NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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मनुष्यों में ABO रुधिर वर्गों का नियंत्रण जीन I द्वारा होता है। इसके तीन युग्मविकल्पी हैं — IA, IB तथा i। चूँकि तीन भिन्न युग्मविकल्पी हैं, अतः छह भिन्न जीनप्ररूप संभव हैं। कितने लक्षणप्ररूप हो सकते हैं?

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Explanation

ABO रुधिर वर्ग तंत्र में वर्गीकरण की वंशागति का नियंत्रण गुणसूत्र 9 पर स्थित एक ही अलिंगसूत्री जीन द्वारा होता है जिसके तीन प्रमुख युग्मविकल्पी A, B तथा O ( IA, IB तथा iO) हैं। ABO रुधिर वर्ग तंत्र में कम से कम 6 जीनप्ररूप होते हैं। प्रतिजनों एवं प्रतिरक्षियों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर चार रुधिर वर्ग (लक्षणप्ररूप) पहचाने गए हैं — A, B, AB तथा O रुधिर वर्ग।

द्विसंकर संकरण के संदर्भ में नीचे दिए गए कथनों में से सही कथन चुनिए।

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पुनर्योजन अर्धसूत्रण के दौरान जीनों का पुनर्विन्यास है जिससे किसी युग्मक में नए जीन संयोजन वाला अगुणित जीनप्ररूप आ जाता है। मॉर्गन तथा उनके समूह ने पाया कि जब जीन एक ही गुणसूत्र पर समूहित होते हैं, तो कुछ जीन बहुत दृढ़ता से सहलग्न होते हैं (बहुत कम पुनर्योजन दर्शाते हैं), जबकि अन्य शिथिल रूप से सहलग्न होते हैं (अधिक पुनर्योजन दर्शाते हैं)।

मनुष्यों में त्वचा के रंग की वंशागति किसका उदाहरण है :

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मनुष्यों में त्वचा के रंग की वंशागति बहुजीनी वंशागति अथवा बहुकारक वंशागति का परिणाम है। मानव त्वचा के रंग की वंशागति का अध्ययन सी.बी. डेवनपोर्ट ने 1913 में किया।

वंशागति की किस विधि में आप संतति में अधिक मातृ प्रभाव की अपेक्षा करेंगे ?

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अधिक मातृ प्रभाव की अपेक्षा कोशिकाद्रव्यी वंशागति में की जा सकती है (अर्थात् कोशिका के केंद्रक के बजाय कोशिकाद्रव्य में स्थित जीनों की वंशागति)। कारण यह है कि मादा जनन कोशिका अथवा अंड में बड़ी मात्रा में कोशिकाद्रव्य होता है जिसमें ऐसे अनेक कोशिकांग रहते हैं जिनके अपने जीन होते हैं तथा जो स्वतंत्र रूप से जनन कर सकते हैं (जैसे, माइटोकॉन्ड्रिया एवं हरितलवक) और जो परिणामस्वरूप भ्रूण की सभी कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में सम्मिलित हो जाते हैं। नर जनन कोशिकाएँ (शुक्राणु या पराग) लगभग पूर्णतः केंद्रक से ही बनी होती हैं। अतः कोशिकाद्रव्यी कोशिकांग नर जनक से वंशागत नहीं होते।

इसीलिए कोशिकाद्रव्यी वंशागति को मातृ वंशागति भी कहते हैं।

Y-गुणसूत्र पर स्थित जीन Y-जीन कहलाते हैं तथा उनकी वंशागति Y-सहलग्न वंशागति कहलाती है। यह पितृ प्रभाव वहन करती है।

X-गुणसूत्र पर स्थित जीन X-सहलग्न कहलाता है तथा उसकी वंशागति X-सहलग्न वंशागति कहलाती है। इसमें नर अपना X-गुणसूत्र केवल अपनी पुत्रियों को देता है जबकि मादा अपने दोनों लिंगों की संतति को अपने X-गुणसूत्रों में से एक देती है।

AABbCC जीनप्ररूप वाला पादप कितने भिन्न प्रकार के युग्मक उत्पन्न करेगा ?

