NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर गुणसूत्रों में ‘धागे पर मणिकाओं’ जैसी दिखने वाली संरचनाएँ कौन-सी हैं?

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Explanation

न्यूक्लियोसोम क्रोमैटिन की अतिसूक्ष्म उपइकाई है जो हिस्टोन प्रोटीनों के क्रोड पर DNA के लिपटने से बनती है। यह शब्द ऊडे et. al, (1975) ने गढ़ा। यह चपटी संरचना है जिसकी लंबाई 10 nm तथा मोटाई 5-5.7 nm होती है। इसका क्रोड न्यू-काय कहलाता है। यह हिस्टोन अणुओं के चार युग्मों से बना होता है। H2A, H2B, H3 तथा H4। DNA इस पर 1.75 फेरे लगाता है

नीचे दिए गए चार (A - D) कथनों में से दो सही कथन चुनिए, जो lac ऑपेरॉन के विषय में हैं।

(A) ग्लूकोस या गैलेक्टोस दमनकारी से बंधकर उसे निष्क्रिय कर सकता है

(B) लैक्टोस की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रचालक क्षेत्र से बंध जाता है

(C) z-जीन परमिएज का कूटलेखन करता है

(D) इसकी व्याख्या फ्रांस्वा जैकब तथा जैक्स मोनो ने की

सही कथन हैं

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Explanation

प्रोकैरियोटों में प्रोटीन संश्लेषण के नियमन की व्याख्या हेतु 1961 में एक परिकल्पना दी गई। यह परिकल्पना एफ. जैकब तथा जे. मोनो ने दी और इसके लिए उन्हें 1965 में नोबेल पुरस्कार मिला; यह परिकल्पना ऑपेरॉन मॉडल के नाम से जानी गई।

प्रचालक जीन DNA का वह खंड है जो अनुलेखन पर नियंत्रण रखता है। लैक्टोस की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रचालक जीन से बंध जाता है।

आनुवंशिक कूट का जो पक्ष उसका प्रमुख लक्षण नहीं है, वह है उसका

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आनुवंशिक कूट अपह्रासी है, अर्थात्, किसी दिए गए ऐमीनो अम्ल को एक से अधिक कूटों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।

कोशिका माध्यम के भीतर आनुवंशिक कूट को अद्वयर्थी कहा जाता है क्योंकि कोई विशेष कूट सदैव उसी ऐमीनो अम्ल का कूटलेखन करता है। किंतु कुछ विरले प्रकरणों में आनुवंशिक कूट द्वयर्थी पाया जाता है, अर्थात्, कुछ कूट भिन्न दशाओं में भिन्न ऐमीनो अम्लों का कूटलेखन करते हैं। आनुवंशिक कूट लगभग सार्वभौमिक है।

अनुषंगी DNA किसमें उपयोगी उपकरण है

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ब्रिटेन तथा उनके सहकर्मियों (1966-68) ने दर्शाया कि अनेक कशेरुकी DNA पुनःसंयोजित होते हैं, विशेषकर तब जब उन्हें छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाए। इस प्रेक्षण से यह परिकल्पना उत्पन्न हुई कि ऐसे DNA में क्षारों के कुछ छोटे अनुक्रम सौ या अधिक बार पुनरावृत्त होते हैं। ऐसे DNA को पुनरावृत्तिक अथवा अनुषंगी DNA कहा गया है। यीस्ट को छोड़कर सभी सुकेंद्रकियों में अनुषंगी DNA होता है। VNTR/RFLP जैसे अनुषंगी DNA क्षेत्र DNA अंगुलिछापी (न्यायालयिक विज्ञान) का आधार हैं।

निम्नलिखित में से कौन आणविक जीवविज्ञान के केंद्रीय सिद्धांत का पालन नहीं करता?

