब सल्फर डाइक्लोराइड को सोडियम फ्लुओराइड के साथ गर्म किया जाता है। इसके अणु की संरचना त्रिकोणीय पिरामिडीय है। X तथा Y हैं
SF4 sp3d संकरण के कारण त्रिकोणीय पिरामिडीय आकृति रखता है। SF6 sp3d2 संकरण के कारण अष्टफलकीय है। सल्फर की आण्विक ज्यामिति S8 है
नाइट्रोजन परिवार में हाइड्राइडों MH3 में H-M-H बंध कोण N से Sb की ओर जाने पर क्रमशः 90o के निकट होता जाता है। यह दर्शाता है कि क्रमशः
हाइड्राइडों की आकृति पिरामिडीय या चतुष्फलकीय होती है तथा किसी एक कक्षक में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। H-M-H बंध कोण मूल 109o28' चतुष्फलकीय बंध कोण से कम होता है (NH3 में H-N-H 106o45') क्योंकि एकाकी युग्म तथा बंध युग्म के बीच प्रतिकर्षण दो बंध युग्मों के बीच के प्रतिकर्षण से अधिक होता है। M की विद्युतऋणात्मकता N से Bi तक घटती है, अतः बंध युग्म केंद्रीय परमाणु से दूर रहते हैं और एकाकी युग्म बंध कोण को अधिक विकृत करता है।
अतः PH3 में H-P-H बंध 94o है, जबकि AsH3 तथा SbH3 में यह लगभग 91.8o तथा 91.3o क्रमशः है (90o के निकट)। यह सुझाता है कि बंधन में प्रयुक्त कक्षक शुद्ध p-कक्षकों के अधिक निकट हैं।
12 ग्राम NaH2PO4 [M=120gm mol-1] को Na3PO4 में बदलने के लिए आवश्यक 2M NaOH का आयतन है
अभिक्रिया है
अभिकथन : ट्राइमेथिलऐमीन (N(CH3)3) में नाइट्रोजन की ज्यामिति पिरामिडीय है, जबकि ट्राइसिलिलऐमीन (N(SiH3)3) में यह समतलीय है।
कारण : ट्राइमेथिलऐमीन में नाइट्रोजन sp3 संकरण दर्शाता है जबकि ट्राइसिलिलऐमीन में यह sp2 संकरण दर्शाता है।
ट्राइमेथिलऐमीन में नाइट्रोजन sp3 संकरण दर्शाता है, अतः ट्राइमेथिलऐमीन की ज्यामिति पिरामिडीय है, जबकि ट्राइसिलिलऐमीन में यह sp2 संकरण दर्शाता है जिससे समतलीय संरचना बनती है।
अभिकथन : ज्ञात उत्कृष्ट गैस यौगिकों में अधिकांश ज़ीनॉन के हैं।
कारण : ज़ीनॉन की आयनन एन्थैल्पी ऑक्सीजन की आयनन एन्थैल्पी के बहुत निकट है।
ज्ञात उत्कृष्ट गैस यौगिकों में अधिकांश ज़ीनॉन के हैं, क्योंकि ज़ीनॉन की आयनन एन्थैल्पी ऑक्सीजन की आयनन एन्थैल्पी के बहुत निकट है।
अभिकथन : ClF3 अस्तित्व में है परन्तु FCl3 नहीं।
कारण : FCl3 बड़े Cl परमाणुओं द्वारा अधिक त्रिविम अवरोध के कारण नहीं बनता।
ClF3 अस्तित्व में है परन्तु FCl3 नहीं, क्योंकि FCl3 बड़े Cl परमाणुओं द्वारा अधिक त्रिविम अवरोध के कारण नहीं बनता।
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