Solutions NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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pA तथा pB, क्रमशः एक आदर्श द्विअंगी विलयन के शुद्ध द्रव घटकों A तथा B के वाष्प दाब हैं। यदि x घटक A का मोल प्रभाज निरूपित करता है, तो विलयन का कुल दाब होगा।

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कुल दाब,
p= p'A+p'B ...(i)
हम जानते हैं कि, p'= pAxA
  p'= pBxB
p'A तथा p'B के मानों को समी. (i) में रखने पर
p= pAx+ pBxB

[xA+xB=1->xA=1-xB or xB=1-xA]

=pAx+ pB(1-xA) = pAx+ p- pBxA

∴ p= pB+xA(pA-pB)

हिमांक अवनमन स्थिरांक -1.86°C m-1 है। यदि 5.00g Na2SO4 को 45.0 g H2O में घोला जाए, तो हिमांक -3.82°C बदल जाता है। NaSO4 के लिए वान्ट हॉफ गुणांक ज्ञात कीजिए

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किसी यौगिक के लिए वान्ट हॉफ गुणांक i, जो एक विलायक में वियोजित तथा दूसरे विलायक में संगुणित होता है, क्रमशः है।

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(b) वियोजन के लिए, i>1

   संगुणन के लिए, i<1

एक जलीय विलयन KI में 1.00 मोलल है। कौन-सा परिवर्तन विलयन के वाष्प दाब को बढ़ाएगा ?

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मुख्य विचार: वाष्प दाब विलयन के पृष्ठ क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। पृष्ठ क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, वाष्प दाब उतना ही अधिक होगा।

विलेय मिलाने से वाष्प दाब घट जाता है क्योंकि पृष्ठ के कुछ स्थान विलेय कणों द्वारा घेर लिए जाते हैं, जिससे पृष्ठ क्षेत्रफल घट जाता है। परंतु विलायक मिलाने, अर्थात् तनुकरण, से द्रव पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ जाता है, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है।

अतः (1 मोलल) KI के जलीय विलयन में जल मिलाने से वाष्प दाब बढ़ जाता है।

सुक्रोस (मोलर द्रव्यमान = 342 g mol-1) का एक विलयन 1000 g जल में 68.5 g सुक्रोस घोलकर बनाया गया है। प्राप्त विलयन का हिमांक होगा (kf जल के लिए = 1.86 K kg mol-1)

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हिमांक में अवनमन

Tf = kf x m

जहाँ, m = मोललता = wB x 1000/MB.WA = 68.5 x 1000/342 x 1000 = 68.5/342

 Tf = 1.86 x 68.5/342 = 0.372°C

Tf = T°-Ts = 0-0.372°C

 

तनुकरण के साथ किसी प्रबल विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता में वृद्धि मुख्यतः किसके कारण होती है

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मुख्य विचार λeq = k x v = (kx1000)normality

तनुकरण पर, प्रति cm3 धारावाही कणों की संख्या घट जाती है परंतु विलयन का आयतन बढ़ जाता है। फलस्वरूप आयनिक गतिशीलता बढ़ती है, जिससे प्रबल विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता बढ़ जाती है।

एक दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल के M/32 विलयन की तुल्यांकी चालकता 8.0 mho cm2 है तथा अनंत तनुता पर 400 mho cm2  है। इस अम्ल का वियोजन स्थिरांक है।

1.25x10-5

 1.25x10-6

6.25x10-4

 1.25x10-4

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वियोजन की मात्रा, α=^c/^∞ जहाँ, ^c तथा ^∞ क्रमशः दी गई सांद्रता पर तथा अनंत तनुता पर तुल्यांकी चालकताएँ हैं।
  ⇒ α=8.0/400=2x10-2

ओस्टवाल्ड के तनुता नियम से (दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल के लिए)

K= Cα/(1- α) = Cα2 (∴ 1>>>α) 
= 1/32 (2x10-2)= 1.25x10-5

एक आयनिक यौगिक Co(NH3)5(NO2)Cl का 0.0020 m जलीय विलयन -0.00732°C पर जमता है। जल में घोलने पर 1 मोल आयनिक यौगिक द्वारा उत्पन्न आयनों के मोलों की संख्या होगी (kf=-1.86。C/ m)

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(a) दिया है,

मोललता, m=0.0020 m

  Tf=0C-(- 0.00732°C)        = 0 + 0.00732°C        = 0.00732°C   kf = 1.86°C/mTf=i·kf×m      i=Tfkf×m= 0.007321.86 ×0.0020= 1.96 2

चूँकि यौगिक आयनिक है, अतः उत्पन्न मोलों की संख्या वान्ट हॉफ गुणांक i के बराबर है। अतः 2 मोल आयन उत्पन्न होते हैं।

CoNH35NO2Cl           CoNH35NO2+ + Cl-            1 mol                                     2 ions

कोलराउश का नियम कहता है कि

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(d) कोलराउश के नियम के अनुसार "अनंत तनुता पर जब वियोजन पूर्ण होता है, तो प्रत्येक आयन विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता में निश्चित योगदान देता है, चाहे वह जिस अन्य आयन से संबद्ध हो उसकी प्रकृति कुछ भी हो

    अथवा

अनंत तनुता पर किसी विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता धनायनों तथा ऋणायन की तुल्यांकी चालकताओं का योग होती है।

एक दुर्बल अम्ल (HX) का 0.5 मोलल जलीय विलयन 20% आयनित है। यदि Kf जल के लिए 1.86 K kg mol-1 हो, तो विलयन के हिमांक में अवनमन है:

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HX H+ + X-

1  0  0

1-α  α  α  (साम्यावस्था पर)

α = 20% वियोजन

अर्थात्, α = 0.2

i = 1-α+α+α

=1+α=1+0.2=1.2

Tf =i x Kf x m

= 1.2 x 1.86K kg mol-1 x 0.5

= 1.12 K

 

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