एक ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन ठंडे नाइट्रस अम्ल के साथ बनाता है:
(c)
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एक ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन ठंडे नाइट्रस अम्ल के साथ बनाता है:
(c)
जलीय विलयन में ऐमीनों की क्षारकीय सामर्थ्य को देखते हुए, इनमें से किसकी क्षारकता सबसे कम है
Kb के आधार पर जलीय विलयन में क्षारकीय प्रकृति का क्रम।
निम्नलिखित में से किसका LiAlH4 द्वारा अपचयन द्वितीयक ऐमीन देता है?
[2007]
(a)
डाइमेथिलऐमीन
उत्प्रेरकीय अपचयन द्वारा अथवा लिथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड (LiAlH4) अथवा नवजात हाइड्रोजन द्वारा, ऐल्किल आइसोसायनाइड ऐमीन देता है, जबकि सायनाइड अपचयन पर ऐमीन देता है।
अभिक्रिया में,
पद Y है
[1999]
RMgX की सायनोजन क्लोराइड के साथ अभिक्रिया देती है:
जब एक कार्बधात्विक यौगिक (RMgX) सायनोजन क्लोराइड (ClCN) के साथ अभिक्रिया करता है, तो ग्रीन्यार अभिकर्मक नाभिकरागी योग तथा उसके बाद निष्कासन दर्शाता है, जिससे एक कार्बनिक नाइट्राइल (RCN) बनता है। अतः सही विकल्प RCN है।
निम्नलिखित अभिक्रिया श्रृंखला पर विचार कीजिए
यौगिक[A][B] यौगिक [A] है
प्राथमिक ऐमीनों के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[2010]
(c) मुख्य विचार
(i) इलेक्ट्रॉन-आकर्षी प्रतिस्थापी की उपस्थिति क्षारकता घटाती है, जबकि इलेक्ट्रॉन-दाता प्रतिस्थापी जैसे -CH3, -C2H5 आदि की उपस्थिति अम्लता बढ़ाती है।
(ii) HNO2, ऐलिफैटिक ऐमीन के -NH2 समूह को -OH में बदलता है, जबकि ऐरोमैटिक ऐमीनों के समूह को -N=NCl में।
चूँकि फेनिल समूह इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह है, यह क्षारकता घटाता है। दूसरी ओर ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन-दाता होने के कारण क्षारकता बढ़ाता है। अतः ऐल्किल ऐमीन ऐरिल ऐमीनों तथा अमोनिया दोनों की तुलना में अधिक क्षारकीय हैं।
अतः HNO2 (नाइट्रस) ऐल्किल ऐमीनों को ऐल्कोहॉलों में बदलता है।
परंतु ऐरिल ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं।
ताप पर
अतः HNO2 ऐरिल ऐमीनों को फिनॉल में नहीं बदलता।
जब NaNO2 तथा तनु HCl को एक ऐमीन में पर मिलाया गया, तो एक रंगहीन गैस निकली तथा एक आयनिक यौगिक बना। वह ऐमीन है:
(b)
प्राथमिक ऐमीन तथा क्लोरोफॉर्म के मिश्रण को एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) के साथ गर्म करने पर प्राप्त यौगिक है
[1997]
(a)
ऐल्किल आइसोसायनाइड
यह अभिक्रिया कार्बिलऐमीन परीक्षण कहलाती है।
(केवल ऐमीन यह अभिक्रिया देते हैं)
निम्नलिखित में सबसे प्रबल क्षारक है:
(d) ऐलिफैटिक ऐमीन ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में अधिक क्षारकीय होते हैं, क्योंकि बाद वाले अनुनाद के कारण अधिक स्थायी होते हैं।
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