NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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किसी जैविक समुदाय में विभिन्न स्तरों पर रहने वाली विभिन्न जातियों के ऊर्ध्वाधर वितरण को कहते हैं 

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(b) किसी जैविक समुदाय में विभिन्न स्तरों पर रहने वाली विभिन्न जातियों के ऊर्ध्वाधर वितरण को स्तरण कहते हैं। यह किसी आवास के ऊर्ध्वाधर परतीकरण, अर्थात् वनस्पति की परतों में व्यवस्था को निर्दिष्ट करता है। इसमें वनस्पति की परतों का वर्गीकरण मुख्यतः उन भिन्न ऊँचाइयों के अनुसार किया जाता है जहाँ तक उनके पादप बढ़ते हैं। प्रत्येक परत में भिन्न जंतु तथा पादप समुदाय निवास करते हैं।

द्वितीयक अनुक्रमण कहाँ होता है

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द्वितीयक अनुक्रमण समुदाय-परिवर्तनों की वह श्रेणी है जो पहले उपनिवेशित, परंतु विक्षोभित या क्षतिग्रस्त आवास पर होती है। यह किसी विनाशकारी घटना से गुजरे पारितंत्र के पुनर्विकास की प्रक्रिया है। 

किसी पोषी स्तर पर किसी विशेष समय पर जीवित पदार्थ के भार को कहते हैं

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किसी दी गई समयावधि में प्राथमिक उत्पादकों द्वारा (प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से) जैवभार के रूप में कार्बनिक पदार्थ (रासायनिक ऊर्जा) के उत्पादन की दर को सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) कहते हैं।

शुद्ध प्राथमिक उत्पादन वह दर है जिस पर किसी पारितंत्र के सभी पादप (उत्पादक) शुद्ध उपयोगी रासायनिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं; यह GPP तथा श्वसन के दौरान पादपों द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा की दर के अंतर के बराबर होता है।

NPP = GPP - श्वसन (पादपों द्वारा)

द्वितीयक उत्पादकता किसी तंत्र में परपोषियों (उपभोक्ताओं) द्वारा जैवभार अथवा कार्बनिक पदार्थ का निर्माण है।

शुद्ध उत्पादकता किसी दिए गए पोषी स्तर पर एक विशिष्ट अंतराल में कार्बनिक पदार्थ में संचित ऊर्जा की वह मात्रा है, जो उस स्तर के जीवों के श्वसन द्वारा हुई हानि से कम होती है।

द्वितीयक उत्पादकता किसके द्वारा नए कार्बनिक पदार्थ के निर्माण की दर है

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(c) द्वितीयक उत्पादकता उपभोक्ताओं द्वारा नए कार्बनिक पदार्थ के निर्माण की दर है। प्राथमिक उत्पादकता किसी विशेष क्षेत्र में निवास करने वाले उत्पादकों पर निर्भर करती है। 

निम्नलिखित में से कौन पारितंत्र में गैसीय जैव-भू-रासायनिक चक्र नहीं है?

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फॉस्फोरस चक्र एक अवसादी जैव-भू-रासायनिक चक्र है। यह स्थलमंडल, जलमंडल तथा जैवमंडल में फॉस्फोरस की गति का वर्णन करता है तथा इसका मुख्य भंडार स्थलमंडल है। फॉस्फोरस की गति में वायुमंडल कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभाता, क्योंकि पृथ्वी पर पाए जाने वाले सामान्य ताप तथा दाब की सीमाओं में फॉस्फोरस तथा फॉस्फोरस-आधारित यौगिक प्रायः ठोस होते हैं। फॉस्फीन गैस का उत्पादन केवल विशिष्ट, स्थानीय परिस्थितियों में होता है।

निम्नलिखित खाद्य श्रृंखला में संभावित कड़ी A की पहचान कीजिए

हरा पादप -> कीट -> मेंढक -> A -> चील

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हरा पादप (उत्पादक) → कीट (प्राथमिक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक शाकाहारी) → मेंढक (द्वितीयक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक मांसाहारी) → कोबरा (तृतीयक उपभोक्ता अथवा द्वितीयक मांसाहारी) → चील (शीर्ष उपभोक्ता अथवा तृतीयक मांसाहारी)

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन द्वितीयक अनुक्रमण के लिए सही है?

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द्वितीयक अनुक्रमण अथवा उपक्रमक वह पारिस्थितिक अनुक्रमण है जो हाल ही में अनावृत हुए क्षेत्र में होता है, जिसमें पहले रह चुके जीवों के प्रचुर कार्बनिक मलबे, अवशेष तथा प्रजनक अंग विद्यमान रहते हैं। यह अधिक सामान्य है तथा वनाग्नि, वनोन्मूलन, अत्यधिक चराई, भूस्खलन, भूकंप, बार-बार आने वाली बाढ़ आदि के कारण किसी क्षेत्र के अनावृत होने से उत्पन्न होता है। हाल में अनावृत हुए क्षेत्र पर घासस्थल की स्थापना के लिए केवल 50 से 100 वर्ष आवश्यक होते हैं। वन के निर्माण में 100 से 200 वर्ष लगते हैं।

ऊर्जा के पिरामिड के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है, जबकि शेष तीन सही हैं?

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ऊर्जा का पिरामिड विभिन्न आरोही पोषी स्तरों में प्रति इकाई क्षेत्र ऊर्जा का क्रमवार आलेखीय निरूपण है, जिसमें आधार पर उत्पादक तथा शिखर पर शीर्ष मांसाहारी होते हैं। ऊर्जा का पिरामिड सभी स्थितियों में सीधा होता है। यह अन्य प्रकार के पारिस्थितिक पिरामिडों की तुलना में अधिक यथार्थ भी है।

निम्नलिखित में से कौन भारत में अधिकतम आनुवंशिक विविधता दर्शाता है?

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अकेले भारत में धान की अनुमानित 2,00,000 किस्में हैं। भारत में धान की विविधता विश्व की सर्वाधिक समृद्ध विविधताओं में से एक है। भारत में उगाई जाने वाली बासमती धान की 27 प्रलेखित किस्में हैं।

किसी क्षेत्र में किसी पोषी स्तर पर किसी भी समय जीवित पदार्थ के भार को कहते हैं 

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किसी पारितंत्र में उसके विभिन्न पोषी स्तरों पर उपस्थित जीवित पदार्थ की मात्रा को स्थायी फसल कहते हैं। इसे प्रति इकाई क्षेत्र संख्या अथवा जैवभार के रूप में व्यक्त किया जाता है। जैवभार को ताजे भार अथवा शुष्क भार के रूप में मापा जाता है।

ताजे भार की अपेक्षा शुष्क भार को वरीयता दी जाती है, क्योंकि यह नमी की मात्रा के साथ बदलता नहीं है। स्थायी फसल उत्पादकता तथा वृद्धि की सघनता का संकेत देती है।

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Frequently Asked Questions

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