NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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काल्पनिक साइक्लोहेक्साट्राइईन की तुलना में बेंज़ीन में विस्थानीकृत $\pi$ इलेक्ट्रॉन मेघ उसके स्थायित्व में कैसे योगदान देता है?

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NCERT पाठ कहता है: 'विस्थानीकृत $\pi$ इलेक्ट्रॉन मेघ दो कार्बन परमाणुओं के बीच स्थानीकृत इलेक्ट्रॉन मेघ की तुलना में कार्बन परमाणुओं के नाभिकों द्वारा अधिक प्रबलता से आकर्षित होता है। अतः बेंज़ीन में विस्थानीकृत $\pi$ इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति इसे काल्पनिक साइक्लोहेक्साट्राइईन से अधिक स्थायी बनाती है।' यह विकल्प o3 की पुष्टि करता है।

हकल के नियम के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता ऐरोमैटिकता की कसौटी नहीं है?

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NCERT पाठ ऐरोमैटिकता की विशेषताएँ बताता है: '(i) समतलीयता (ii) वलय में $\pi$ इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण विस्थानीकरण (iii) वलय में (4n + 2) $\pi$ इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति, जहाँ n एक पूर्णांक है (n = 0, 1, 2, . . .)। इसे प्रायः हकल नियम कहा जाता है।' बेंज़ीन वलय की उपस्थिति प्रायः ऐरोमैटिक यौगिकों से जुड़ी होती है, परंतु यह ऐरोमैटिकता का सार्वभौमिक नियम नहीं है, क्योंकि 'गैर-बेंज़ीनॉइड' भी ऐरोमैटिक हो सकते हैं। अतः विकल्प o4 कोई कठोर कसौटी नहीं है।

द्विप्रतिस्थापित बेंज़ीन यौगिकों के नामकरण में उपसर्ग 'ऑर्थो (o-)', 'मेटा (m-)' और 'पैरा (p-)' क्या दर्शाते हैं?

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NCERT पाठ निर्दिष्ट करता है: 'रूढ़ नामकरण पद्धति में ऑर्थो (o), मेटा (m) और पैरा (p) पदों का उपयोग क्रमशः 1,2; 1,3 और 1,4 सापेक्ष स्थितियों को दर्शाने के लिए उपसर्ग के रूप में किया जाता है।' यह विकल्प o2 से मेल खाता है।

द्विआबंध होने के बावजूद बेंज़ीन सामान्य परिस्थितियों में योगात्मक अभिक्रियाओं के प्रति अनिच्छा क्यों दर्शाती है?

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NCERT पाठ कहता है: 'इस प्रकार बेंज़ीन में शुद्ध द्विआबंध की अनुपस्थिति सामान्य परिस्थितियों में बेंज़ीन की योगात्मक अभिक्रियाएँ दर्शाने की अनिच्छा का कारण है, जो बेंज़ीन के असामान्य व्यवहार की व्याख्या करती है।' यह 'शुद्ध द्विआबंध की अनुपस्थिति' विस्थानीकृत $\pi$ इलेक्ट्रॉन तंत्र के कारण है, जो इसके बढ़े हुए स्थायित्व में योगदान देता है। अतः विकल्प o3 सही व्याख्या है।

मेथिलबेंज़ीन का सामान्य नाम क्या है?

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NCERT पाठ सामान्य नामों की सूची देता है: 'Methylbenzene (Toluene)'। अतः विकल्प o3 सही है।

जब बेंज़ीन वलय द्विप्रतिस्थापित हो, तो प्रतिस्थापियों की स्थिति परिभाषित करने के लिए कार्बन परमाणुओं की संख्यांकन प्राथमिकता कैसे तय की जाती है?

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NCERT पाठ कहता है: 'आधार यौगिक के प्रतिस्थापी को संख्या 1 दी जाती है और फिर संख्यांकन की दिशा इस प्रकार चुनी जाती है कि अगले प्रतिस्थापी को न्यूनतम संख्या मिले।' यह संख्यांकन नियम स्पष्ट करता है, जिससे विकल्प o2 सही है।

त्रिप्रतिस्थापित बेंज़ीन व्युत्पन्न के लिए, क्या नामकरण में उपसर्ग 'ऑर्थो', 'मेटा' और 'पैरा' का उपयोग किया जा सकता है?

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'त्रि- या उच्चतर प्रतिस्थापित बेंज़ीन व्युत्पन्नों के लिए इन उपसर्गों का उपयोग नहीं किया जा सकता और यौगिकों का नामकरण न्यूनतम स्थान-सूचक नियम का अनुसरण करते हुए वलय पर प्रतिस्थापी स्थितियों की पहचान करके किया जाता है।' अतः विकल्प o3 सही है।

यदि बेंज़ीन जनक यौगिक के बजाय प्रतिस्थापी हो, तो उसका नाम क्या है?

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NCERT पाठ कहता है: 'जब बेंज़ीन वलय किसी क्रियात्मक समूह वाले ऐल्केन से जुड़ा हो, तो उसे जनक के बजाय प्रतिस्थापी माना जाता है। प्रतिस्थापी के रूप में बेंज़ीन का नाम फ़ेनिल (C6H5-, संक्षेप में Ph भी) है।' अतः 'फ़ेनिल' सही नाम है।

असंतृप्तता के बावजूद ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन मुख्यतः किस प्रकार की अभिक्रियाएँ देने के लिए जाने जाते हैं?

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NCERT पाठ में उल्लेख है: 'ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन, असंतृप्तता होने के बावजूद, मुख्यतः इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं से गुज़रते हैं। ये केवल विशेष परिस्थितियों में योगात्मक अभिक्रियाओं से गुज़रते हैं।' यह ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बनों के प्रमुख अभिक्रिया प्रकार को रेखांकित करता है, जिससे विकल्प o3 सही है।

वृद्धि को मुख्यतः आकार में अनुत्क्रमणीय स्थायी वृद्धि के रूप में परिभाषित किया जाता है। कोशिकीय स्तर पर यह मुख्यतः किसकी मात्रा में वृद्धि का परिणाम है:

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NCERT पाठ के अनुसार, 'कोशिकीय स्तर पर वृद्धि मुख्यतः जीवद्रव्य की मात्रा में वृद्धि का परिणाम है।' (अध्याय: PLANT_GROWTH_AND_DEVELOPMENT, खंड 13.1.2)।

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