क्षारीय ऑक्साइड है:
ऑक्साइड में Cr की ऑक्सीकरण अवस्था जितनी कम होगी, क्षारीय प्रकृति उतनी ही अधिक होगी।
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क्षारीय ऑक्साइड है:
ऑक्साइड में Cr की ऑक्सीकरण अवस्था जितनी कम होगी, क्षारीय प्रकृति उतनी ही अधिक होगी।
समान चुंबकीय आघूर्ण वाला युग्म है
Mn2+ तथा Fe3+ दोनों में 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। अतः इनका चुंबकीय आघूर्ण समान है
रेडियोऐक्टिव लैंथेनॉइड है
लैंथेनॉइडों में केवल प्रोमीथियम (Pm) 61 रेडियोऐक्टिव है
निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक क्षारीय है?
लैंथेनॉइड श्रेणी में बाएँ से दाएँ जाने पर हाइड्रॉक्साइड की क्षारीय प्रकृति घटती है।
जल में कौन रंगहीन है?
Sc3+ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है। अतः यह रंगहीन है।
संगत लैंथेनॉइडों की तुलना में ऐक्टिनॉइडों द्वारा अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाने का मुख्य कारण है
ऐक्टिनॉइड विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ जैसे +2, +3, +4, +5, +6 तथा +7 दर्शाते हैं। तथापि सभी ऐक्टिनॉइडों में +3 ऑक्सीकरण अवस्था सर्वाधिक सामान्य है।
ऐक्टिनॉइडों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं की विस्तृत परास का कारण यह है कि 5f, 6d तथा 7s ऊर्जा स्तरों की ऊर्जाएँ तुलनीय हैं।
अतः ये तीनों उपकोश भाग ले सकते हैं।
CrO42- तथा MnO4- जलीय विलयन में क्रमशः गहरे पीले तथा तीव्र बैंगनी रंग के होते हैं। रंग के गहरा होने का कारण है
आवेश-स्थानांतरण संकुल (CT संकुल) या इलेक्ट्रॉन-दाता-ग्राही संकुल दो या अधिक अणुओं, अथवा एक बड़े अणु के भिन्न भागों का ऐसा सहचरण है जिसमें आण्विक इकाइयों के बीच इलेक्ट्रॉनिक आवेश का एक अंश स्थानांतरित हो जाता है। इससे उत्पन्न स्थिरवैद्युत आकर्षण संकुल को स्थायित्व प्रदान करता है। जिस अणु से आवेश स्थानांतरित होता है उसे इलेक्ट्रॉन दाता तथा ग्रहण करने वाली स्पीशीज़ को इलेक्ट्रॉन ग्राही कहते हैं।
इस आकर्षण की प्रकृति स्थायी रासायनिक बंध नहीं है, अतः यह सहसंयोजक बलों से कहीं अधिक दुर्बल है। ऐसे अनेक संकुल इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण द्वारा उत्तेजित इलेक्ट्रॉनिक अवस्था में जा सकते हैं। इस संक्रमण की उत्तेजन ऊर्जा प्रायः वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य क्षेत्र में पड़ती है, जिससे इन संकुलों का अभिलक्षणिक तीव्र रंग उत्पन्न होता है। इन प्रकाशिक अवशोषण बैंडों को प्रायः आवेश-स्थानांतरण बैंड (CT बैंड) कहा जाता है।
आवेश-स्थानांतरण संकुल अकार्बनिक तथा कार्बनिक दोनों प्रकार के अनेक अणुओं में तथा ठोसों, द्रवों एवं विलयनों में पाए जाते हैं। एक सुपरिचित उदाहरण स्टार्च के साथ आयोडीन द्वारा बना संकुल है, जो तीव्र नीला आवेश-स्थानांतरण बैंड दर्शाता है।
अकार्बनिक रसायन में अधिकांश आवेश-स्थानांतरण संकुलों में धातु परमाणुओं तथा लिगेंडों के बीच इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण होता है। यदि स्थानांतरण लिगेंड-सदृश आण्विक कक्षक से धातु-सदृश कक्षक की ओर हो तो संकुल को लिगेंड-से-धातु आवेश स्थानांतरण (LMCT) संकुल कहते हैं; यदि आवेश धातु-सदृश कक्षक से लिगेंड-सदृश कक्षक की ओर जाए तो इसे धातु-से-लिगेंड आवेश स्थानांतरण (MLCT) संकुल कहते हैं। अतः MLCT में धातु केंद्र का ऑक्सीकरण होता है, जबकि LMCT में धातु केंद्र का अपचयन होता है।
डाइक्रोमेट आयन Cr2O72- में,
डाइक्रोमेट आयन (Cr2O7^2-) में 6 तुल्य Cr-O बंध होते हैं। डाइक्रोमेट आयन की ज्यामिति चतुष्फलकीय है जिसमें दो क्रोमियम परमाणु तथा सात ऑक्सीजन परमाणु होते हैं। आयन के भीतर इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकरण के कारण Cr-O बंध तुल्य होते हैं।
किसी संक्रमण तत्व X का +3 ऑक्सीकरण अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d5 है। इसका परमाणु क्रमांक क्या है?
[Ar]4s23d6 [Ar]3d5
[X]
अतः [X] का परमाणु क्रमांक 26 है
K3[Fe(CN)5(H2O)] का चुंबकीय आघूर्ण है
K3[Fe(CN)5(H2O)] में शून्य अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं तथा इसका चुंबकीय आघूर्ण शून्य है
Fe +2 का विन्यास d6 है; CN प्रबल लिगेंड होने के कारण इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करके d2sp3 संकरण बनाता है
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