NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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जब कोई व्यक्ति चुंबक को कुंडली की ओर ले जाता है, तो प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध कार्य किया जाता है। यह ऊर्जा कहाँ जाती है?

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चुंबक को ले जाने में व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता है, जो फिर प्रेरित धारा के कारण कुंडली में ऊष्मा (जूल तापन) के रूप में क्षयित होती है। यह ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करता है। (NCERT पाठ देखें: 'यह ऊर्जा प्रेरित धारा द्वारा उत्पन्न जूल तापन से क्षयित होती है।')

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जब छड़ चुंबक को बंद कुंडली की ओर धकेला जा रहा हो, तो प्रेरित धारा प्रतिकर्षण बल उत्पन्न करती है। इसका अर्थ है कि चुंबक को धकेलने में प्रयुक्त यांत्रिक ऊर्जा रूपांतरित होती है:

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प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध चुंबक को ले जाने में किया गया यांत्रिक कार्य प्रेरित धारा के रूप में विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता है, जो फिर कुंडली के प्रतिरोध के कारण ऊष्मा (जूल तापन) के रूप में क्षयित होती है। (NCERT पाठ देखें: 'अतः चुंबक को ले जाने में व्यक्ति को कार्य करना पड़ता है। व्यक्ति द्वारा व्यय की गई ऊर्जा कहाँ जाती है? यह ऊर्जा प्रेरित धारा द्वारा उत्पन्न जूल तापन से क्षयित होती है।')

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लेंज का नियम प्रेरित EMF की ध्रुवता देता है। फैराडे के नियम ($$\varepsilon = -\frac{d\Phi_B}{dt}$$) में ऋणात्मक चिह्न क्या दर्शाता है?

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फैराडे के प्रेरण नियम में ऋणात्मक चिह्न ठीक-ठीक लेंज के नियम का गणितीय निरूपण है, जो दर्शाता है कि प्रेरित EMF (और इस प्रकार धारा) उसे उत्पन्न करने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करती है। (NCERT पाठ देखें: 'फैराडे के नियम के व्यंजक में ऋणात्मक चिह्न इसी तथ्य को दर्शाता है।' और 'समीकरण (6.3) में दर्शाया गया ऋणात्मक चिह्न इसी प्रभाव को निरूपित करता है।')

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एक बंद पाश को दो स्थायी चुंबकों के ध्रुवों के बीच चुंबकीय क्षेत्र में स्थिर रखा गया है। क्या बहुत प्रबल चुंबकों का उपयोग करके पाश में धारा उत्पन्न की जा सकती है?

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फैराडे के नियम के अनुसार, EMF तभी प्रेरित होता है जब चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो। यदि पाश और चुंबक स्थिर हैं, तो फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं है, अतः चुंबक की प्रबलता चाहे जो हो, कोई प्रेरित धारा नहीं होगी। (NCERT उदाहरण 6.5 (a) देखें: 'क्या हम बहुत प्रबल चुंबकों का उपयोग करके पाश में धारा उत्पन्न करने की आशा कर सकते हैं?' उत्तर का अर्थ है नहीं, क्योंकि यह नियत क्षेत्र में स्थिर पाश है।)

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कल्पना कीजिए कि एक छड़ चुंबक ताँबे के छल्ले से होकर गिर रहा है। लेंज के नियम के अनुसार, जैसे-जैसे चुंबक छल्ले के निकट आता है, छल्ले में प्रेरित धारा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाएगी जो:

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जैसे-जैसे चुंबक छल्ले की ओर गिरता है, छल्ले से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बदलता है। प्रेरित धारा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाएगी जो इस परिवर्तन का विरोध करे, अर्थात् वह निकट आते चुंबक को प्रतिकर्षित करेगा और उसके गिरने को धीमा करेगा। यह ऊर्जा संरक्षण को प्रदर्शित करता है, क्योंकि चुंबक की गतिज ऊर्जा छल्ले में विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है। (प्रॉम्प्ट उदाहरण के संकल्पनात्मक प्रश्न से संबंधित: 'ताँबे का एक छल्ला क्षैतिज रखा गया है और एक छड़ चुंबक को उसकी लंबाई छल्ले के अक्ष के अनुदिश रखते हुए छल्ले से होकर गिराया जाता है। छल्ले से गुजरते समय गिरते चुंबक का त्वरण है'।)

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फैराडे और लेंज के नियमों के अनुसार, निम्नलिखित में से किस स्थिति में प्रेरित EMF उत्पन्न होगा?

