NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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अभिक्रिया पर विचार कीजिए 

CH3CH2CH2Br + NaCN →CH3CH2CH2CN + NaBr

यह अभिक्रिया सबसे तीव्र होगी

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Explanation

(c) दी गई अभिक्रिया SN2 क्रियाविधि का अनुसरण करती है तथा SN2 अभिक्रियाएँ DMSO, DMF आदि जैसे ध्रुवीय अप्रोटिक माध्यम में अनुकूलित होती हैं।

   CH3CH2CH2Br + NaCN →DMF CH3CH2CH2CN + NaBr

अतः सही विकल्प (c) है।

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वह यौगिक जो गैसीय ब्रोमीन के साथ सबसे सरलता से अभिक्रिया करेगा, उसका सूत्र है ?

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किसकी अभिक्रियाशीलता SN1 अभिक्रिया के प्रति सर्वाधिक है?

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मुख्य विचार SN1 अभिक्रिया में कार्बोधनायन मध्यवर्ती बनता है। कार्बोधनायन का स्थायित्व जितना अधिक होगा, ऐल्किल/ऐरिल हैलाइड की SN1 अभिक्रिया के प्रति अभिक्रियाशीलता उतनी ही अधिक होगी।

दिए गए हैलाइडों द्वारा बने मध्यवर्ती कार्बोधनायन इस प्रकार हैं:

(a) C6H5CH(C6H5)Br →(C6H5)2C+H + Br-

(b) C6H5CH(CH3)Br →C6H5C+H(CH3) + Br-

(c) C6H5C(CH3)(C6H5)Br →(C6H5)2C+(CH3) + Br-

(d) C6H5CH2Br →C6H5C+H2 + Br-

इन कार्बोधनायनों के स्थायित्व का क्रम इस प्रकार है

(C6H5)2C+(CH3)>(C6H5)2C+H>C6H5C+H(CH3)>C6H5C+H2

अतः C6H5(CH3)(C6H5)Br, SN1 अभिक्रिया के प्रति सर्वाधिक अभिक्रियाशील है

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निम्नलिखित अभिकारक समुच्चयों में से कौन-सा ऐनिसोल उत्पन्न करता है? 

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ऐनिसोल फीनॉल (C6H5OH) की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) तथा मेथिल आयोडाइड (CH3I) के साथ अभिक्रिया से बनता है। यह विलियमसन ईथर संश्लेषण का उदाहरण है, जिसमें ऐल्कॉक्साइड आयन (फीनॉल तथा NaOH से) एक ऐल्किल हैलाइड के साथ अभिक्रिया करके ईथर बनाता है।

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जब सोडियम फ़ीनॉक्साइड को एथिल आयोडाइड के साथ गर्म किया जाता है, तो कौन-सा बनता है? 

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सोडियम फ़ीनॉक्साइड एथिल आयोडाइड के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया द्वारा फेनेटोल (C6H5OC2H5) बनाता है। फ़ीनॉक्साइड आयन नाभिकरागी की भाँति कार्य करते हुए एथिल समूह पर आक्रमण करता है तथा आयोडाइड आयन को विस्थापित कर देता है।

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अभिक्रियाओं के अनुक्रम में Z की पहचान कीजिए, 

CH3CH2CH=CH2 →HBr/H2O2Y→C2H5ONaZ

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(a) CH3CH2CH=CH2→Anti-Markownikoff's ruleHBr/H2O2

  CH3CH2CH2CH2Br→ब्रोमो-ब्यूटेन (1°  उत्पाद)

  CH3CH2CH2CH2Br→SN2 reactionC2H5ONaCH3CH2CH2CH2OC2H5  (विलियमसन संश्लेषण)

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एथिल फॉर्मेट की आधिक्य CH3MgI के साथ अभिक्रिया, तत्पश्चात जलअपघटन देता है

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एथिल फॉर्मेट की आधिक्य CH3MgI के साथ अभिक्रिया, तत्पश्चात जलअपघटन एक द्वितीयक ऐल्कोहॉल अर्थात् आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल देता है।

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लुकास अभिकर्मक है

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(a) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा निर्जल ZnCl2 के समान मोलर मिश्रण को लुकास अभिकर्मक कहते हैं। लुकास अभिकर्मक का उपयोग 1°, 2° तथा 3° ऐल्कोहॉलों में विभेद करने के लिए किया जाता है।

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वह यौगिक जो लुकास अभिकर्मक के साथ सबसे तीव्रता से अभिक्रिया करता है (कक्ष ताप पर) 

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(d) लुकास परीक्षण में जब लुकास अभिकर्मक को 1° ,2°  तथा 3°  ऐल्कोहॉलों के साथ उपचारित किया जाता है, तो धुँधलापन प्रकट होता है; यदि धुँधलापन तुरंत प्रकट हो, तो ऐल्कोहॉल तृतीयक है। 2-मेथिल प्रोपेन-2-ऑल एक तृतीयक ऐल्कोहॉल है। अतः यह लुकास अभिकर्मक के साथ सबसे तीव्रता से अभिक्रिया करता है।

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फीनॉल का आयनन स्थिरांक एथेनॉल की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि 

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फ़ीनॉक्साइड आयन (C6H5O-) में ऋणावेश ऐरोमैटिक वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है, जिससे यह एथॉक्साइड आयन (CH3CH2O-) की तुलना में अधिक स्थायी हो जाता है। इसी बढ़े हुए स्थायित्व के कारण फीनॉल का आयनन स्थिरांक अधिक होता है।

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