कारा का उभयलिंगी पादप दर्शाता है:
पृष्ठ सं.12, चित्र 1.6
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कारा का उभयलिंगी पादप दर्शाता है:
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निम्नलिखित सारणी में दिए गए रिक्त स्थान A, B, C तथा D के नाम बताइए:
|
सूक्ष्मजीव का प्रकार |
वैज्ञानिक नाम |
व्यावसायिक उत्पाद |
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जीवाणु |
A |
लैक्टिक अम्ल |
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कवक |
B |
साइक्लोस्पोरिन A |
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C |
Monascus purpureus |
स्टेटिन |
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कवक |
Penicillium notatum |
D |
A: Lactobacillus एक जीवाणु है जिसका उपयोग व्यावसायिक रूप से लैक्टिक अम्ल के उत्पादन में किया जाता है।
B: Trichoderma polysporum कवक की एक जाति है जिसका व्यावसायिक उत्पाद साइक्लोस्पोरिन A है, जिसे अंग-प्रत्यारोपण रोगियों में प्रतिरक्षा-संदमक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
C: यीस्ट (कवक), Monascus purpureus एक फफूँद जाति है जिसका रंग बैंगनी-लाल होता है। इसका व्यावसायीकरण रुधिर-कोलेस्टेरॉल कम करने वाले कारक के रूप में हुआ है। यह कोलेस्टेरॉल के संश्लेषण के लिए उत्तरदायी एन्जाइम का प्रतिस्पर्धी संदमन करके कार्य करता है।
D: पेनिसिलिन एक प्रभावी प्रतिजैविक है जो कवक Penicillium notatum द्वारा उत्पन्न किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-से जीवाणु वायुमंडल से नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक हैं?
A. Azotobacter
B. Rhizobium
C. Azospirillum
D. Lactobacillus
Rhizobium जीवाणु लेग्यूमिनी पादपों की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध में रहकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को कार्बनिक रूपों में स्थिर करते हैं, जिसे पादप पोषक के रूप में उपयोग करता है। Azotobacter तथा Azospirillum मुक्तजीवी जीवाणु हैं जो मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाते हैं। जबकि Lactobacillus लैक्टिक अम्ल उत्पन्न करने वाला जीवाणु है।
भारत में बायोगैस उत्पादन की तकनीक किसके प्रयासों से विकसित हुई है:
A. खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC)
B. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (IARI)
C. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI)
D. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (ICMR)
भारत में बायोगैस उत्पादन की तकनीक मुख्यतः भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) तथा खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के प्रयासों से विकसित हुई।
सूक्ष्मजीवों से कौन-से औद्योगिक उत्पाद संश्लेषित किए जाते हैं?
A. प्रतिजैविक
B. किण्वित पेय
C. एन्जाइम तथा रसायन
D. जैवसक्रिय अणु
सूक्ष्मजीवों का व्यापक रूप से निम्नलिखित के संश्लेषण में उपयोग होता है :
1. पेनिसिलिन जैसे प्रतिजैविक।
2. वाइन तथा बियर जैसे किण्वित पेय।
3. लाइपेज जैसे एन्जाइम तथा सिट्रिक अम्ल एवं ब्यूटिरिक अम्ल जैसे रसायन।
4. साइक्लोस्पोरिन A जैसे जैवसक्रिय अणु।
औद्योगिक स्तर पर सूक्ष्मजीवों को उगाने के लिए प्रयुक्त बड़े पात्र कहलाते हैं:
औद्योगिक स्तर पर उत्पादन के लिए सूक्ष्मजीवों को किण्वक कहलाने वाले अत्यंत बड़े पात्रों में उगाना आवश्यक होता है।
निम्नलिखित में से किस जीव का उपयोग पेय पदार्थों के उत्पादन में किया जाता है?
Saccharomyces cerevisiae का उपयोग माल्टयुक्त अनाजों तथा फलों के रसों के किण्वन द्वारा एथेनॉल एवं पेय पदार्थ बनाने में किया जाता है।
गुँधे आटे के फूले हुए रूप के लिए उत्तरदायी गैस किससे प्राप्त होती है:
डोसा तथा इडली जैसे खाद्य पदार्थ बनाने में प्रयुक्त गुँधा आटा भी जीवाणुओं द्वारा किण्वित होता है। गुँधे आटे का फूला हुआ रूप किण्वन प्रक्रिया द्वारा CO2 गैस के उत्पादन के कारण होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतिजैविक सर्वप्रथम खोजा गया था?
अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने Staphylococci जीवाणुओं पर कार्य करते समय एक बार अपनी बिना धुली संवर्धन प्लेटों में से एक में उगती हुई फफूँद देखी, जिसके चारों ओर Staphylococci उग नहीं सके। उन्होंने पाया कि ऐसा फफूँद द्वारा उत्पन्न एक रसायन के कारण था तथा उन्होंने इस फफूँद Penicillium notatum के नाम पर इसका नाम पेनिसिलिन रखा।
साइक्लोस्पोरिन A किससे उत्पन्न होता है:
साइक्लोस्पोरिन A, जिसे अंग-प्रत्यारोपण रोगियों में प्रतिरक्षा-संदमक के रूप में प्रयोग किया जाता है, कवक Trichoderma polysporum द्वारा उत्पन्न किया जाता है।
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