एकबीजपत्री मूलों की विशेषता है कि उनकी मज्जा होती है:
एकबीजपत्री मूलों में मज्जा बड़ी और सुविकसित होती है, जैसा कि NCERT पाठ में कहा गया है: 'मज्जा बड़ी और सुविकसित होती है।'
NEET के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
एकबीजपत्री मूलों की विशेषता है कि उनकी मज्जा होती है:
एकबीजपत्री मूलों में मज्जा बड़ी और सुविकसित होती है, जैसा कि NCERT पाठ में कहा गया है: 'मज्जा बड़ी और सुविकसित होती है।'
एकबीजपत्री मूलों में संवहन पूलों का वर्णन किया जाता है:
संदर्भ कहता है: 'जब किसी संवहन पूल के भीतर जाइलम और फ्लोएम विभिन्न त्रिज्याओं पर एकांतर क्रम में व्यवस्थित होते हैं, तो इस व्यवस्था को अरीय कहते हैं, जैसे मूलों में।' और विशेष रूप से एकबीजपत्री मूलों के लिए: 'द्विबीजपत्री मूल की तुलना में, जिसमें कम जाइलम पूल होते हैं, एकबीजपत्री मूल में सामान्यतः छह से अधिक (बहुआदिदारुक) जाइलम पूल होते हैं।'
एकबीजपत्री मूल की निम्नलिखित परतों को परिधि से केंद्र की ओर क्रम में लगाइए:
चित्र 6.3 (b) और मूल शारीरिकी के सामान्य वर्णन के आधार पर, परिधि से केंद्र की ओर परतें हैं: बाह्यत्वचा, वल्कुट, अंतस्त्वचा, परिरंभ, फ्लोएम, जाइलम (संवहन पूल) और मज्जा।
एकबीजपत्री मूलों में द्वितीयक वृद्धि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'एकबीजपत्री मूलों में कोई द्वितीयक वृद्धि नहीं होती।'
एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री मूलों के बीच संवहन ऊतक संगठन में प्राथमिक अंतर क्या है?
पाठ कहता है: 'द्विबीजपत्री मूल की तुलना में, जिसमें कम जाइलम पूल होते हैं, एकबीजपत्री मूल में सामान्यतः छह से अधिक (बहुआदिदारुक) जाइलम पूल होते हैं।' द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री दोनों मूलों में अरीय संवहन पूल होते हैं।
एकबीजपत्री मूलों में संवहन पूलों की विशेषता है:
पाठ मूलों के लिए कहता है: 'जब किसी संवहन पूल के भीतर जाइलम और फ्लोएम विभिन्न त्रिज्याओं पर एकांतर क्रम में व्यवस्थित होते हैं, तो इस व्यवस्था को अरीय कहते हैं, जैसे मूलों में।' यह एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री दोनों मूलों पर लागू होता है। एकबीजपत्री मूलों में विशेष रूप से कैम्बियम नहीं होता और संयुक्त पूल नहीं होते।
द्विबीजपत्री मूल की तरह ही एकबीजपत्री मूल में वल्कुट की सबसे भीतरी परत कहलाती है:
मूलों के आंतरिक ऊतक संगठन में सम्मिलित है: 'वल्कुट की सबसे भीतरी परत अंतस्त्वचा कहलाती है।' यह लक्षण एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री मूलों में साझा है।
एकबीजपत्री मूल की अंतस्त्वचा में पाई जाने वाली कैस्पेरियन पट्टियों की प्रकृति क्या है?
अंतस्त्वचा 'बिना किसी अंतरकोशिकीय स्थान के पीपाकार कोशिकाओं की एकल परत से बनी होती है। अंतस्त्वचीय कोशिकाओं की स्पर्शरेखीय और अरीय भित्तियों पर जल-अपारगम्य, मोमी पदार्थ सुबेरिन का निक्षेपण कैस्पेरियन पट्टियों के रूप में होता है।' यह द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री दोनों मूलों पर लागू होता है, क्योंकि एकबीजपत्री मूल की शारीरिकी 'कई मायनों में द्विबीजपत्री मूल के समान है'।
एकबीजपत्री मूलों में पार्श्व मूल किस ऊतक से उत्पन्न होती हैं?
पाठ द्विबीजपत्री मूलों के लिए कहता है कि 'पार्श्व मूलों का आरंभ और द्वितीयक वृद्धि के दौरान संवहन कैम्बियम का आरंभ इन्हीं कोशिकाओं में होता है' (परिरंभ के संदर्भ में)। चूँकि एकबीजपत्री मूल कई शारीरिक समानताएँ साझा करती हैं, पार्श्व मूल भी परिरंभ से ही उत्पन्न होती हैं।
अनुनाद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'अणु समय के कुछ अंश के लिए एक विहित रूप में और समय के अन्य अंशों के लिए अन्य विहित रूपों में नहीं रहता।' इसके बजाय, अनुनाद संकर एक एकल, अपरिवर्तनशील संरचना है जिसे किसी एक विहित रूप द्वारा सटीक रूप से निरूपित नहीं किया जा सकता।
Ready to ace NEET?
Free access · No credit card required
हाँ। इस पेज के हर NEET प्रश्न को बिना लॉगिन किए मुफ़्त हल किया जा सकता है, और सही उत्तर व विस्तृत व्याख्या तुरंत देखी जा सकती है।
नहीं। प्रश्न हल करने और उत्तर देखने के लिए किसी खाते की आवश्यकता नहीं है। मुफ़्त खाता बुकमार्क, निजी नोट्स और प्रगति ट्रैकिंग जोड़ देता है।
इस प्रश्न बैंक में NEET के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और अभ्यास प्रश्न दोनों शामिल हैं — जहाँ लागू हो, हर प्रश्न पर उसका परीक्षा वर्ष अंकित है।