प्रतिचुंबकीय है, क्योंकि:
: अयुग्मित की उपस्थिति के कारण अनुचुंबकीय : अयुग्मित की संख्या न तो लिगेंडों पर न ही पर है, अतः यह प्रतिचुंबकीय है
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प्रतिचुंबकीय है, क्योंकि:
: अयुग्मित की उपस्थिति के कारण अनुचुंबकीय : अयुग्मित की संख्या न तो लिगेंडों पर न ही पर है, अतः यह प्रतिचुंबकीय है
यदि संगत उदासीन कार्बोनिल यौगिकों में CO लिगेंडों को NO द्वारा प्रतिस्थापित किया जाए, तो निम्नलिखित में से कौन-सा सूत्र सही नहीं होगा ?
(d) लिगेंड NO दाता है, अतः तीन CO लिगेंडों को दो NO लिगेंडों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी स्पीशीज़ अपचायक की तरह कार्य कर सकती है ?
(b) अपचायक की तरह कार्य कर सकता है, क्योंकि धातु कार्बोनिल तब स्थायी होता है जब EAN निकटतम उत्कृष्ट गैस विन्यास के बराबर हो।
अष्टफलकीय संकुल में विन्यास वाले धातु परमाणु/आयन की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था क्या है, यदि < युग्मन ऊर्जा हो ?
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
(c) ; ;चतुष्फलकीय संकुल।
निम्नलिखित कथनों के लिए आद्याक्षर T या F का सही क्रम दीजिए। कथन सत्य होने पर T तथा असत्य होने पर F का प्रयोग कीजिए
(I) Co(III) दुर्बल लिगेंडों की उपस्थिति में स्थायी होता है, जबकि Co(II) प्रबल क्षेत्र लिगेंड की उपस्थिति में स्थायी होता है।
(II) Pd(II) तथा Pt(II) के चार-उपसहसंयोजित संकुल प्रतिचुंबकीय तथा वर्ग समतलीय होते हैं।
(III) आयन तथा क्रमशः प्रतिचुंबकीय चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतलीय हैं।
(IV) आयन आंतरिक कक्षक अष्टफलकीय संकुल नहीं बनाता।
सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए :
सूची-I सूची-II
(I) (A) 1.73 BM
(II) (B) 5.93 BM
(III) (C) 0.00 BM
(IV) (D) 2.83 BM
(V) (E) 3.88 BM
(I) (II) (III) (IV) (V) (I) (II) (III) (IV) (V)
सही मिलान है: (I) [FeF₆]³⻠- (B) 5.93 BM (उच्च चक्रण dâµ विन्यास), (II) [Ti(Hâ‚‚O)₆]³⻠- (A) 1.73 BM (d¹ विन्यास), (III) [Cr(NH₃)₆]³⺠- (E) 3.88 BM (d³ विन्यास), (IV) [Ni(Hâ‚‚O)₆]²⺠- (D) 2.83 BM (d⸠विन्यास), (V) [Fe(CN)₆]â´â» - (C) 0.00 BM (प्रतिचुंबकीय, निम्न चक्रण dâ¶ विन्यास)।
के निर्माण के दौरान केंद्रीय धातु द्वारा प्रयुक्त d-कक्षकों का समुच्चय है?
MnO4- आयन में केंद्रीय धातु परमाणु मैंगनीज़ (Mn) की ऑक्सीकरण अवस्था +7 है। ऑफबाऊ सिद्धांत के अनुसार पाँच 3d कक्षक (dxy, dyz, dxz, dx2-y2, dz2) क्रमशः भरे जाते हैं। +7 ऑक्सीकरण अवस्था में Mn का विन्यास d0 है, अर्थात् सभी 3d कक्षक रिक्त हैं। अतः MnO4- के निर्माण के दौरान केंद्रीय धातु द्वारा प्रयुक्त d-कक्षकों का समुच्चय dxy, dyz तथा dxz है।
NO का बहुत अच्छा अवशोषक है; इस प्रक्रम में बने नए यौगिक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पाई जाती है:
(c)
अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 3
संकुल सामान्यतः लगभग 600 nm पर अवशोषण करता है। इसे अमोनिया के साथ अभिक्रिया कराकर नया संकुल बनाया जाता है, जिसका अवशोषण होना चाहिए :
(b) चूँकि अधिक प्रबल लिगेंड है की तुलना में, अतः का CFSE मान > इसका CFSE अतः अवशोषण छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर विस्थापित हो जाता है। साथ ही तथा की विपाटन क्षमता में अंतर बहुत अधिक नहीं है।
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