0.1 M विलयन के लिए वान्ट हॉफ गुणांक 2.74 है। वियोजन की मात्रा है [IIT 1999]
⇌
अथवा
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0.1 M विलयन के लिए वान्ट हॉफ गुणांक 2.74 है। वियोजन की मात्रा है [IIT 1999]
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अथवा
अभिकथन : दो द्रवों के द्विअंगी विलयन के संदर्भ में पूर्णतः आदर्श विलयन संभव नहीं है।
कारण : कोई भी दो पदार्थ अंतराआण्विक बलों की ठीक एक जैसी प्रकृति तथा एक ही परिमाण नहीं रख सकते।
(A) अभिकथन सत्य है, कारण सत्य है तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
अभिकथन : जब किसी कोशिका को अतिपरासरणदाबी विलयन में रखा जाता है, तो वह सिकुड़ जाती है।
कारण : जल के विलवणीकरण के लिए प्रतिलोम परासरण का उपयोग किया जाता है।
(B) अभिकथन सही है क्योंकि कोशिका के भीतर वाष्प दाब बाहर की अपेक्षा अधिक होने से कोशिका के अंदर उपस्थित तरल बाहर आ जाते हैं।
कारण सही है क्योंकि प्रतिलोम परासरण में लवणीय जल से विलायक अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर शुद्ध विलायक में जाता है।
अभिकथन : HCl तथा HF के समान मोलर विलयनों के क्वथनांकों का अंतर उनकी
मोलरता घटाने पर घटता है।
कारण : बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार घटती है।
(C) बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार बढ़ती है।
अभिकथन : जब 0.1 मोलल यूरिया विलयन के 'a' mL को 0.1 मोलल ग्लूकोस विलयन के 'b' mL के साथ मिलाया जाता है, तो विलयन का क्वथनांक मिलाने से पहले के नमूनों के क्वथनांकों से भिन्न नहीं होता, परन्तु यदि 0.1 मोलल यूरिया के 'a' mL को 0.1 मोलल HF के 'b' mL के साथ मिलाया जाए तो मिश्रण का क्वथनांक अलग-अलग नमूनों के क्वथनांकों से भिन्न होता है।
कारण : HF एक दुर्बल विद्युत्-अपघट्य है जबकि ग्लूकोस अविद्युत्-अपघट्य है।
(A) क्योंकि तनुकरण पर HF के वियोजन की मात्रा बदल जाती है।
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