निम्नलिखित में से कौन-सा पादप उभयलिंगाश्रयी है?
Pinus उभयलिंगाश्रयी है, जिसमें नर शंकु तथा मादा शंकु दोनों एक ही वृक्ष पर अलग-अलग शाखाओं पर लगते हैं। Marchantia Cycs तथा पपीता एकलिंगाश्रयी पादप हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा पादप उभयलिंगाश्रयी है?
Pinus उभयलिंगाश्रयी है, जिसमें नर शंकु तथा मादा शंकु दोनों एक ही वृक्ष पर अलग-अलग शाखाओं पर लगते हैं। Marchantia Cycs तथा पपीता एकलिंगाश्रयी पादप हैं।
पादप संरचनाओं के निम्नलिखित में से किस युग्म में गुणसूत्रों की अगुणित संख्या होती है?
आवृतबीजियों में बीजांड के भीतर एक द्विगुणित गुरुबीजाणु मातृ कोशिका परिपक्व होती है। अर्धसूत्रण द्वारा यह चार गुरुबीजाणु (अगुणित) बनाती है। अधिकांश पादपों में इनमें से केवल एक ही गुरुबीजाणु जीवित रहता है। यह क्रियाशील गुरुबीजाणु समसूत्रण द्वारा तीन बार विभाजित होकर आठ अगुणित केंद्रक बनाता है जो 7-कोशिकीय भ्रूणकोश में बंद रहते हैं। एक केंद्रक भ्रूणकोश के छिद्र के पास अंड कोशिका में स्थित होता है। दो केंद्रक भ्रूणकोश के मध्य में एक ही कोशिका में स्थित होते हैं और ध्रुवीय केंद्रक कहलाते हैं, दो केंद्रक अंड कोशिका के दोनों ओर स्थित सहायक कोशिकाओं में होते हैं तथा शेष तीन केंद्रक अंड कोशिका के विपरीत भ्रूणकोश के सिरे पर स्थित प्रतिमुखी कोशिकाओं में रहते हैं।
बीजांडकाय बीजांड में अध्यावरणों से ढकी पतली भित्ति वाली मृदूतकीय कोशिकाओं का केंद्रीय रूप से स्थित पुंज है।
विकसित हो रहे भ्रूण द्वारा भ्रूणपोष किसके बीज में खप जाता है
भ्रूणपोष, यदि उपस्थित हो, तो बीज के भोजन संचय ऊतक का कार्य करता है। भ्रूणपोष वाले बीज भ्रूणपोषी या एल्ब्युमिनी कहलाते हैं (जैसे, Cocos nucifera, Ricinus communis, Zea mays तथा अन्य अनाज), जबकि भ्रूणपोष रहित बीज अभ्रूणपोषी या अनएल्ब्युमिनी बीज कहलाते हैं (जैसे, Brassica campestris, Arachis hypogea, Pisum sativum)।
अरंडी (Ricinus communis) में भ्रूणपोष श्वेत मृदु पुंज होता है जो तैलीय संचित भोजन से समृद्ध होता है।
मक्का में भ्रूणपोष पीले रंग का होता है, भ्रूणपोष की सबसे बाहरी परत एल्यूरोन परत कहलाती है, जो प्रोटीन से समृद्ध होती है।
पुष्पों की एकलिंगता किसे रोकती है
परागकोश से वर्तिकाग्र तक पराग का स्थानांतरण परागण कहलाता है। स्वपरागण में एक पुष्प के परागकणों का स्थानांतरण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र तक होता है। स्वपरागण केवल द्विलिंगी पुष्पों में होता है।
सजातपुष्पी परागण में परागकणों का स्थानांतरण एक नर पुष्प से उसी पादप के मादा पुष्प के वर्तिकाग्र तक होता है। अतः सजातपुष्पी परागण केवल उभयलिंगाश्रयी पादपों में होता है, अर्थात्, वे पादप जिनमें नर तथा मादा पुष्प भिन्न स्थानों पर लगते हैं।
परपुष्पी परागण में एक नर पुष्प के परागकणों का स्थानांतरण आनुवंशिक रूप से भिन्न मादा पुष्प के वर्तिकाग्र तक होता है। यह वायु, जल, कीट आदि विभिन्न कारकों के माध्यम से होता है।
जिस पादप जाति की सहायक कोशिकाओं में 8 गुणसूत्र हैं, उसकी एल्यूरोन परत की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या क्या होगी ?
