Sexual Reproduction in Flowering Plants NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

Sexual Reproduction in Flowering Plants (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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वह कार्बनिक पदार्थ जो पर्यावरणीय चरम दशाओं को सह सकता है तथा किसी भी एंजाइम द्वारा अपघटित नहीं हो सकता, वह है

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Explanation

स्पोरोपोलेनिन परागकणों के बाह्यचोल में उपस्थित एक वसीय पदार्थ है। यह सूक्ष्मजैविक तथा रासायनिक अपघटन के प्रति प्रतिरोधी है और चरम पर्यावरणीय दशाओं को सह सकता है। स्पोरोपोलेनिन की उपस्थिति के कारण जीवाश्मीकरण के दौरान परागकण भली-भाँति परिरक्षित रहते हैं।

परागण कारकों की अनुपस्थिति में भी बीज-निर्माण किसमें सुनिश्चित रहता है

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Commellina benghalensis या कनकौआ में वायवीय, उन्मील (वर्तिकाग्र तथा परागकोश परागण कारकों के संपर्क में) कीट-परागित पुष्प तथा भूमिगत अनुन्मील पुष्प लगते हैं। अनुन्मील पुष्प द्विलिंगी पुष्प हैं जो कभी नहीं खुलते, अर्थात्, सदैव बंद रहते हैं। ऐसे पुष्पों में परागकोश तथा वर्तिकाग्र एक-दूसरे के अत्यंत निकट होते हैं। जब कलिकाओं में परागकोश स्फुटित होते हैं, तो परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र के संपर्क में आ जाते हैं, अर्थात्, स्वपरागण होता है। अतः ये पुष्प परागणकों की अनुपस्थिति में भी सुनिश्चित बीज-निर्माण करते हैं।

 

नारियल जल तथा नारियल का खाद्य भाग किसके तुल्य हैं

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कच्चे नारियल से प्राप्त नारियल जल मुक्त-केंद्रकी भ्रूणपोष (हजारों केंद्रकों से बना) के अतिरिक्त कुछ नहीं है तथा उसके चारों ओर की सफेद गिरी कोशिकीय भ्रूणपोष है।

तंतुरूपी उपकरण किसका अभिलक्षणिक लक्षण है

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तंतुरूपी उपकरण बीजांड के बीजांडद्वारी सिरे पर स्थित सहायक कोशिकाओं की कोशिका झिल्ली के अंगुली जैसे प्रवर्ध हैं। तंतुरूपी उपकरण बहुशर्कराओं से समृद्ध होता है तथा परागनलिका को रासायनिक रूप से बीजांडद्वार की ओर आकर्षित करता है।

जिस पादप की मूल शीर्ष कोशिकाओं में 42 गुणसूत्र हैं, उसकी एल्यूरोन कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या क्या होगी?

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बीज के भ्रूणपोष (3n) की सबसे बाहरी कोशिका परत एल्यूरोन परत कहलाती है। चूँकि एल्यूरोन परत की कोशिकाएँ त्रिगुणित होती हैं, अतः गुणसूत्रों की संख्या = 63 होगी, क्योंकि मूल शीर्ष कोशिकाओं (2n) में 42 गुणसूत्र हैं।

वायु परागण किसमें सामान्य है

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अजैविक परागणों में वायु द्वारा परागण (वायु परागण) अधिक सामान्य है। वायु परागण घासों में काफी सामान्य है।

बीजांडकायी बहुभ्रूणता किस वंश की जातियों में सूचित की गई है

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किसी बीज में एक से अधिक भ्रूण का होना बहुभ्रूणता कहलाता है। अनेक Citrus तथा आम की किस्मों में भ्रूणकोश को घेरने वाली कुछ बीजांडकाय कोशिकाएँ विभाजित होने लगती हैं, भ्रूणकोश में प्रवेश कर जाती हैं तथा भ्रूणों में विकसित हो जाती हैं; ऐसी जातियों में प्रत्येक बीजांड में अनेक भ्रूण होते हैं (बीजांडकायी बहुभ्रूणता)।

निम्नलिखित में से किसमें परागण स्वपरागण होता है?

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वे द्विलिंगी पुष्प जो सदैव बंद रहते हैं, अनुन्मील पुष्प कहलाते हैं तथा पुष्पों की ऐसी दशा अनुन्मील परागण कहलाती है। ऐसे पुष्पों में परागकोश तथा वर्तिकाग्र एक-दूसरे के निकट होते हैं। जब कलिकाओं में परागकोश स्फुटित होते हैं, तो परागकण वर्तिकाग्र के संपर्क में आकर परागण कर देते हैं। अतः अनुन्मील पुष्प सदैव स्वपरागित होते हैं।

परागकोश से उसी पादप के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण कहलाता है

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सजातपुष्पी परागण (ग्रीक geiton = पड़ोसी तथा gameiu = विवाह करना) में परागकणों का स्थानांतरण एक नर पुष्प से उसी पादप पर उत्पन्न दूसरे मादा पुष्प के वर्तिकाग्र तक होता है। अतः सजातपुष्पी परागण केवल उभयलिंगाश्रयी पादपों में होता है, अर्थात् वे पादप जिनमें नर तथा मादा पुष्प भिन्न स्थानों पर किंतु एक ही पादप पर लगते हैं, जैसे, मक्का (Zea mays)। जंतु-परागित तंत्र में यह उसी पादप के अनेक पुष्पों पर जाने वाले परागणक द्वारा संपन्न होता है। यह वायु-परागित जातियों में भी संभव है।

वायु-परागित पुष्प होते हैं

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वायु के माध्यम से होने वाला परागण वायु परागण कहलाता है, जैसे, Zea mays, Cannabis, Pinus, आदि। वायु-परागित पुष्पों के कुछ लक्षण हैं -

(i) बाह्यदलपुंज, दलपुंज तथा सहपत्र, सहपत्रक जैसे अनावश्यक चक्र दिखावटी नहीं होते।

(ii) परिदल खंड अविकसित या ह्रासित होते हैं और कभी-कभी अनुपस्थित।

(iii) पुष्पों में गंध तथा मकरंद नहीं होते।

(iv) पादप बहुत बड़ी मात्रा में धूल जैसे परागकण उत्पन्न करते हैं।

(v) परागकण शुष्क, अत्यंत छोटे, चिपचिपे-रहित तथा अभिगीले होते हैं

ये लक्षण परागकणों की पृथक्ता के लिए सहायक होते हैं।

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Frequently Asked Questions

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