Basic Principles of Orgainc Chemistry NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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यौगिक Br(Cl) CH.CF3 का IUPAC नाम है :

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Explanation

यौगिक Br(Cl) CH.CF3 का सही IUPAC नाम 2-ब्रोमो-2-क्लोरो-1,1,1-ट्राइफ्लोरोएथेन है। नंबरिंग से यह सुनिश्चित होना चाहिए कि प्रतिस्थापकों के लिए सबसे कम संभव लोकेंट हों। इसलिए, सही विकल्प 2-ब्रोमो-2-क्लोरो-1,1,1-ट्राइफ्लोरोएथेन है।

निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक मेटामेरिज्म दर्शाएगा

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मेटामेरिज्म समावयवता का एक प्रकार है जिसमें यौगिकों का आणविक सूत्र समान होता है लेकिन क्रियात्मक समूह के दोनों ओर भिन्न एल्किल समूह होते हैं। $C_2H_5 - S - C_2H_5$ (diethyl sulfide) मेटामेरिज्म दर्शा सकता है क्योंकि सल्फर परमाणु के दोनों ओर एल्किल समूहों को बदलने से $CH_3 - S - C_3H_7$ जैसे विभिन्न यौगिक प्राप्त हो सकते हैं। अन्य विकल्प मेटामेरिज्म नहीं दर्शाते क्योंकि क्रियात्मक समूह के दोनों ओर एल्किल समूहों को बदलने से विभिन्न यौगिक प्राप्त नहीं होते।

निम्नलिखित में से कौन से मूलक द्विसंयोजक हैं? (a) Ethylidene (b) Vinylidene (c) Benzyl (d) Methylidyne

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द्विसंयोजक मूलक वे होते हैं जिनमें बंधन के लिए दो संयोजकता इलेक्ट्रॉन उपलब्ध होते हैं। Ethylidene (CH3-CH) और Vinylidene (CH2=C) द्विसंयोजक मूलकों के उदाहरण हैं। Benzyl और Methylidyne द्विसंयोजक मूलक नहीं हैं।

$ ( CH_3) _4C $ का व्युत्पन्न नाम है -

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$(CH_3)_4C$ का व्युत्पन्न नाम Tetramethylmethane है। यह नाम यौगिक की संरचना को दर्शाता है, जिसमें एक केंद्रीय कार्बन परमाणु चार methyl समूहों से बंधा होता है।

CH3–, NH2–, OH– और F– की नाभिकरागिता निम्नलिखित क्रम में घटती है -

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नाभिकरागिता क्रम $CH_3– > NH_2– > OH– > F–$ नाभिकरागियों की क्षारकता और ध्रुवीकरणीयता द्वारा निर्धारित होता है। मिथाइल ऋणायन ($CH_3–$) इसकी उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व और कार्बन की कम विद्युतऋणात्मकता के कारण प्रबलतम नाभिकरागी है। ऐमाइड आयन ($NH_2–$) इसके बाद आता है, उसके बाद हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH–$), और अंत में फ्लोराइड आयन ($F–$) इसकी उच्च विद्युतऋणात्मकता और कम ध्रुवीकरणीयता के कारण दुर्बलतम नाभिकरागी है।

सूत्र $C_4H_{10}O $ द्वारा निरूपित ईथर मेटामरों की संख्या है -

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सूत्र $C_4H_{10}O$ से तीन ईथर मेटामर बन सकते हैं: 1. डाइएथिल ईथर (CH$_3$CH$_2$OCH$_2$CH$_3$), 2. मेथिल प्रोपिल ईथर (CH$_3$OCH$_2$CH$_2$CH$_3$), तथा 3. एथिल मेथिल ईथर (CH$_3$CH$_2$OCH$_3$)। ये तीन संभव संरचनाएँ हैं, अतः सही विकल्प 3 है।

निम्नलिखित आयनों की स्थायित्व का घटता क्रम क्या है? $(i) CH_3—C+H—CH_3 (ii) CH_3—C+H—OCH_3 and (ii) CH_3—C+H—COCH_3$

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क्षारकों $NH_3, CH_3NH_2 and (CH_3)_2NH$ के लिए बढ़ती क्षारकीय प्रकृति का सही क्रम है:

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ऐमीनों की क्षारकीय प्रकृति नाइट्रोजन परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की प्रोटॉनन हेतु उपलब्धता पर निर्भर करती है। अमोनिया ($NH_3$) में नाइट्रोजन से कोई ऐल्किल समूह जुड़ा नहीं है, अतः उसकी क्षारकता सबसे कम है। $CH_3NH_2$ (मेथिलऐमीन) में मेथिल समूह के इलेक्ट्रॉन-दाता प्रभाव से नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, जिससे वह अमोनिया से अधिक क्षारकीय हो जाता है। $ (CH_3)_2NH$ (डाइमेथिलऐमीन) में दो इलेक्ट्रॉन-दाता मेथिल समूह नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को और बढ़ाते हैं, जिससे वह तीनों में सर्वाधिक क्षारकीय हो जाता है। अतः बढ़ती क्षारकीय प्रकृति का सही क्रम $ NH_3 < CH_3NH_2 < (CH_3)_2NH$ है।

चक्रीय हाइड्रोकार्बन अणु 'A' में सभी कार्बन तथा हाइड्रोजन एक ही तल में हैं। सभी कार्बन-कार्बन बंध समान लंबाई के हैं जो $1.54 A^\circ $ से कम, परंतु $1.34 A ^\circ $ से अधिक हैं। बंध कोण होगा

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दी गई जानकारी से पता चलता है कि हाइड्रोकार्बन अणु 'A' एक समतलीय चक्रीय संरचना है जिसमें सभी कार्बन-कार्बन बंध 1.34 AÌŠ (जो द्विबंधों के लिए विशिष्ट है) तथा 1.54 AÌŠ (जो एकल बंधों के लिए विशिष्ट है) के बीच समान लंबाई के हैं। इससे संकेत मिलता है कि बंध संभवतः इनके बीच कहीं हैं, जो संभावित अनुनाद संरचनाओं की ओर इशारा करता है। इस विवरण से मेल खाने वाला एक सामान्य उदाहरण बेंज़ीन है, जो एक समतलीय चक्रीय अणु है जिसके बंध कोण $120^ ext{°}$ होते हैं क्योंकि उसके कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित हैं।

आइसोब्यूटिल क्लोराइड है:

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(b) आइसो नाम के लिए इसमें (CH3)2CH- समूह होना चाहिए।

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Frequently Asked Questions

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