निम्नलिखित में से कौन-सा कथन हैलोऐल्केनों की तुलना में हैलोऐरीनों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति कम क्रियाशीलता के कारण का सही वर्णन करता है?
NCERT पाठ के अनुसार, 'C— Cl आबंध अनुनाद के कारण आंशिक द्विआबंध लक्षण प्राप्त कर लेता है। परिणामस्वरूप, हैलोऐरीन में आबंध विदलन हैलोऐल्केन की तुलना में कठिन होता है और इसलिए वे नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति कम क्रियाशील होते हैं।' साथ ही, 'अधिक s-लक्षण वाला sp2 संकरित कार्बन अधिक विद्युत ऋणात्मक होता है और C— X आबंध के इलेक्ट्रॉन युग्म को हैलोऐल्केन के कम s-लक्षण वाले sp3-संकरित कार्बन की तुलना में अधिक कसकर पकड़ सकता है। इस प्रकार, हैलोऐल्केन में C— Cl आबंध लंबाई 177pm है जबकि हैलोऐरीन में 169 pm है। चूँकि लंबे आबंध की तुलना में छोटे आबंध को तोड़ना कठिन है, इसलिए हैलोऐरीन नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति हैलोऐल्केनों से कम क्रियाशील होते हैं।'