चुंबकीय फ्लक्स के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही SI मात्रक है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर (Wb) या टेस्ला मीटर वर्ग ($T m^2$) है।'
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चुंबकीय फ्लक्स के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही SI मात्रक है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक वेबर (Wb) या टेस्ला मीटर वर्ग ($T m^2$) है।'
चुंबकीय फ्लक्स एक अदिश राशि है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखे क्षेत्रफल A के पृष्ठ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स ($\Phi_B$) को सही परिभाषित करता है?
NCERT कहता है, 'एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखे क्षेत्रफल A के पृष्ठ से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $\Phi_B = B \cdot A = BA \cos \theta$ के रूप में परिभाषित है', जहाँ $\theta$ B और A के बीच का कोण है। अदिश गुणनफल एक अदिश राशि को दर्शाता है।
10 cm त्रिज्या, 500 फेरों और 2 $\Omega$ प्रतिरोध की एक वृत्ताकार कुंडली को $3.0 \times 10^{-5}$ T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत तल में रखा गया है। यदि कुंडली को अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः 0.25 s में 180° घुमाया जाए, तो कुंडली से गुजरने वाला प्रारंभिक चुंबकीय फ्लक्स क्या है?
NCERT पाठ में दिए गए उदाहरण से, 'कुंडली से गुजरने वाला प्रारंभिक फ्लक्स, $\Phi_B$ (प्रारंभिक) = BA cos $\theta$ = $3.0 \times 10^{-5} \times (\pi \times 10^{-2}) \times \cos 0° = 3\pi \times 10^{-7}$ Wb'। चूँकि तल क्षेत्र के लंबवत है, क्षेत्रफल सदिश और B के बीच कोण $\theta$ 0° है।
फैराडे के प्रेरण के नियमों के अनुसार किसी कुंडली में emf कब प्रेरित होता है?
NCERT कहता है, 'फैराडे के प्रेरण के नियमों का तात्पर्य है कि N फेरों वाली कुंडली में प्रेरित emf उससे गुजरने वाले फ्लक्स के परिवर्तन की दर से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है'। साथ ही, 'फैराडे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि जब किसी कुंडली से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स समय के साथ बदलता है तो कुंडली में emf प्रेरित होता है।'
फैराडे के प्रेरण के नियम ($\varepsilon = -dN\Phi_B/dt$) में ऋणात्मक चिह्न क्या दर्शाता है?
NCERT कहता है, 'लेंज का नियम कहता है कि प्रेरित emf की ध्रुवता ऐसी होती है कि यह ऐसी धारा उत्पन्न करने की प्रवृत्ति रखती है जो उसे उत्पन्न करने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करती है। फैराडे के नियम के व्यंजक में ऋणात्मक चिह्न इस तथ्य को इंगित करता है।'
यदि N फेरों वाली कुंडली के एक फेरे से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $\Phi_B$ है, तो फ्लक्स समय के साथ बदलने पर कुंडली में प्रेरित कुल emf क्या है?
सारांश में दिए गए फैराडे के प्रेरण के नियमों के अनुसार, 'N फेरों वाली कुंडली में प्रेरित emf उससे गुजरने वाले फ्लक्स के परिवर्तन की दर से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है, $\varepsilon = -Nd\Phi_B/dt$'। यहाँ $\Phi_B$ कुंडली के एक फेरे से संबद्ध फ्लक्स है।
एक स्थायी चुंबकीय क्षेत्र (जो समय के साथ नहीं बदलता) एक लूप से गुजरता है। प्रेरित emf के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य है?
NCERT उदाहरण 6.2 कहता है, 'ध्यान दें कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र भी लूप से फ्लक्स उत्पन्न करता है। परंतु यह एक स्थायी क्षेत्र है (जो प्रयोग की समयावधि में नहीं बदलता) और इसलिए कोई emf प्रेरित नहीं करता।' emf केवल तभी प्रेरित होता है जब चुंबकीय फ्लक्स समय के साथ बदलता है।
ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ किसी पृष्ठ के विभिन्न भागों पर चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण और दिशाएँ भिन्न हैं। पृष्ठ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स ($\Phi_B$) की गणना कैसे की जाती है?
NCERT स्पष्ट करता है, 'यदि चित्र 6.5 में दिखाए अनुसार किसी पृष्ठ के विभिन्न भागों पर चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण और दिशाएँ भिन्न हैं, तो पृष्ठ से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स $\Phi_B = B_1 \cdot dA_1 + B_2 \cdot dA_2 + ... = \sum B_i \cdot dA_i$ द्वारा दिया जाता है, जहाँ ‘all’ पृष्ठ को बनाने वाले सभी क्षेत्रफल अवयवों $dA_i$ पर योग को दर्शाता है और $B_i$ क्षेत्रफल अवयव $dA_i$ पर चुंबकीय क्षेत्र है।'
विद्युतचुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, बंद कुंडलियों में विद्युत धारा उत्पन्न होने की प्राथमिक शर्त क्या है?
परिचय कहता है, '...बंद कुंडलियों को परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्रों के अधीन करने पर उनमें विद्युत धाराएँ प्रेरित हुईं। ... वह घटना जिसमें परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा विद्युत धारा उत्पन्न होती है, उचित ही विद्युतचुंबकीय प्रेरण कहलाती है।'
एक लूप पूर्णतः एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के क्षेत्र के भीतर, या पूर्णतः उसके बाहर गति कर रहा है। क्या इन समयों में लूप में प्रेरित धारा प्रवाहित होती है?
उदाहरण 6.4 का हल कहता है, 'ध्यान दें कि जब तक लूप चुंबकीय क्षेत्र के क्षेत्र के पूर्णतः भीतर या बाहर हैं, कोई प्रेरित धारा नहीं होती।' ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रेरित धारा के लिए चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होना चाहिए, जो लूप के एकसमान, नियत क्षेत्र के पूर्णतः भीतर या बाहर होने पर नहीं होता।
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