D & F Block Elements NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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उस गैस का नाम बताइए जो अम्लीकृत KMnO4 विलयन को सरलता से रंगहीन कर देती है।

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(b) SO2 गैस अम्लीकृत KMnO4 विलयन को सरलता से अपचयित कर देती है क्योंकि KMnO4 एक ऑक्सीकारक है जो SO2 का सरलता से ऑक्सीकरण करता है।

2MnO4-+ 5SO2 + 2H2O 2Mn2+ + 5SO42- + 4H+

जबकि अन्य विकल्प जैसे NO2 (प्रबल ऑक्सीकारक), CO2 (न ऑक्सीकारक न अपचायक) अम्लीकृत KMnO4 विलयन को रंगहीन नहीं कर सकते।

HgCl2 तथा I2 दोनों को I- आयन युक्त जल में घोलने पर बनने वाला स्पीशीज़-युग्म है

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(c) HgCl2 तथा I2 दोनों को I- आयन युक्त जल में घोलने पर बनने वाला स्पीशीज़-युग्म है  HgI42- and  I3-

लैंथेनॉनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा गलत है?

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(c) Eu(63) = 4f7.5d°, 6S2, Eu2+ = Af7

लैंथेनॉइड श्रेणी में आयनिक त्रिज्या घटती है तथा सहसंयोजक गुण बढ़ता है, अतः क्षारकता घटती है। उच्च आयनन विभव के कारण लैंथेनॉन ऐलुमिनियम की तुलना में कम क्रियाशील हैं। इस उच्च आयनन विभव का कारण लैंथेनॉइड संकुचन है। Ce4+ एक अच्छा ऑक्सीकारक है, यह सरलता से Ce3+ में बदल जाता है।

जब SO2 को अम्लीकृत K2Cr2O7 विलयन में से प्रवाहित किया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

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(C) जब SO2 को अम्लीकृत K2Cr2O7 विलयन में से प्रवाहित किया जाता है, तो हरा क्रोमियम सल्फेट बनता है। इस अभिक्रिया में Cr की ऑक्सीकरण अवस्था +6 से +3 हो जाती है।

K2Cr2O7 + H2SO4 + 3SO2  K2SO4 + Cr2(SO4)3 + H2O

हरे रंग का प्रकट होना क्रोमियम धातु के अपचयन के कारण है।

लैंथेनॉइड संकुचन के कारण निम्नलिखित में से किस तत्व-युग्म की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हैं? (कोष्ठक में दी गई संख्याएँ परमाणु क्रमांक हैं)।

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लैंथेनॉइड संकुचन के कारण Zr (परमाणु त्रिज्या 160 pm) तथा Hf (परमाणु त्रिज्या 158 pm) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हैं।

लैंथेनॉइडों में लैंथेनम La (Z = 57) से ल्यूटीशियम Lu (Z = 71) तक के तत्व सम्मिलित हैं। ज़र्कोनियम Zr(40) द्वितीय संक्रमण श्रेणी (4d) का तथा Hf (72) तृतीय संक्रमण श्रेणी (5d) का सदस्य है। लैंथेनॉइड संकुचन 4f कक्षकों के बीच में आ जाने से संबद्ध है, जो 5d-श्रेणी प्रारंभ होने से पहले भर जाते हैं। 5d-कक्षकों से पहले 4f कक्षकों के भरने से परमाणु त्रिज्या में नियमित कमी होती है, जो परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ अपेक्षित आकार-वृद्धि की भरपाई कर देती है। इस लैंथेनॉइड संकुचन के फलस्वरूप द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणियों के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान होती हैं।

निम्नलिखित में से किस प्रक्रम में लोहे का ऑक्सीकरण नहीं होता?

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  0  III

(a) Fe +H2O+O2→Fe2O3. x [H2O]
  (वायु से)
 
    0  II
(b) Fe+CuSO4FeSO4+Cu

      0  0
(c) Fe+5COFe(CO5)

  0  III
(d)
 Fe+H2O→Fe2O3+H2



∴ Fe से Fe(CO)5 के बनने में लोहे का ऑक्सीकरण नहीं होता क्योंकि ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता।

गैडोलीनियम 4f श्रेणी का सदस्य है। इसका परमाणु क्रमांक 64 है। निम्नलिखित में से गैडोलीनियम का सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कौन-सा है?

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(c) 64Gd = [Xe]4f75d16s2

पूर्ण आयनन मानते हुए, निम्नलिखित में से किस यौगिक के समान मोल पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए अम्लीकृत KMnO4 की न्यूनतम मात्रा माँगेंगे?

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FeSO4 पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए अम्लीकृत KMnO4 की न्यूनतम मात्रा माँगेगा।

लैंथेनॉइड संकुचन का कारण है

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(a) लैंथेनॉइड संकुचन लैंथेनाइडों की परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में नियमित कमी है। इसका कारण कक्षकों की विसरित आकृति के कारण उनका अपूर्ण परिरक्षण या दुर्बल परिरक्षण प्रभाव है, जो बढ़े हुए नाभिकीय आवेश के प्रभाव को संतुलित नहीं कर पाता। अतः शुद्ध परिणाम लैंथेनॉइडों के आकार में संकुचन है।

अभिक्रिया के अनुसार KMnO4 को K2MnO4 से बनाया जा सकता है

3MnO42- + 2H2O2MnO4- + MnO2 + 4OH-

OH- आयनों को हटाकर अभिक्रिया को पूर्ण किया जा सकता है, इसके लिए मिलाया जाता है

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चूँकि OH- दुर्बल अम्ल (H2O) से उत्पन्न होते हैं, इन्हें हटाने के लिए दुर्बल अम्ल (जैसे CO2) का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि प्रबल अम्ल (HCl) अभिक्रिया को उत्क्रमित कर देता है। KOH, OH- की सांद्रता बढ़ा देता है, अतः अभिक्रिया पुनः पश्च दिशा में विस्थापित हो जाती है। CO2, OH- से संयोग करके कार्बोनेट देता है जो सरलता से हट जाता है। SO2 जल से अभिक्रिया करके प्रबल अम्ल देता है, अतः इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता।

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Frequently Asked Questions

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