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किसी पादप द्वारा उत्पन्न युग्मकों के प्रकार विषमयुग्मजी युग्मों की संख्या पर निर्भर करते हैं।

युग्मकों के प्रकारों की संख्या = Zn

n = विषमयुग्मजी युग्मों की संख्या

21 = 2

युग्मक हैं — ABC तथा AbC।

निम्नलिखित में से कौन बहुजीनी वंशागति का उदाहरण है ?

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बहुजीनी वंशागति में किसी विशेष लक्षणप्ररूपी अभिलक्षण का निर्धारण अनेक जीनों द्वारा होता है, जिन्हें बहुजीन कहते हैं (अर्थात् किसी मात्रात्मक अभिलक्षण को प्रभावित करने वाला जीन समूह), और इनमें से प्रत्येक का व्यक्तिगत प्रभाव अल्प होता है।

इस प्रकार नियंत्रित अभिलक्षण सतत विविधता दर्शाते हैं तथा बहुजीनी लक्षण कहलाते हैं, जैसे मनुष्यों में लंबाई तथा त्वचा का रंग

बहुजीनी वंशागति को बहुकारक वंशागति अथवा मात्रात्मक वंशागति कहते हैं।

Mirabilis jalapa में गुलाबी पुष्प का रंग अपूर्ण प्रभाविता का उदाहरण है जबकि नर मधुमक्खी का उत्पादन अनिषेकजनन का उदाहरण है।

परीक्षार्थ संकरण में सम्मिलित है :

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परीक्षार्थ संकरण में F1 संकर का द्वि-अप्रभावी जीनप्ररूप वाले जनक से संकरण कराया जाता है। परीक्षार्थ संकरण द्वारा जीव की विषमयुग्मजता तथा समयुग्मजता की जाँच की जा सकती है।

अतः यदि अप्रभावी जनक (tt) से संकरित व्यष्टि समयुग्मजी प्रभावी था, तो संतति 100% प्रभावी होगी, और यदि व्यष्टि विषमयुग्मजी प्रभावी था, तो अनुपात 50% प्रभावी एवं 50% अप्रभावी होगा। द्विसंकर परीक्षार्थ संकरण में अनुपात 1:1:1:1 होगा।

किसी वंशागत अभिलक्षण तथा उसके संसूचनीय प्रकार को क्या कहते हैं

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लक्षण किसी विशेष वंशागत अभिलक्षण की कोई भी संसूचनीय लक्षणप्ररूपी विविधता है।

"क्राई-डू-चैट" संलक्षण गुणसूत्र संरचना में किस परिवर्तन के कारण होता है

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क्राई डू चैट एक दुर्लभ संलक्षण है (50,000 जीवित जन्मों में 1) जो गुणसूत्र 5 की लघु भुजा के विलोपन से होता है; यह गुणसूत्र 5 के एक भाग के अभाव के कारण होने वाला दुर्लभ आनुवंशिक विकार है। इसका वर्णन सर्वप्रथम लेज्यून ने 1963 में किया। इस संलक्षण का नाम फ्रेंच में "बिल्ली की म्याऊँ" है, जो इस विकार से ग्रस्त बच्चों के विशिष्ट रुदन को इंगित करता है। यह रुदन असामान्य स्वरयंत्र परिवर्धन के कारण होता है, जो जन्म के कुछ ही सप्ताहों में सामान्य हो जाता है। क्राई डू चैट से ग्रस्त शिशुओं का जन्म भार कम होता है तथा उन्हें श्वसन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

युग्मविकल्पी विविधता का प्राथमिक स्रोत है 

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पुनर्योजन DNA रज्जुकों के टूटने तथा पुनः जुड़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया है जिससे जीनों के नए संयोजन बनते हैं और इस प्रकार आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है। यह परिघटना अर्धसूत्रण I के दौरान होती है।

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Frequently Asked Questions

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