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बिंदु उत्परिवर्तन में सम्मिलित है

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बिंदु उत्परिवर्तनों में DNA की संरचना बदलकर जीन की संरचना में परिवर्तन होता है। बिंदु उत्परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं – (i) क्षार युग्म प्रतिस्थापन तथा (ii) फ्रेमशिफ्ट प्रतिस्थापन।

अंतर्वेशन किसी न्यूक्लियोटाइड शृंखला में एक या अधिक नाइट्रोजनी क्षारों का जुड़ना है।

द्विगुणन किसी अगुणित घटक में जीनों के एक खंड का एक से अधिक बार उपस्थित होना है।

विलोपन किसी न्यूक्लियोटाइड शृंखला से एक या अधिक नाइट्रोजनी क्षारों का हटना है।

किसी अनुलेखन इकाई में इंट्रॉनों को हटाना तथा एक्सॉनों को एक निश्चित क्रम में जोड़ना कहलाता है ?

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कुछ सुकेंद्रकियों में जीन कूटलेखी न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों से बने होते हैं, जो एक-दूसरे से अकूटलेखी अनुक्रमों के खंडों द्वारा पृथक् रहते हैं। यहाँ कूटलेखी अनुक्रम एक्सॉन तथा अकूटलेखी अनुक्रम इंट्रॉन कहलाते हैं। किसी प्रारूपी सुकेंद्रकी जीन का प्राथमिक अनुलेख एक्सॉनों के साथ-साथ इंट्रॉन भी रखता है। इस प्राथमिक अनुलेख से इंट्रॉन RNA स्प्लाइसिंग नामक प्रक्रिया द्वारा हटा दिए जाते हैं।

DNA का अर्धसंरक्षी प्रतिकृतिकरण सर्वप्रथम किसमें दर्शाया गया

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DNA का अर्धसंरक्षी प्रतिकृतिकरण सर्वप्रथम E. coli में दर्शाया गया। वॉटसन तथा क्रिक द्वारा प्रस्तावित अर्धसंरक्षी विधि के अनुसार बनने वाली दोनों द्विकुंडलियों के प्रत्येक रज्जुक में एक पुराना तथा एक नया रज्जुक होगा। DNA प्रतिकृतिकरण की अर्धसंरक्षी प्रकृति मेसेल्सन तथा स्टाल (1958) के प्रयोग द्वारा सिद्ध हुई।

आनुवंशिक कूट के लिए क्या सत्य नहीं है?

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आनुवंशिक कूट के सामान्य लक्षण हैं:-

(i) आनुवंशिक कूट रैखिक रूप में लिखा जाता है, जिसमें mRNA अणु बनाने वाले राइबोन्यूक्लियोटाइड क्षारों को अक्षरों के रूप में प्रयोग किया जाता है।

(ii) कूट का प्रत्येक शब्द तीन अक्षरों का होता है, अर्थात् कूट त्रिक होता है।

(iii) कोशिका माध्यम के भीतर आनुवंशिक कूट को अद्वयर्थी कहा जाता है।

(iv) कूट अपह्रासी है, अर्थात् किसी दिए गए ऐमीनो अम्ल को एक से अधिक कूटों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।

(v) कूट में ‘प्रारंभ’ तथा ‘विराम’ संकेत होते हैं।

(vi) कूट को अल्पविराम रहित कहा जाता है।

(vii) कूट अनतिव्यापी है।

DNA अणु में

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DNA अणु में निकटवर्ती डिऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड फॉस्फोडाइएस्टर सेतुओं अथवा बंधों द्वारा शृंखला में जुड़े रहते हैं, जो एक मोनोन्यूक्लियोटाइड इकाई के डिऑक्सीराइबोस के 5’ कार्बन को अगली मोनोन्यूक्लियोटाइड इकाई के डिऑक्सीराइबोस के 3’ कार्बन से जोड़ते हैं। वॉटसन तथा क्रिक के अनुसार DNA अणु ऐसी दो पॉलिन्यूक्लियोटाइड शृंखलाओं से बना होता है जो एक-दूसरे के चारों ओर कुंडलित रहती हैं, जिनमें शर्करा-फॉस्फेट शृंखला बाहर की ओर तथा प्यूरीन एवं पिरिमिडीन कुंडली के भीतर की ओर होते हैं। दोनों रज्जुक प्रतिसमांतर चलते हैं। शारगाफ (1950) ने सुझाया कि भिन्न प्रकार के DNA द्वारा दर्शायी जाने वाली व्यापक संघटनात्मक विविधताओं के बावजूद प्यूरीनों की कुल मात्रा पिरिमिडीनों की कुल मात्रा के बराबर होती है (A + G = T + C)।

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