वनस्पति विज्ञान (Botany) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

वनस्पति विज्ञान (Botany) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

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सहचर कोशिकाएँ किससे निकटता से संबद्ध होती हैं

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Explanation

सहचर कोशिकाएँ फ्लोएम ऊतक के विशिष्ट अवयव हैं जो आवृतबीजियों में चालनी नलिकाओं (चालनी अवयवों) से संबद्ध रहती हैं। चालनी नलिकाएँ तथा सहचर कोशिकाएँ परिवर्धनात्मक रूप से संबंधित हैं क्योंकि ये एक ही मातृ कोशिका से विकसित होती हैं। सहचर कोशिकाएँ तथा चालनी नलिकाएँ जीवद्रव्यतंतुओं द्वारा घनिष्ठ कोशिकाद्रव्यी संबंध बनाए रखती हैं।

बंद संवहन पूलों में नहीं होता

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द्विबीजपत्री तनों में फ्लोएम तथा जाइलम के बीच एधा उपस्थित होती है। एधा की उपस्थिति के कारण ऐसे संवहन पूलों में द्वितीयक जाइलम तथा फ्लोएम ऊतक बनाने की क्षमता होती है और इसीलिए इन्हें खुले संवहन पूल कहते हैं। इसके विपरीत, एकबीजपत्रियों के संवहन पूलों में एधा नहीं होती। अतः ये द्वितीयक ऊतक नहीं बनाते तथा बंद कहलाते हैं।

संवहन पूलों में जलयुक्त गुहिकाएँ किसमें पाई जाती हैं

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एकबीजपत्री तने जैसे Zea mays में संवहन पूलों की सबसे निचली आदिदारु वाहिकाएँ तथा जाइलम मृदूतक कोशिकाएँ घुलकर एक जलयुक्त भंजनलयनजात गुहिका बनाती हैं जिसे आदिदारु गुहिका अथवा लैकुना अथवा लयनजात गुहिका कहते हैं। मक्का के छोटे संवहन पूलों में आदिदारु गुहिका तथा आदिफ्लोएम अनुपस्थित हो सकते हैं।

भरण ऊतक में सम्मिलित है

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अधिचर्म तथा संवहन पूलों को छोड़कर सभी ऊतक भरण ऊतक अथवा आधारभूत ऊतक बनाते हैं। इसमें मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक तथा दृढ़ोतक जैसे सरल ऊतक होते हैं। इसमें वल्कुट, परिरंभ, मज्जा रश्मियाँ सम्मिलित हैं। पत्तियों में भरण ऊतक पर्णमध्योतक से बना होता है।

स्थलीय पादपों में द्वार कोशिकाएँ अन्य अधिचर्मी कोशिकाओं से किसकी उपस्थिति में भिन्न होती हैं:-

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स्थलीय पादपों में रंध्रों की द्वार कोशिकाएँ विशिष्ट अधिचर्मी कोशिकाएँ हैं जिनमें हरितलवक होते हैं। शेष अधिचर्मी कोशिकाओं में हरितलवक अनुपस्थित होते हैं। परंतु द्वार कोशिकाओं के हरितलवक NADP रिडक्टेस एंजाइम के अभाव के कारण अल्प प्रकाश संश्लेषण ही कर पाते हैं।

निम्नलिखित में से कौन पार्श्व विभज्योतक नहीं है?

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अंतर्वेशी विभज्योतक शीर्षस्थ विभज्योतक के वे भाग हैं जो अक्ष की वृद्धि तथा स्थायी ऊतकों के निर्माण के दौरान शीर्ष से पृथक हो जाते हैं। यह अधिकतर पर्वसंधि के आधार पर (जैसे Mentha viridis), पर्व के आधार पर (जैसे अनेक एकबीजपत्रियों का तना यथा गेहूँ, धान, घास; Equisetum जैसे टेरिडोफाइट) अथवा पत्ती के आधार पर (जैसे Pinus) उपस्थित होता है।

जौ के तने में संवहन पूल होते हैं

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Hordeum vulgare (जौ) पादप में संवहन पूल भरण ऊतकों में बिखरे रहते हैं, संख्या में अनेक होते हैं तथा आकार में भिन्न होते हैं-परिधि की ओर छोटे और भरण ऊतक के केंद्र की ओर बड़े, रूपरेखा में अंडाकार अथवा गोल, संयुक्त, समपार्श्वी तथा बंद।

द्वार कोशिकाएँ किसमें सहायता करती हैं ?

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द्वार कोशिकाएँ वाष्पोत्सर्जन में सहायता करती हैं। प्रत्येक रंध्री छिद्र दो विशिष्ट अधिचर्मी कोशिकाओं से घिरा रहता है जिन्हें द्वार कोशिकाएँ कहते हैं। अपने छोटे आकार के कारण द्वार कोशिकाएँ स्फीति परिवर्तन से शीघ्र प्रभावित होती हैं और इस प्रकार रंध्रों के खुलने तथा बंद होने का नियमन करती हैं।

खंभ मृदूतक किसकी पत्तियों में अनुपस्थित होता है :-

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ज्वार (कुल-Poaceae) एक एकबीजपत्री पादप है। एकबीजपत्री की पत्तियों में खंभ मृदूतक नहीं होता, क्योंकि एकबीजपत्री पत्ती का पर्णमध्योतक खंभ तथा स्पंजी मृदूतक में विभेदित नहीं होता, सभी कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली, पर्णहरितयुक्त तथा कम अंतरकोशिकीय अवकाशों के साथ अनियमित रूप से सघन व्यवस्थित होती हैं।

संवहन ऊतक, यांत्रिक ऊतक तथा उपचर्म का ह्रास किसका लक्षण है

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जलोद्भिदों में संवहन ऊतक तथा यांत्रिक ऊतक ह्रासित होते हैं। उपचर्म या तो पूर्णतः
अनुपस्थित होता है अथवा यदि उपस्थित हो तो पतला और अल्प विकसित होता है। मरुद्भिदों में उपचर्म मोटा तथा सुविकसित होता है।
संवहन ऊतक तथा यांत्रिक ऊतक सुविकसित एवं विभेदित होते हैं। समोद्भिदों में वायवीय भाग का उपचर्म मध्यम रूप से विकसित होता है। संवहन तथा यांत्रिक ऊतक पर्याप्त विकसित एवं सुविभेदित होते हैं।

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Frequently Asked Questions

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