पुष्पी पादपों में संवहन ऊतक किससे विकसित होते हैं
प्ररोह शीर्षस्थ विभज्योतक के लिए ऊतकजन सिद्धांत हैन्स्टीन (1870) द्वारा प्रस्तावित किया गया। इसके अनुसार तीन भिन्न विभज्योतकी क्षेत्र (परतें) होते हैं जिन्हें त्वचाजन, वल्कुटजन तथा रंभजन कहते हैं। त्वचाजन सबसे बाहरी ऊतकजन है जो अधिचर्म बनाता है, वल्कुटजन मध्य वाला है जो वल्कुट बनाता है तथा रंभजन सबसे भीतरी है जिससे केंद्रीय रंभ (ie, अर्थात् संवहन ऊतक) बनता है।
कॉर्क एधा (फेलोजन) बाहरी वल्कुट क्षेत्र में पाया जाने वाला द्वितीयक पार्श्व विभज्योतक है। इसकी कोशिकाएँ परिनतिक रूप से विभाजित होकर बाहर की ओर (कॉर्क अथवा फेलम बनाते हुए) तथा भीतर की ओर (द्वितीयक वल्कुट अथवा फेलोडर्म बनाते हुए) कोशिकाएँ काटती हैं।