Sexual Reproduction in Flowering Plants NEET प्रश्न हिंदी में — वनस्पति विज्ञान (Botany) MCQ उत्तर सहित

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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

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Explanation

उपर्युक्त बिंदु स्वपरागण की व्याख्या करते हैं।

एलोगैमी: यह एक पुष्प के परागकोश से दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर परागकणों का निक्षेपण है, चाहे वह उसी पादप में हो या उसी जाति के भिन्न पादप में।

परपुष्पी परागण: परागकोश से किसी भिन्न पादप के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण। यही एकमात्र प्रकार का परागण है जो परागण के दौरान आनुवंशिक रूप से भिन्न प्रकार के परागकण वर्तिकाग्र तक लाता है।

पर-परागण: एक पादप के परागकोश से दूसरे पादप के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण।

(पृष्ठ- 27, 28)

सही विकल्प चुनिए:

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Explanation

मधुमक्खियाँ प्रमुख जैविक परागण कारक हैं क्योंकि पुष्प मकरंद स्रावित करते हैं, जिसे वे पुष्पीय पुरस्कार के रूप में मधु बनाने हेतु एकत्र करती हैं।

कुछ पुष्प जंतुओं की विशिष्ट जातियों के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होते हैं, जैसे डेजी तथा ऐस्टर मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं।

मकरंद, परागकण तथा अंडे देने हेतु आश्रय (पतंगा अपने अंडे अंडाशय के कोष्ठ में देता है तथा बदले में पुष्प का परागण उसी पतंगे द्वारा हो जाता है) सामान्य पुष्पीय पुरस्कार हैं।

(पृष्ठ- 30)

बहिःप्रजनन का आनुवंशिक महत्व क्या है?

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बहिःप्रजनन से तात्पर्य किसी जाति की एक ही नस्ल के उन व्यष्टियों के बीच संकरण से है जिनका 4-6 पीढ़ियों तक कोई सामान्य पूर्वज न हो। इससे जीन कोष व्यापक होकर आनुवंशिक विविधता बढ़ती है।

इससे अवांछित (अप्रभावी) लक्षणों के आगे जाने की संभावना भी सीमित होती है। अतः बहिःप्रजनन से उत्पन्न संतति अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं ओज दर्शाती है।

द्विलिंगी पुष्प में कृत्रिम संकरण प्रयोग के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा अनुक्रम सही है?

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यदि मादा जनक में द्विलिंगी पुष्प हों, तो परागकोश के स्फुटन से पूर्व पुष्प कलिका से परागकोश हटाने का कार्य चिमटी की सहायता से किया जाता है — विपुंसन।

विपुंसित पुष्पों को उपयुक्त आकार की थैली, जो सामान्यतः बटर पेपर की बनी होती है, से ढकना पड़ता है ताकि उनके वर्तिकाग्र का अवांछित पराग से संदूषण न हो। इस प्रक्रिया को थैलीकरण कहते हैं।

जब थैली लगे पुष्प का वर्तिकाग्र ग्रहणशील हो जाता है, तो नर जनक के परागकोशों से एकत्र परिपक्व परागकण (पर-परागण) वर्तिकाग्र पर छिड़के जाते हैं तथा पुष्पों पर पुनः थैली लगा दी जाती है।

(पृष्ठ-33)

एल्यूरोन परत किसमें भाग लेती है:

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यह गेहूँ तथा अन्य अनाजों के भ्रूणपोष की सबसे बाहरी परत है। यह कोशिकाओं की एक ही परत है जो अंकुरण के दौरान भ्रूणपोष में ऐल्फा-ऐमिलेज एंजाइम का संश्लेषण करती है, जो मंड को माल्टोस तथा ग्लूकोस में विघटित करता है।

बीज अंकुरण के लिए कौन-सी बाह्य दशाएँ आवश्यक हैं:

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पर्याप्त नमी, ऑक्सीजन तथा उपयुक्त ताप जैसी अनुकूल दशाएँ मिलने पर बीज अंकुरित होता है। किंतु अनुकूल दशाएँ न मिलने पर यह निष्क्रियता की अवस्था में जा सकता है जिसे प्रसुप्ति कहते हैं।

(पृष्ठ-36)

निम्नलिखित में से कौन सही नहीं है?

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ऑक्सीजन, नमी तथा उपयुक्त ताप जैसी अनुकूल दशाएँ न मिलने पर जब भ्रूण प्रसुप्ति की अवस्था में जाता है, तो उसकी सामान्य उपापचयी सक्रियता धीमी पड़ जाती है।

(पृष्ठ-36)

यदि फल अनिषेकफलन द्वारा उत्पन्न किए जाएँ तो निम्नलिखित में से कौन अपना आर्थिक मूल्य खो देगा:

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अनार अनिषेकफलन द्वारा उत्पन्न किए जाने पर अपना आर्थिक मूल्य खो देगा क्योंकि अनिषेकफलन फल को बीजरहित तथा इस प्रकार निरर्थक बना देता है।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

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ऑर्किड के फलों में हजारों सूक्ष्म बीज होते हैं। यही स्थिति Orobanche तथा Striga जैसी कुछ परजीवी जातियों के फलों में है।

(पृष्ठ-38)

संकर बीज प्रतिवर्ष उत्पन्न करने पड़ते हैं क्योंकि:

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संकर बीज प्रतिवर्ष उत्पन्न करने पड़ते हैं क्योंकि यदि संकर पादप से एकत्र बीज बोए जाएँ, तो संतति के पादपों में पृथक्करण हो जाएगा (मेंडल का पृथक्करण नियम) और इस प्रकार वे संकर लक्षण बनाए नहीं रखेंगे।

किंतु यदि इन संकरों को असंगजनक बना दिया जाए, तो संकर संतति में लक्षणों का पृथक्करण नहीं होता। तब किसान प्रतिवर्ष नई फसल उगाने हेतु उन्हीं संकर बीजों का उपयोग करते रह सकते हैं और प्रतिवर्ष संकर बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं रहती।

(पृष्ठ-39)

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Frequently Asked Questions

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