निम्नलिखित में से कौन-सा गुणसूत्र मनुष्यों में अनुपस्थित होता है
अंतःकेंद्री गुणसूत्र मनुष्यों में अनुपस्थित होता है
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निम्नलिखित में से कौन-सा गुणसूत्र मनुष्यों में अनुपस्थित होता है
अंतःकेंद्री गुणसूत्र मनुष्यों में अनुपस्थित होता है
गुणसूत्र में सैटेलाइट काय बनती है
NCERT देखें,शीर्षक 8.5.10, पैरा 3, पृष्ठ 140
अर्धसूत्री विभाजन का विकासीय महत्व है क्योंकि इससे उत्पन्न होते हैं
(d) अर्धसूत्री विभाजन में पुनर्संयोजन होता है, फिर भी अर्धसूत्री विभाजन गुणसूत्र संख्या को स्थिर बनाए रखता है। यह गुणसूत्र संख्या को आधा करके अगुणित युग्मक उत्पन्न करता है। जीन विनिमय सहलग्न जीनों के नए संयोजन बनाता है तथा आनुवंशिक विविधता का प्रमुख स्रोत है।
इसके अतिरिक्त, मध्यावस्था-I में द्विसंयोजकों का यादृच्छिक वितरण जीवों में आनुवंशिक विविधता का द्वितीयक स्रोत प्रदान करता है तथा जातिउद्भवन एवं विकास के लिए आवश्यक है।
एक द्विसंयोजक बना होता है
(c) समान प्रकार के एक मातृ तथा एक पितृ गुणसूत्र वाले समजात गुणसूत्रों के प्रत्येक युग्म को द्विसंयोजक कहते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र में दो सहोदर अर्धगुणसूत्र तथा एक गुणसूत्रबिंदु होता है। अतः द्विसंयोजक में चार अर्धगुणसूत्र तथा दो गुणसूत्रबिंदु होते हैं। चार अर्धगुणसूत्रों वाला यह द्विसंयोजक पैकीटीन चतुष्क (क्वाड्रिवैलेंट) कहलाता है।
जीवाणु प्रत्येक 35 मिनट में विभाजित होता है। यदि 105 कोशिकाएँ प्रति mL वाले संवर्धन को 175 मिनट तक उगाया जाए, तो 175 मिनट पश्चात प्रति mL कोशिका सांद्रता क्या होगी?
(c) 1 x 105 2 x 105 4 x 105
8 x 105 16 x 105 32 x 105
कोशिका विभाजन के दौरान तर्कु तंतु गुणसूत्रों से जिस क्षेत्र पर जुड़ते हैं उसे कहते हैं
(b) पश्च पूर्वावस्था के दौरान गुणसूत्रबिंदु की दोनों सतहों पर काइनेटोकोर नामक विशिष्ट संरचनाएँ विकसित होती हैं। गुणसूत्रीय तंतु काइनेटोकोर से जुड़ जाते हैं।
क्रोमोमियर गुणसूत्रों पर मनके जैसी संरचनाएँ हैं जो विशेष रूप से अर्धसूत्री-I की पूर्वावस्था-I (विशेषकर लेप्टोटीन) में पाई जाती हैं।
क्रोमोसेंटर किसी कोशिका के सभी गुणसूत्रों के गुणसूत्रबिंदु क्षेत्रों के संलयन से बनता है। तारककाय जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है (उच्च पादप कोशिकाओं में अनुपस्थित)। यह केंद्रक के निकट पाया जाता है। प्रत्येक तारककाय दो तारककेंद्रों से बना होता है तथा प्रत्येक तारककेंद्र एक बेलनाकार संरचना है जिसका व्यास 1500-1800 होता है तथा जो नौ तंतुकों से बना होता है।
उस पादप की एल्यूरोन कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या क्या होगी जिसकी मूलाग्र कोशिकाओं में 42 गुणसूत्र हैं?
एल्यूरोन स्तर भ्रूणपोष की सबसे बाहरी कोशिका परत है। भ्रूणपोष की गुणिता त्रिगुणित होती है। यदि द्विगुणित मूल कोशिका में 42 गुणसूत्र हैं, तो अगुणित कोशिका में 21 गुणसूत्र होंगे तथा त्रिगुणित में 3 X 21=63 गुणसूत्र होंगे।
सूत्रयुग्मन होता है
(d) पूर्वावस्था-I की जाइगोटीन अवस्था में समजात गुणसूत्र युग्म बनाते हैं। इस प्रक्रिया को सूत्रयुग्मन कहते हैं। युग्म का एक गुणसूत्र नर जनक से तथा दूसरा मादा जनक से आता है।
गुणसूत्रों के आकार, माप तथा संख्या के प्रेक्षण हेतु सर्वोत्तम अवस्था है
(b) मध्यावस्था की विशेषता वे गुणसूत्र हैं जो सबसे कम कुंडलित होते हुए अधिकतम संघनन दर्शाते हैं तथा लंबाई में सबसे छोटे होते हैं। कोशिका में गुणसूत्रों की संरचना, माप तथा संख्या के अध्ययन हेतु यह सर्वोत्तम अवस्था है। गुणसूत्रों का इडियोग्राम/कैरियोटाइप मध्यावस्था में ही बनाया जाता है।
यदि किसी द्विगुणित कोशिका को कोल्चिसिन से उपचारित किया जाए तो वह हो जाती है
(b) Colchicum autumnale से कोल्चिसिन नामक एक ऐल्केलॉइड प्राप्त होता है जिसका उपयोग पादप प्रजनन में गुणसूत्र संख्या दोगुनी करने हेतु किया जाता है। 0.1% कोल्चिसिन से उपचार तर्कु निर्माण को संदमित करता है जिससे पश्चावस्था के दौरान अर्धगुणसूत्र पृथक नहीं हो पाते।
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