Sexual Reproduction in Flowering Plants NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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निम्नलिखित में से कौन जायांग का लक्षण नहीं है?

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 एक ही गुरुबीजाणु से भ्रूणकोश बनने की विधि एकबीजाणुज परिवर्धन कहलाती है तथा यह प्रारूपी रूप से भ्रूणकोश का लक्षण है, जायांग का नहीं।

निम्नतापी परिरक्षण परागकणों जैसे पदार्थों को द्रव नाइट्रोजन में किस ताप पर परिरक्षित करने की तकनीक है

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निम्नतापी परिरक्षण में बड़ी संख्या में जातियों के परागकणों को वर्षों तक द्रव नाइट्रोजन में –196°C अर्थात् 77.15 केल्विन पर संचित किया जाता है। इस प्रकार संचित पराग को बीज बैंकों की भाँति पराग बैंकों के रूप में फसल प्रजनन कार्यक्रमों में प्रयुक्त किया जा सकता है।

गुरुबीजाणुधानी किसके तुल्य है:

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 गुरुबीजाणुधानी को सामान्यतः बीजांड कहते हैं, जो अंडाशय के भीतर बीजांडासन से उत्पन्न होता है।

लघुबीजाणुधानी सामान्यतः 4 भित्ति परतों से घिरी रहती है। निम्नलिखित में से कौन-सी 3 भित्ति परतें सुरक्षा का कार्य करती हैं तथा पराग मुक्त करने हेतु परागकोश के स्फुटन में सहायता करती हैं?

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लघुबीजाणुधानी सामान्यतः चार भित्ति परतों से घिरी रहती है– अधिचर्म, अंतःपोषिका, मध्य परतें तथा टेपीटम। बाहरी तीन भित्ति परतें सुरक्षा का कार्य करती हैं तथा पराग मुक्त करने हेतु परागकोश के स्फुटन में सहायता करती हैं। सबसे भीतरी भित्ति परत टेपीटम है। यह विकसित हो रहे परागकणों का पोषण करती है।

(पृष्ठ-21)

स्पोरोपोलेनिन के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा बिंदु गलत है?

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कथन C का संशोधन: अब तक ऐसा कोई एंजाइम ज्ञात नहीं है जो स्पोरोपोलेनिन का अपघटन कर सके।

(पृष्ठ-23)

परागकणों की जीवन-क्षमता किस पर निर्भर करती है:

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वह अवधि जिस तक परागकण जीवनक्षम बने रहते हैं, अत्यधिक परिवर्तनशील है तथा कुछ हद तक प्रचलित ताप, आर्द्रता एवं जाति की आनुवंशिक क्षमता पर निर्भर करती है।

(पृष्ठ-24)

निम्नलिखित में से किसकी पराग जीवन-क्षमता सबसे कम है?

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धान तथा गेहूँ जैसे कुछ अनाजों में परागकण मुक्त होने के 30 मिनट के भीतर जीवन-क्षमता खो देते हैं, तथा Rosaceae, Leguminoseae एवं Solanaceae के कुछ सदस्यों में वे महीनों तक जीवन-क्षमता बनाए रखते हैं।

(पृष्ठ-24)

स्तंभ-I का स्तंभ-II से मिलान कीजिए:
    स्तंभ-I  स्तंभ-II
A. बीजांडवृंत  I. बीजांड के भीतर अधिक भोजन वाली कोशिकाओं का पुंज
B. नाभिका  II. बीजांड का आधारी भाग
C. अध्यावरण  III. बीजांड की एक या 2 रक्षी परतें
D. निभाग  IV. वह क्षेत्र जहाँ बीजांड का शरीर बीजांडवृंत से जुड़ता है
E. बीजांडकाय  V. बीजांड का वृंत

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बीजांडवृंत: बीजांड एक छोटी संरचना है जो बीजांडवृंत नामक वृंत द्वारा बीजांडासन से जुड़ी रहती है।

नाभिका: बीजांड का शरीर बीजांडवृंत से जिस क्षेत्र में जुड़ता है उसे नाभिका कहते हैं।

अध्यावरण: प्रत्येक बीजांड में एक या दो रक्षी आवरण होते हैं जिन्हें अध्यावरण कहते हैं।

निभाग: बीजांडद्वारी सिरे के विपरीत निभाग होता है, जो बीजांड के आधारी भाग को निरूपित करता है।

बीजांडकाय: अध्यावरणों के भीतर कोशिकाओं का एक पुंज बंद रहता है जिसे बीजांडकाय कहते हैं।

(पृष्ठ-25)

भ्रूणकोश / मादा युग्मकोद्भिद के परिवर्धन का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुक्रम सही है?

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1. अध्यावरणों के भीतर कोशिकाओं का एक पुंज बंद रहता है जिसे बीजांडकाय कहते हैं। बीजांडकाय की कोशिकाओं में प्रचुर संचित भोजन पदार्थ होते हैं।
2. बीजांडकाय कोशिकाओं के बनने के बाद गुरुबीजाणु मातृ कोशिकाएँ बनती हैं।
3. गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से गुरुबीजाणुओं के बनने की प्रक्रिया गुरुबीजाणुजनन कहलाती है।
4. गुरुबीजाणुओं में से एक क्रियाशील रहता है जबकि शेष तीन अपह्रासित हो जाते हैं। केवल क्रियाशील गुरुबीजाणु ही मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोश) में विकसित होता है। एक ही गुरुबीजाणु से भ्रूणकोश बनने की यह विधि एकबीजाणुज परिवर्धन कहलाती है।
(पृष्ठ-25, 26)

सजातपुष्पी परागण है:

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परागकोश से उसी पादप के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण। यद्यपि सजातपुष्पी परागण क्रियात्मक रूप से पर-परागण है जिसमें परागण कारक सम्मिलित होता है, आनुवंशिक रूप से यह स्वपरागण के समान है क्योंकि परागकण उसी पादप से आते हैं।

(पृष्ठ-28)

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Frequently Asked Questions

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