सहायक कोशिकाएँ पुष्पी पादप के बीजांड के परिपक्व भ्रूणकोश में अंड के निकट स्थित दो अल्पजीवी अगुणित कोशिकाएँ हैं। जबकि भ्रूणपोष त्रिसंलयन के बाद बना त्रिगुणित ऊतक है। अतः यदि सहायक कोशिकाओं में 8 गुणसूत्र हैं, तो एल्यूरोन परत (भ्रूणपोष का भाग) में सहायक कोशिकाओं के गुणसूत्रों का तिगुना, अर्थात् 24 गुणसूत्र होंगे।
अनिषेकफली टमाटर के फल किसके द्वारा उत्पन्न किए जा सकते हैं :
अनिषेकफलन पूर्व निषेचन के बिना फलों का परिवर्धन है जिससे बीजरहित फल बनते हैं। कुछ पादप जातियों में अनिषेकफली (बीजरहित) फल प्राकृतिक रूप से बन सकते हैं अथवा अपरागित पुष्पों को ऑक्सिन से उपचारित करके प्रेरित किए जा सकते हैं। जैसे, अनिषेकफली टमाटर के फल पादपों को जिबरेलिक अम्ल (फल-निर्माण को बढ़ावा) तथा ऑक्सिन (परिवर्धन प्रक्रिया पूर्ण करता है) की कम सांद्रता से उपचारित करके उत्पन्न किए जा सकते हैं।
पराग मुक्त होने से पूर्व पुमंग हटाना विपुंसन कहलाता है जो अवांछित निम्न परागण रोकने में सहायक है।
वसंतीकृत बीज प्रसुप्ति तोड़ने के लिए शीत-उपचारित बीज होते हैं।
फेनिल मर्क्यूरिक ऐसीटेट एक वाष्पोत्सर्जनरोधी है।
द्विबीजपत्री पादप के सामान्य भ्रूणकोश में केंद्रकों की व्यवस्था है :
आवृतबीजियों (द्विबीजपत्रियों) में Polygonum प्रकार का भ्रूणकोश सर्वाधिक सामान्य है। इस भ्रूणकोश में केंद्रकों की व्यवस्था 3+2+3 होती है, अर्थात्, 3 प्रतिमुखी कोशिकाओं में, 2 ध्रुवीय केंद्रकों के रूप में (जो बाद में संलयित होकर द्विगुणित द्वितीयक केंद्रक बनाते हैं); तथा 3 अंड उपकरण में (2 सहायक कोशिकाओं में एवं 1 अंड कोशिका में)।
आवृतबीजियों में लघुबीजाणुजनन तथा गुरुबीजाणुजनन
लघुबीजाणुजनन तथा गुरुबीजाणुजनन दोनों घटनाओं में अर्धसूत्रण की प्रक्रिया सम्मिलित होती है जिससे लघुबीजाणु या गुरुबीजाणु मातृ कोशिकाओं से अगुणित युग्मक बनते हैं।
पुष्प किसमें एकलिंगी होते हैं
खीरा कुकुरबिटेसी कुल का सदस्य है। इस कुल के सदस्यों में पुष्प एकलिंगी होते हैं तथा नर एवं मादा पुष्प भिन्न पादपों पर (एकलिंगाश्रयी) या एक ही पादप पर (उभयलिंगाश्रयी) लगते हैं।
कच्चे नारियल का नारियल जल है
कच्चे नारियल का नारियल जल, जिससे हम परिचित हैं, मुक्त-केंद्रकी भ्रूणपोष (हजारों केंद्रकों से बना) के अतिरिक्त कुछ नहीं है तथा उसके चारों ओर की सफेद गिरी कोशिकीय भ्रूणपोष है। भ्रूणपोष परिवर्धन के सर्वाधिक सामान्य प्रकार में प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) क्रमिक केंद्रक विभाजनों द्वारा मुक्त केंद्रक बनाता है। भ्रूणपोष परिवर्धन की इस अवस्था को मुक्त-केंद्रकी भ्रूणपोष कहते हैं।
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