Solutions NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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 10 g प्रति dm3 यूरिया (आण्विक द्रव्यमान = 60 g mol-1) युक्त एक विलयन किसी अवाष्पशील विलेय के 5% विलयन के साथ समपरासरी है। इस अवाष्पशील विलेय का आण्विक द्रव्यमान है:

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10 g प्रति dm3 यूरिया किसी अवाष्पशील विलेय के 5% विलयन के साथ समपरासरी है। अतः इन विलयनों के बीच परासरण संभव नहीं है, इसलिए इनकी मोलर सांद्रताएँ एक-दूसरे के बराबर हैं,

अतः यूरिया विलयन की मोलर सांद्रता = (10 g/dm3)/यूरिया का अणुभार = 10/60 M = 1/6 M

5% अवाष्पशील विलेय की मोलर सांद्रता = (50 g/dm3)/अवाष्पशील विलेय का अणुभार = 50/m M

दोनों विलयन एक-दूसरे के समपरासरी हैं, अतः

 1/6 = 50/m

अथवा m = 50 x 6 = 300 g mol-1

एथेनॉल में ऐसीटोन का विलयन:

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(b) एथेनॉल में ऐसीटोन का विलयन राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है, क्योंकि इन दोनों द्रवों की ध्रुवता तथा हाइड्रोकार्बन शृंखला की लंबाई में अंतर होने पर भी वे मिश्रणीय हैं।

परासरण के दौरान, अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर जल का प्रवाह होता है :

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परासरण के दौरान, अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर जल का प्रवाह केवल कम सांद्रता वाले विलयन से होता है। 

तीन विलयन बनाए जाते हैं: 'A' के 'w' gm को 1kg जल में, '13' के gm को दूसरे 1 kg जल में तथा 'C' के 'w' gm को अन्य 1 kg जल में मिलाकर (A, B, C अविद्युत्-अपघट्य हैं)। इन विलयनों में क्रमशः (A → B → C) शुष्क वायु प्रवाहित की जाती है। विलयन A का भार 2gm घटा पाया गया जबकि विलयन B का भार 0.5 gm बढ़ा तथा विलयन C का 1 gm घटा। तब A, B तथा C के मोलर द्रव्यमानों के बीच संबंध है :

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भार में हानि उस विलयन के ऊपर के वाष्प दाब के समानुपाती होनी चाहिए:

अतः, PSA 2gm

PSB 1.5gm

PSC 2.5gm

अतः अधिकतम वाष्प दाब C विलयन के ऊपर है, इसलिए इसमें अवनमन न्यूनतम है तथा अतः मोल प्रभाज न्यूनतम है (अर्थात् विलेय के मोलों की संख्या न्यूनतम है)। अतः पदार्थ का मोलर द्रव्यमान अधिकतम है।

टॉलूईन की मोलर वाष्पन ऊष्मा AHv है। यदि 315 K पर इसका वाष्प दाब 60 torr तथा 356K पर 300 torr हो, तो AHv = ? (log 2 = 0.3)

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मोलर वाष्पन ऊष्मा (ΔHv) की गणना क्लॉसियस-क्लैपेरॉन समीकरण से की जा सकती है: ln(P2/P1) = -(ΔHv/R) * ((1/T2) - (1/T1))। दिए गए मान रखने पर तथा log(5) = 0.3 * log(2) का उपयोग करने पर प्राप्त होता है: ΔHv = (8.314 * 0.3 * (356 - 315)) / (1/356 - 1/315) = 37.5 kJ/mol।

2 मोल [Cu(NH3)3Cl) Cl तथा 3 मोल H2O युक्त एक जलीय विलयन के वाष्प दाब में आपेक्षिक कमी 0.50 है। AgNO3 के साथ अभिक्रिया पर यह विलयन बनाएगा (AgNO3 मिलाने पर पदार्थ के आयनन की मात्रा में कोई परिवर्तन न मानते हुए)

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ΔPP Xsolute= i ×25=12

अतः, i = 1.25

⇒ अतः वियोजन की मात्रा = 14

अतः, Cl आयनों के मोल 2 × 14= 12मोल

अतः, AgCl अवक्षेप के मोल = 12मोल = 0.5 mol AgCl

निम्नलिखित में से किसे घटते हुए हिमांक के क्रम में व्यवस्थित किया गया है?

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उच्च हिमांक ⇒ कम ΔTf

⇒ कम मोललता

⇒ कणों की कम संख्या

द्रवों A तथा B का एक आदर्श मिश्रण, जिसमें A के 2 मोल तथा B के 2 मोल हैं, किसी निश्चित ताप पर 1 atm कुल वाष्प दाब रखता है। एक अन्य मिश्रण जिसमें A का 1 मोल तथा B के 3 मोल हैं, का वाष्प दाब 1 atm से अधिक है। परंतु यदि दूसरे मिश्रण में C के 4 मोल मिला दिए जाएँ, तो वाष्प दाब घटकर 1 atm हो जाता है। C का वाष्प दाब, Pc° = 0.8 atm है। शुद्ध A तथा शुद्ध B के वाष्प दाब ज्ञात कीजिए।

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PA02+PB02= 1 atm PA° + PB° = 2 atm

PA04+3PB04 > 1 atmrArrPA° + 3PB° > 4 atm

तथा PA08+3PB08 + 4PC08 = 1 atmrArrPA° + 3PB° + 4P C° = 8 atm

अतः PA° + 3PB° = (8 – 4 × 0.8 ) atm = 4.8 atm 

अतः PB° = 1.4 atm

PB° = 0.6 atm

वायु का एक प्रतिदर्श 298K, 750mm Hg दाब पर बेन्ज़ीन (वाष्प दाब = 298 K पर 100 mm Hg) से संतृप्त है। यदि इसे समतापीय रूप से इसके प्रारंभिक आयतन के एक-तिहाई तक संपीडित किया जाए, तो निकाय का अंतिम दाब है

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वायु का दाब = 750 – 100 = 650 mm Hg

संपीडन पर Pf = 650 × 3 mm Hg = 1950 mm Hg

अतः PT = (1950 + 100) = 2050 mm Hg

उपलब्ध विलयन हैं 0.1 M NaCl का 1L तथा 0.2 M CaCl2 का 2L। केवल इन दो विलयनों का उपयोग करके अधिकतम कितने आयतन का विलयन बनाया जा सकता है जिसमें ठीक [Cl] = 0.34M हो। दोनों विद्युत्-अपघट्य प्रबल हैं

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मान लीजिए लिए गए आयतन ‘x’ तथा ‘y’ लीटर हैं,

अतः 0.1x+0.4yx+y = 0.34 तथा Vg = (x + y) (अधिकतम करना है)

अतः y = 4x, अतः अधिकतम आयतन के लिए

y = 2L तथा x = 12L. 

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Frequently Asked Questions

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