NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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निम्नलिखित में से पदों/नामों का कौन-सा युग्म एक ही वस्तु का बोध कराता है?

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Explanation

जीन पूल किसी समष्टि में उपस्थित समस्त जीनों का योग है। जीनोम किसी जीव का सम्पूर्ण आनुवंशिक संघटन है। कोडॉन आनुवंशिक कूट की मूल इकाई है — DNA अथवा mRNA में तीन आसन्न न्यूक्लियोटाइडों का वह अनुक्रम जो एक अमीनो अम्ल के लिए कूट करता है। जीन आनुवंशिकता की मूल इकाई है; DNA न्यूक्लियोटाइडों का वह अनुक्रम जो किसी प्रोटीन को कूटबद्ध करता है।

सिस्ट्रॉन DNA न्यूक्लियोटाइडों का वह खंड है जो एक पॉलीपेप्टाइड शृंखला के लिए कूट करता है। ट्रिप्लेट तीन न्यूक्लियोटाइडों का वह अनुक्रम है जो एक अमीनो अम्ल के लिए कूट करता है।

अतः,

कोडॉन   ट्रिप्लेट

सिस्ट्रॉन जीन

DNA अंगुलिछापन को तकनीकी रूप से DNA प्रोफाइलिंग अथवा DNA टाइपिंग कहा जाता है।

किसके बारे में सत्य है tRNA?

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Explanation

tRNA में चार पहचान स्थल होते हैं, जिनमें से एक अमीनो अम्ल संलग्नन स्थल है। इसका अमीनो अम्ल संलग्नन स्थल 3’ सिरे पर – CCA अनुक्रम के साथ होता है।

मानव जीनोम में नाइट्रोजनी क्षारकों की कुल संख्या लगभग कितनी अनुमानित की गई है

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Explanation

DNA की दोनों रज्जुकें प्रत्येक रज्जुक के क्षारकों के बीच दुर्बल (हाइड्रोजन) बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं और क्षारक-युग्म बनाती हैं। जीनोम का आकार प्रायः कुल क्षारक-युग्मों की संख्या के रूप में बताया जाता है; मानव जीनोम में लगभग 3 बिलियन क्षारक-युग्म होते हैं।

सदर्न ब्लॉट तकनीक का प्रथम चरण क्या है?

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सदर्न ब्लॉटिंग का नाम एडवर्ड एम. सदर्न के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 1970 के दशक में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में यह विधि विकसित की। सदर्न ब्लॉटिंग किसी जटिल मिश्रण के भीतर एक विशिष्ट DNA अनुक्रम का पता लगाने के लिए बनाई गई है। इस तकनीक हेतु आवश्यक DNA की मात्रा प्रोब के आकार तथा विशिष्ट सक्रियता पर निर्भर करती है। विधि आरम्भ करने से पूर्व वांछित DNA को किसी विशिष्ट केन्द्रकयुक्त कोशिका से पृथक करना आवश्यक है।

कोडॉन तथा उसके द्वारा कूटित अमीनो अम्ल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

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लाइसीन कोडॉन AAA तथा AAG द्वारा कूटित होता है।

किसी जीव में प्रोटीन संश्लेषण के दौरान एक बिंदु पर यह प्रक्रम रुक जाता है। निम्नलिखित में से तीन कोडॉनों का वह समूह चुनिए जिनमें से कोई भी एक यह रुकावट ला सकता है।

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निरर्थक कोडॉन अथवा समापन कोडॉन वे कोडॉन हैं जो किसी अमीनो अम्ल के लिए कूट नहीं करते। ये तीन न्यूक्लियोटाइडों का ऐसा समुच्चय हैं जिनके लिए पॉलीपेप्टाइड शृंखला में अमीनो अम्ल जोड़ने वाला कोई संगत tRNA अणु नहीं होता। इस कारण प्रोटीन संश्लेषण समाप्त हो जाता है और पूर्ण पॉलीपेप्टाइड राइबोसोम से मुक्त हो जाती है। तीन समापन कोडॉन हैं — UAA (ऑकर), UAG (ऐम्बर) तथा UGA (ओपल)।

वे उत्परिवर्तन जो सामान्यतः किसी अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करने वाले कोडॉन के स्थान पर इन तीन कोडॉनों में से कोई उत्पन्न कर देते हैं, निरर्थक उत्परिवर्तन कहलाते हैं।

जिस स्थल पर tRNA क्रमशः mRNA तथा अमीनो अम्लों से जुड़ता है, वे हैं

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Explanation

अनुवादन के दौरान tRNA का प्रतिकोडॉन लूप mRNA पर स्थित कोडॉन से जुड़ता है। tRNA का CCA सिरा अमीनो अम्ल से जुड़ता है, जिसे तत्पश्चात् बढ़ती हुई पॉलीपेप्टाइड शृंखला में जोड़ दिया जाता है। प्रोटीन संश्लेषण के दौरान tRNA का mRNA तथा अमीनो अम्लों से जुड़ने का यही सही प्रतिरूप है।

स्तम्भ I में दिए गए ट्रिप्लेट कोडॉनों का स्तम्भ II में उल्लिखित उनके अमीनो अम्लों से मिलान कीजिए तथा दिए गए कूटों में से सही विकल्प चुनिए।

  स्तम्भ I

   स्तम्भ II

A. GGG

(i) प्रोलीन

B. UUU

(ii) ग्लाइसीन

C. CCC

(iii) आर्जिनीन

D. AAA

(iv) फेनिलऐलेनीन

 

(v) लाइसीन

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समापन कोडॉन के कारण पॉलीपेप्टाइड संश्लेषण के असामयिक समापन को via में क्षतिपूरक उत्परिवर्तन द्वारा दूर किया जा सकता है। यह आनुवंशिक परिघटना कहलाती है — tRNA

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Explanation

बहिर्जीनी अथवा अंतरजीनी दमन किसी जीन में हुए उत्परिवर्तन के प्रभाव को जीनोम के किसी अन्य स्थान पर प्रकट करता है।

इसे इस प्रकार समझाया जा सकता है कि प्रोटीन अणुओं के बीच की पूरक अन्योन्यक्रिया को बाधित करने वाले उत्परिवर्तन की क्षतिपूर्ति जीनोम में किसी अन्य स्थान पर होने वाले दूसरे उत्परिवर्तन द्वारा हो जाती है, जो उन अणुओं के बीच वह अन्योन्यक्रिया पुनःस्थापित कर देता है अथवा उसका उपयुक्त विकल्प प्रदान कर देता है।

मान लीजिए कि पृथ्वी पर विकास इस प्रकार हुआ होता कि 20 के स्थान पर 96 अमीनो अम्ल होते। DNA में 12 भिन्न प्रकार के क्षारक हैं तथा DNA संश्लेषण आज की ही भाँति होता है। तब प्रति DNA कोडॉन क्षारकों की न्यूनतम संख्या होगी

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Explanation

यदि एक क्षारक एक अमीनो अम्ल के लिए कूट करता है तो (12)1 = 12, परंतु हमारे पास 96 अमीनो अम्ल हैं। मान लीजिए दो क्षारक मिलकर एक कोडॉन बनाते हैं, तब (12)2 = 144। यह 96 अथवा 20 अमीनो अम्लों के लिए कूट करने हेतु पर्याप्त है, अतः दो क्षारक मिलकर एक कोडॉन बनाते हैं।

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Frequently Asked Questions

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