हाइड्रोजन हैलाइडों की अपचायक क्षमता का घटता क्रम है:
हाइड्रा अम्लों की अपचायक प्रवृत्ति वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ती है, इसका कारण है बंध लंबाई में वृद्धि
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हाइड्रोजन हैलाइडों की अपचायक क्षमता का घटता क्रम है:
हाइड्रा अम्लों की अपचायक प्रवृत्ति वर्ग में नीचे जाने पर बढ़ती है, इसका कारण है बंध लंबाई में वृद्धि
कौन-सा प्रकृति में सर्वाधिक क्षारीय है?
अम्ल सामर्थ्य का क्रम है
HI > HBr > HCl > HF
अतः संयुग्मी क्षार हैं
I- < Br- < Cl- < F-
अतः फ्लुओराइड आयन प्रबलतम क्षार है तथा आयोडाइड आयन ​दुर्बलतम क्षार है
कौन विद्युत का कुचालक है?
H2F2
जलीय विलयन में इस यौगिक में उपस्थित आबंधन के कारण विद्युत चालन हेतु कोई मुक्त आयन उपलब्ध नहीं होते। इसी कारण H2F2 विद्युत का कुचालक है।
HBr तथा HI सल्फ्यूरिक अम्ल का अपचयन करते हैं; HCl का अपचयन कर सकता है तथा HF अपचयन करता है:
फ्लुओरीन सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है तथा इसका आकार बहुत छोटा है, अतः इसमें इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति नहीं होती। इसलिए यह कभी अपचायक की तरह व्यवहार नहीं करता। HF एक अच्छा ऑक्सीकारक है।
अन्य हाइड्रोजन हैलाइडों के विपरीत हाइड्रोजन फ्लुओराइड द्रव है, क्योंकि:
HF अणुओं के बीच उपस्थित प्रबल अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन के कारण हाइड्रोजन फ्लुओराइड (HF) कक्ष ताप पर द्रव है। फ्लुओरीन परमाणु के छोटे आकार से हाइड्रोजन बंध सरलता से बनता है, जिससे अन्य हाइड्रोजन हैलाइडों की तुलना में इसका क्वथनांक अधिक होता है।
हाइड्रोजन हैलाइड (H-X) के ऊष्मीय स्थायित्व का सही क्रम है:
(2)
जैसे-जैसे हैलोजन परमाणु का आकार F से I तक बढ़ता है, HX अणुओं में H – X बंध लंबाई भी H – F से H – I तक बढ़ती है (H – F < H – Cl < H – Br < H – I)।
H – X बंध लंबाई बढ़ने से H – X बंध की प्रबलता H – F से H – I तक घटती है (H – F > H – Cl > H – Br > H – I)। यह कमी इस तथ्य से स्पष्ट है कि H – X बंध वियोजन ऊर्जाएँ H – F से H – I तक घटती हैं।
H – F से H – I तक H – X बंध की प्रबलता में क्रमिक कमी के कारण HX अणुओं का ऊष्मीय स्थायित्व भी HF से HI तक घटता है (HF > HCl > HBr > HI)।
कौन-सा अम्ल अपने ही लवण के साथ पुनः संयोग कर सकता है?
HF अद्वितीय है; यह अम्ल लवण बनाता है क्योंकि F− आयन HF से H-बंध बनाकर डाइफ्लुओराइड आयन [HF2]− अर्थात् [F.....H−F]− देता है।
गैसीय में अशुद्धि के रूप में उपस्थित HF को किसके ऊपर से प्रवाहित करके हटाया जा सकता है:
HF एक लूइस अम्ल है तथा लूइस क्षार NaF के साथ संकुल बना सकता है। यह संकुल-निर्माण गैसीय F2 धारा से HF को हटा देता है। फ्लुओरीन गैस से HF की सूक्ष्म मात्रा हटाने के लिए NaF सामान्यतः शुष्कक के रूप में प्रयुक्त होता है।
हाइड्रोफ्लुओरिक अम्ल को काँच की बोतलों में संरक्षित नहीं किया जाता, क्योंकि:
जब सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO2) को हाइड्रोजन फ्लुओराइड (HF) के साथ गर्म किया जाता है, तो सिलिकॉन टेट्राफ्लुओराइड (SiF4) बनता है।
सामान्यतः Si-O बंध प्रबल होता है तथा उच्च ताप पर भी हैलोजन एवं अधिकांश अम्लों के आक्रमण का प्रतिरोध करता है, परन्तु HF इस पर आक्रमण करता है।
SiO2 + 4HF ----→ SiF4 + 2H2O
इस अभिक्रिया में बना SiF4 HF के साथ आगे अभिक्रिया करके हाइड्रोफ्लुओरोसिलिसिक अम्ल बना सकता है।
SiF4 + 2HF -----→ H2SiF6
शुद्ध HF किस पर आक्रमण नहीं करता:
(1)
हाइड्रोफ्लुओरिक अम्ल प्लास्टिक को नहीं गलाता
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