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प्रेरित EMF तब उत्पन्न होता है जब चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो। चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करते चालक में सामान्यतः क्षेत्र के सापेक्ष क्षेत्रफल सदिश के अभिविन्यास में परिवर्तन होता है, जिससे चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और इस प्रकार EMF प्रेरित होता है। अन्य विकल्प ऐसी स्थितियों का वर्णन करते हैं जहाँ चुंबकीय फ्लक्स नियत रहता है या प्रेरण के लिए प्रासंगिक कोई फ्लक्स परिवर्तन नहीं होता। (फैराडे का नियम देखें: $$\varepsilon = -\frac{d\Phi_B}{dt}$$, जिसका अर्थ है कि फ्लक्स में परिवर्तन आवश्यक है।)

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विद्युत-चुंबकीय प्रेरण पर लागू ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार, यदि प्रेरित धारा फ्लक्स परिवर्तन उत्पन्न करने वाली गति में सहायता करती, तो इसका क्या परिणाम होता?

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यदि प्रेरित धारा गति में सहायता करती, तो तंत्र बिना किसी बाहरी कार्य निवेश के गतिज ऊर्जा प्राप्त करता, जिससे सतत-गति मशीन बनती, जो ऊर्जा संरक्षण के नियम का उल्लंघन है। (NCERT पाठ देखें: 'यदि ऐसा हो सकता, तो उपयुक्त व्यवस्था से एक सतत-गति मशीन बनाई जा सकती थी। यह ऊर्जा संरक्षण के नियम का उल्लंघन करता है और इसलिए नहीं हो सकता।')

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जब कोई धातु की छड़ वेग $v$ से एकसमान चुंबकीय क्षेत्र $B$ के लंबवत गति करती है, तो प्रेरित गतिक EMF $$\varepsilon = Blv$$ द्वारा दिया जाता है। यह परिघटना लेंज के नियम के अनुरूप है क्योंकि:

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गतिक EMF में भी लेंज के नियम का सिद्धांत लागू होता है। गतिमान छड़ में प्रेरित धारा ऐसा चुंबकीय बल बनाएगी जो गति का विरोध करता है, अतः वेग बनाए रखने के लिए कार्य आवश्यक है, जो ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करता है। यदि बल गति में सहायता करता, तो यह सतत-गति की स्थिति होती। (गतिक EMF पर लेंज के नियम और ऊर्जा संरक्षण का संकल्पनात्मक अनुप्रयोग।)

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एक आयताकार पाश पर विचार कीजिए जो नियत वेग से एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के क्षेत्र से बाहर क्षेत्र-मुक्त क्षेत्र में जा रहा है। प्रेरित धारा के बारे में कौन-सा कथन सही है?

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जैसे-जैसे पाश क्षेत्र से बाहर जाता है, चुंबकीय फ्लक्स घटता है। लेंज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा ऐसी दिशा में बहेगी जो इस कमी का विरोध करने वाला चुंबकीय क्षेत्र बनाए, अर्थात् वह पाश को क्षेत्र में वापस 'खींचने' या प्रभावी रूप से फ्लक्स को घटने से रोकने का प्रयास करेगी। (NCERT उदाहरण 6.4 (ii व iii) देखें, जहाँ बाहर की गति फ्लक्स में कमी करती है और प्रेरित धारा इस कमी का विरोध करने के लिए बहती है।)

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निम्नलिखित में से किस सहायक जनन प्रौद्योगिकी (ART) में 8 से अधिक कोरकखंडों वाले भ्रूण का गर्भाशय में स्थानांतरण किया जाता है?

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NCERT पाठ के अनुसार, '8 से अधिक कोरकखंडों वाले भ्रूणों को गर्भाशय में (IUT – अंतःगर्भाशयी स्थानांतरण), ताकि उनका आगे का परिवर्धन पूरा हो सके।'

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