ऐसीटिक अम्ल का Ka = 1.8 × 10–5 है जबकि फॉर्मिक अम्ल का Ka = 2.1 × 10–4 था। सेल के वि.वा.बल का परिमाण क्या होगा
Pt(H2) Pt(H2) 25°C पर
अभिक्रिया है Hc+
∴ E = = 0.0629 V
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ऐसीटिक अम्ल का Ka = 1.8 × 10–5 है जबकि फॉर्मिक अम्ल का Ka = 2.1 × 10–4 था। सेल के वि.वा.बल का परिमाण क्या होगा
Pt(H2) Pt(H2) 25°C पर
अभिक्रिया है Hc+
∴ E = = 0.0629 V
सेल पर विचार कीजिए Ag(s)|AgBr(s)|Br–(aq)||AgCl(s)|Cl–(aq)|Ag(s) 25°C पर। AgBr तथा AgCl के विलेयता गुणनफल स्थिरांक क्रमशः 5 × 10–13 तथा 1 × 10–10 हैं। Br– तथा Cl–आयनों की सांद्रताओं के किस अनुपात पर सेल का वि.वा.बल शून्य होगा ?
= log KSPAgBr = – 0.7257
तथा = log KSPAgCl = – 0.59
अब सेल अभिक्रिया है
Ag + Br– AgBr + 1e–
AgCl + 1e– AgBr + Cl–
Br–AgCl Cl– + AgBr
0 = (0.7257–0.59) +
⇒ = 0.005
का मान निम्नलिखित आंकड़ों से 25°C पर जल में SrCl2 के लिए :
सांद्रता (mol/lt) 0.25 1
(Ω–1 cm2 mol–1) 260 250
260 = – 0.5 b…
250 = – b … (2)
हल करने पर तथा (2) से, हमें प्राप्त होता है
= 270 Ω– cm2 mol–1
अभिक्रिया का उपयोगी कार्य ज्ञात कीजिए Ag(s) + 1/2Cl2(g) AgCl(s)
दिया है
यदि = 1 atm तथा T = 298 K
AgCl(s) + e Ag(s) + Cl–E° = 22 V
1/2Cl2 + e Cl– E° = 1.36 V
हमें प्राप्त होता है
Ag(s) + Cl2(g) AgCl(s)E°cell = 1.14 V
∴ ΔG = –nEF° = – (96500) (1.4) = –110 KJ/mol
इन आयनों Cu+, Co3+, Fe2+ में से कौन-सा जलीय माध्यम में स्थायी है।
दिया है :E°Cu2+/Cu+ = 0.15 volt ; E°Cu+/Cu = 0.53 V ;E°Co3+/Co2+ = 1.82 V ;
E°Fe3+/Fe2+ = 0.77 V ;E°Fe2+Fe = –0.44 V ;E°O2,H+/H2O = 1.23 V
यदि धातु आयन का अपचयन विभव O2/H2O युग्म से अधिक है, तो वह आयन जल में स्थायी होता है। अतः Co3+ जल में स्थायी है
सही कथन चुनिए यदि –
E°Mg2+/Mg = –2.4V, E°Sn4+/Sn2+ = 0.1 V, E°MnO4–,H+/Mn2+ = 1.5 V, E° I2/I–= 0.5 V
यहाँ,
[संकेत : (2) तथा (3) की विपरीत अभिक्रियाएँ स्वतःप्रवर्तित हैं; यहाँ दुर्बलतम ऑक्सीकारक Mg2+ है]
मानक Cd–सेल का ताप गुणांक –5.0 10–5 Vk–1 है, जिसका 25°C पर वि.वा.बल 1.018 V है। सेल के संचालन के दौरान, ताप –
∵ ΔH = ΔG + T ΔS
= –nFEcell + nFT
= –199.35 KJ/mol [Cd2+ +2e–→ Cd के लिए n = 2 तथा अन्य मान रखने पर]
अब ΔH < O ⇒ ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
⇒ ऊष्मा मुक्त होगी जिससे ताप बढ़ जाएगा।
एक सेल Ag | Ag+ || Cu++ | Cu में प्रारंभ में 2M Ag+ तथा 2M Cu++ आयन हैं। 4825 sec तक 10 amp धारा प्रवाहित करने के बाद सेल विभव में परिवर्तन है :
Q = 10 × 4825 = 4825 = 48250 C
मोलों की संख्या = = 0.5
Ag + Cu++ Ag+ + Cu
2.00 2.00
2 – 0.25 2 + 0.50
Ecell –E°cell – log
E1 = E°ell – log
E2 = E°ell – log
ΔE = E2 –E1 = [log 1.41 – log 1.88]
= [0.1492 –0.2742] = – × 0.125 = –.00738 V
सेल के लिए (298 K पर)
Ag(s) | AgCl(s) | Cl–(aq) || AgNO3(aq) | Ag(s)
निम्नलिखित में से कौन-सा सही है –
[H+] के कारण चालकता उच्च है
सांद्र H2SO4 के विद्युत्-अपघटन के दौरान परडाइसल्फ्यूरिक अम्ल (H2S2O8) तथा O2 समान मोलर मात्रा में बनते हैं। साथ-साथ बनने वाली H2 की मात्रा होगी (2H2SO4 → H2S2O8 + 2H+ + 2e–)
ऐनोड
कैथोड {2H2O → H2 + 2OH––2e–} × 3.
निवल: 2H2SO4 + 8H2O → H2S2O8 + O2 + 3H2 + 6H+ + 6OH–
अतः अनुपात and का 1: 3 है।
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