NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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एक विमा में परिवर्ती बल के लिए कार्य-ऊर्जा प्रमेय न्यूटन के द्वितीय नियम से व्युत्पन्न किया जा सकता है। मध्यवर्ती चरण में गतिज ऊर्जा के समय-परिवर्तन की दर को इस रूप में पुनः लिखा जाता है:

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Explanation

परिवर्ती बल के लिए कार्य-ऊर्जा प्रमेय की NCERT व्युत्पत्ति में दर्शाए अनुसार: $\frac{dK}{dt} = \frac{d}{dt} (\frac{1}{2}mv^2) = mv \frac{dv}{dt}$। चूँकि $m \frac{dv}{dt} = F$ (न्यूटन के द्वितीय नियम से), तब $\frac{dK}{dt} = Fv$।

परिवर्ती बल के साथ कार्य करते समय, प्रारंभिक स्थिति $x_i$ से अंतिम स्थिति $x_f$ तक किया गया कुल कार्य इस प्रकार दिया जाता है:

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'इस प्रकार, परिवर्ती बल के लिए किए गए कार्य को विस्थापन पर बल के निश्चित समाकल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है: $W = \int_{x_i}^{x_f} F(x) dx$।'

एक ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जिसमें किसी वस्तु पर कार्यरत बल परिवर्ती है, और उसके मान को विस्थापन के सापेक्ष आलेखित किया गया है। यदि वक्र x-अक्ष के ऊपर एक त्रिभुज बनाता है, तो आप किए गए कार्य की गणना कैसे करेंगे?

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परिवर्ती बल के लिए, किया गया कार्य बल-विस्थापन वक्र के अंतर्गत क्षेत्रफल द्वारा निरूपित होता है। यदि वक्र एक त्रिभुज बनाता है, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ($1/2 \times base \times height$) परिकलित करने पर किया गया कार्य प्राप्त होगा।

कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक राशि परिवर्ती बल द्वारा किए गए कार्य से सीधे संबंधित है?

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कार्य-ऊर्जा प्रमेय कहता है कि किसी वस्तु पर किया गया नेट कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन ($\Delta K = W_{net}$) के बराबर होता है। यह नियत और परिवर्ती दोनों बलों के लिए सत्य है, जैसा कि 'THE WORK-ENERGY THEOREM FOR A VARIABLE FORCE' के अंतर्गत समझाया गया है।

0.5 kg द्रव्यमान का एक पिंड एक सरल रेखा में वेग $v = ax^{3/2}$ से चलता है, जहाँ $a = 5 \text{ m}^{-1/2} \text{ s}^{-1}$। $x = 0$ से $x = 2 \text{ m}$ तक उसके विस्थापन के दौरान नेट बल द्वारा किया गया कार्य कितना है?

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दिया है $m = 0.5 \text{ kg}$, $v = ax^{3/2}$, $a = 5 \text{ m}^{-1/2} \text{ s}^{-1}$। $x=0$ पर प्रारंभिक वेग, $v_i = a(0)^{3/2} = 0$। $x=2 \text{ m}$ पर अंतिम वेग, $v_f = a(2)^{3/2} = 5 \times (2^{3/2}) = 5 \times (2 \sqrt{2}) = 10 \sqrt{2} \text{ m/s}$। नेट बल द्वारा किया गया कार्य (कार्य-ऊर्जा प्रमेय) $W = \Delta K = \frac{1}{2} m v_f^2 - \frac{1}{2} m v_i^2$ है। $W = \frac{1}{2} (0.5 \text{ kg}) (10 \sqrt{2} \text{ m/s})^2 - 0$ $W = \frac{1}{2} (0.5) (100 \times 2) = \frac{1}{2} (0.5) (200) = 0.5 \times 100 = 50 \text{ J}$। नोट: पुनः गणना। समान प्रश्न 5.20 का दिया गया उत्तर 125 J आता है। आइए $v_f$ की गणना पुनः जाँचें: $v_f = 5 \times (2^{3/2}) = 5 \times (2 \cdot \sqrt{2}) = 10\sqrt{2}$। तब $v_f^2 = (10\sqrt{2})^2 = 100 \times 2 = 200$। अतः, $W = \frac{1}{2} \times 0.5 \times 200 = 50 \text{ J}$। मान लें कि पाठ्यपुस्तक के प्रश्न को समझने में कोई भ्रम है। भौतिकी कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुप्रयोग की है। NCERT के सटीक प्रश्न (5.20) को देखते हुए, आइए सुनिश्चित करें कि गणना सही है। $v = 5 x^{3/2}$ $v_i = 0$ $x=0$ पर $v_f = 5 (2)^{3/2} = 5 \times 2 \sqrt{2} = 10 \sqrt{2} \text{ m/s}$ $x=2 \text{ m}$ पर $K_f = \frac{1}{2} m v_f^2 = \frac{1}{2} (0.5) (10\sqrt{2})^2 = \frac{1}{2} (0.5) (100 \times 2) = \frac{1}{2} (0.5) (200) = 50 \text{ J}$ $W = K_f - K_i = 50 - 0 = 50 \text{ J}$। तथापि, यदि हमें NCERT के दिए गए हल (जो पाठ के समान प्रश्नों के हल भाग में 125 J देता है) को व्युत्पन्न करना है, तो कहीं कोई विसंगति होनी चाहिए। आइए संदर्भ पुनः पढ़ें। अरे, रुकिए, यह प्रश्न वास्तव में NCERT के 'अतिरिक्त अभ्यास' (प्रश्न 5.20) का भाग है, जिसका हल इस अंश में स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है। मेरी गणना 50 J देती है। मुझे यह सुनिश्चित करने दें कि प्रश्न को समझने में मुझसे कोई ऐसी गलती तो नहीं हुई जिससे 125 J आए। नहीं, गणना कार्य-ऊर्जा प्रमेय का सही ढंग से पालन करती है। अतः 50 J सही मान है। चूँकि यह MCQ है, मान लें कि विकल्प संभावित मानों पर आधारित हैं, और 50 J की गणना ठोस है। आइए इस स्थिति के लिए पुनः मूल्यांकन करें कि प्रश्न अप्रत्यक्ष रूप से किसी बल $F = ma = m \frac{dv}{dt}$ द्वारा किए गए कार्य के बारे में पूछ रहा हो। $v = ax^{3/2} \implies \frac{dv}{dt} = \frac{d}{dt} (ax^{3/2}) = a \frac{3}{2} x^{1/2} \frac{dx}{dt} = a \frac{3}{2} x^{1/2} v = a \frac{3}{2} x^{1/2} (ax^{3/2}) = \frac{3}{2} a^2 x^2$ $F = m \frac{dv}{dt} = m \frac{3}{2} a^2 x^2$ $W = \int F dx = \int_0^2 m \frac{3}{2} a^2 x^2 dx = m \frac{3}{2} a^2 \left[\frac{x^3}{3}\right]_0^2 = m \frac{3}{2} a^2 \frac{8}{3} = 4 m a^2$ मान प्रतिस्थापित करें: $m = 0.5 \text{ kg}$, $a = 5 \text{ m}^{-1/2} \text{ s}^{-1}$ $W = 4 \times 0.5 \times (5)^2 = 2 \times 25 = 50 \text{ J}$। दोनों विधियाँ 50 J देती हैं। अतः सही विकल्प 50 J दर्शाना चाहिए। यदि 125 J अपेक्षित था, तो 'a' या वेग फलन अप्रत्यक्ष रूप से भिन्न हो सकता है। प्रश्न कथन से अपनी गणना पर टिके रहते हुए, 50 J सही है।

निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया यौवनारंभ पर शुक्रजनन के प्रारंभ को चिह्नित करती है?

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NCERT पाठ के अनुसार, 'वृषण में, अपरिपक्व नर जनन कोशिकाएँ (शुक्राणुजन) शुक्रजनन द्वारा शुक्राणु उत्पन्न करती हैं जो यौवनारंभ पर प्रारंभ होता है। शुक्राणुजन ... समसूत्री विभाजन द्वारा गुणित होकर संख्या में बढ़ते हैं।'

मानव में द्वितीयक शुक्राणुकोशिका का गुणिता स्तर और गुणसूत्र संख्या क्या है?

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NCERT कहता है, 'एक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका प्रथम अर्धसूत्री विभाजन (न्यूनकारी विभाजन) पूरा करती है जिससे दो समान, अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं जिन्हें द्वितीयक शुक्राणुकोशिकाएँ कहते हैं, जिनमें प्रत्येक में केवल 23 गुणसूत्र होते हैं।' अर्धसूत्री विभाजन I एक न्यूनकारी विभाजन है, जो गुणसूत्र संख्या घटाते हुए कोशिकाओं को अगुणित बनाता है।

वह प्रक्रिया जिसके द्वारा शुक्राणुप्रसू (स्पर्मेटिड) शुक्राणुओं में रूपांतरित होते हैं, कहलाती है:

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NCERT पाठ के अनुसार, 'शुक्राणुप्रसू शुक्राणुजनन (स्पर्मियोजेनेसिस) नामक प्रक्रिया द्वारा शुक्राणुओं (स्पर्म) में रूपांतरित होते हैं।'

शुक्राणुजनन (स्पर्मियोजेनेसिस) के बाद, अंतिम मोचन से पहले शुक्राणु शीर्ष कहाँ धँसे रहते हैं?

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NCERT कहता है, 'स्पर्मियोजेनेसिस के बाद, शुक्राणु शीर्ष सर्टोली कोशिकाओं में धँस जाते हैं, और अंततः शुक्राणुमोचन (स्पर्मिएशन) नामक प्रक्रिया द्वारा शुक्रजनक नलिकाओं से मुक्त होते हैं।' सर्टोली कोशिकाएँ विकासशील शुक्राणुओं को पोषण और सहारा देती हैं।

अंडजनन के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

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NCERT उल्लेख करता है, 'अंडजनन भ्रूणीय विकास की अवस्था के दौरान प्रारंभ होता है... जन्म के बाद और अंडजन नहीं बनते और न ही जुड़ते हैं।' यह भी कहता है, 'ये कोशिकाएँ विभाजन प्रारंभ करती हैं और अर्धसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था-I में प्रवेश करके उस अवस्था में अस्थायी रूप से रुक जाती हैं, जिन्हें प्राथमिक अंडकोशिकाएँ कहते हैं।' अंत में, 'इनमें से बड़ी संख्या में पुटक जन्म से यौवनारंभ तक की अवस्था के दौरान अपह्रासित हो जाते हैं।'

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