NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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निम्नलिखित में से कौन-सा +R (धनात्मक अनुनाद) प्रभाव को निरूपित करता है?

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संदर्भ +R प्रभाव को इस प्रकार परिभाषित करता है: 'इस प्रभाव में, इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण संयुग्मित निकाय से जुड़े परमाणु या प्रतिस्थापी समूह से दूर होता है। यह इलेक्ट्रॉन विस्थापन अणु में कुछ स्थितियों को उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व वाली बना देता है।'

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$\text{O}_3$ अणु में, ऑक्सीजन-ऑक्सीजन बंध लंबाइयाँ सभी 128 pm हैं। यह प्रेक्षण इसकी संरचना के बारे में क्या संकेत करता है?

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संदर्भ $\text{O}_3$ के लिए कहता है: 'सामान्य O–O और O=O बंध लंबाइयाँ क्रमशः 148 pm और 121 pm हैं। $\text{O}_3$ अणु में प्रयोगतः निर्धारित ऑक्सीजन-ऑक्सीजन बंध लंबाइयाँ समान (128 pm) हैं... ऊपर दिखाई गई दो संरचनाएँ विहित संरचनाएँ या अनुनाद संरचनाएँ हैं और उनका संकर, अर्थात् III संरचना, $\text{O}_3$ की संरचना को अधिक यथार्थ रूप से निरूपित करती है।' इसका तात्पर्य है कि वास्तविक बंध एक औसत है।

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कार्बोनेट आयन ($\text{CO}_3^{2-}$) के लिए, सभी कार्बन-ऑक्सीजन बंध समतुल्य हैं। इसकी सर्वोत्तम व्याख्या है:

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प्रश्न 4.3 का संदर्भ कहता है: 'कार्बन और ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच दो एकल बंधों और एक द्विबंध की उपस्थिति पर आधारित एकल लुईस संरचना अणु का यथार्थ निरूपण करने के लिए अपर्याप्त है क्योंकि यह असमान बंध दर्शाती है। प्रयोगात्मक निष्कर्षों के अनुसार, $\text{CO}_3^{2-}$ में सभी कार्बन-ऑक्सीजन बंध समतुल्य हैं। अतः कार्बोनेट आयन का सर्वोत्तम वर्णन नीचे दिखाए गए विहित रूपों I, II और III के अनुनाद संकर के रूप में किया जाता है।'

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'अनुनाद ऊर्जा' या 'अनुनाद स्थायीकरण ऊर्जा' क्या है?

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संदर्भ कहता है: 'अणु की वास्तविक संरचना (अनुनाद संकर) की ऊर्जा किसी भी विहित संरचना की ऊर्जा से कम होती है। वास्तविक संरचना और न्यूनतम ऊर्जा वाली अनुनाद संरचना के बीच ऊर्जा के अंतर को अनुनाद स्थायीकरण ऊर्जा या केवल अनुनाद ऊर्जा कहते हैं।'

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विहित (अनुनाद) संरचनाओं के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त आवश्यक रूप से सत्य नहीं है?

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संदर्भ कहता है: 'अनुनाद संरचनाओं में (i) नाभिकों की स्थितियाँ समान और (ii) अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।' यह भी कहता है: 'वे अपने स्थायित्व के अनुपात में वास्तविक संरचना में योगदान देती हैं,' जिसका तात्पर्य है कि वे आवश्यक रूप से समान रूप से स्थायी नहीं हैं (कुछ अन्य की तुलना में अधिक स्थायी योगदायी हैं)। उदाहरण के लिए, प्रश्न 8.17 में स्थायित्व I > II > III स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।

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नाइट्रोमेथेन ($\text{CH}_3\text{NO}_2$) में, दोनों N-O बंध समान लंबाई के हैं, जो N-O एकल बंध और N=O द्विबंध के बीच की है। यह संकेत करता है कि नाइट्रोमेथेन है:

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संदर्भ कहता है: 'तथापि, यह ज्ञात है कि नाइट्रोमेथेन के दोनों N–O बंध समान लंबाई के हैं (N–O एकल बंध और N=O द्विबंध के बीच की)। अतः नाइट्रोमेथेन की वास्तविक संरचना दो विहित रूपों I और II का अनुनाद संकर है।'

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विहित संरचनाओं की तुलना में ऊर्जा के संदर्भ में अनुनाद संकर बनने का क्या परिणाम है?

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संदर्भ कहता है: 'अनुनाद अणु को स्थायी बनाता है क्योंकि अनुनाद संकर की ऊर्जा किसी भी एकल विहित संरचना की ऊर्जा से कम होती है।'

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ऋणात्मक अनुनाद प्रभाव (-R प्रभाव) तब देखा जाता है जब:

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संदर्भ कहता है: 'यह प्रभाव तब देखा जाता है जब इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण संयुग्मित निकाय से जुड़े परमाणु या प्रतिस्थापी समूह की ओर होता है। उदाहरण के लिए नाइट्रोबेंजीन में यह इलेक्ट्रॉन...'

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वंशागति के गुणसूत्रीय सिद्धांत का प्रायोगिक सत्यापन किसने प्रदान किया?

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संदर्भ कहता है: 'विचारों के इस संश्लेषण के बाद, थॉमस हंट मॉर्गन और उनके सहयोगियों द्वारा वंशागति के गुणसूत्रीय सिद्धांत के प्रायोगिक सत्यापन ने लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नता के आधार की खोज कराई।'

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लक्षणों को नियंत्रित करने वाले 'कारकों' की संकल्पना, जिन्हें बाद में जीन नाम दिया गया, किसने प्रस्तावित की?

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सारांश कहता है: 'मेंडल ने वंशागति के सिद्धांत प्रस्तावित किए, जिन्हें आज 'मेंडल के वंशागति के नियम' कहा जाता है। उन्होंने प्रस्तावित किया कि लक्षणों को नियंत्रित करने वाले 'कारक' (जिन्हें बाद में जीन नाम दिया गया) युग्मों में पाए जाते हैं, जिन्हें युग्मविकल्पी (एलील) कहते हैं।'

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Frequently Asked Questions

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