मुक्त ऊर्जा परिवर्तन =0 होता है जब:-
जब =0 साम्य
=(+ve) अस्वतःप्रवर्तित
=(-ve) स्वतःप्रवर्तित
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मुक्त ऊर्जा परिवर्तन =0 होता है जब:-
जब =0 साम्य
=(+ve) अस्वतःप्रवर्तित
=(-ve) स्वतःप्रवर्तित
18 g बर्फ को 0C तथा 1 atm पर जल में परिवर्तित किया जाता है। H2O(s) तथा H2O(l) की एन्ट्रॉपी क्रमशः 38.2 तथा 60 J K-1 mol-1 हैं। इस परिवर्तन के लिए एन्थैल्पी होगी
= 60-38.2=21.8 JK-1 mol-1
... =21.8 x 273 = 5951.4 J/mol
किसी पूर्ण गैस के नमूने के लिए जब इसका दाब समतापीय रूप से pi से pf तक बदला जाता है, तो एन्ट्रॉपी परिवर्तन इस प्रकार दिया जाता है
(b) एन्ट्रॉपी परिवर्तन इस प्रकार दिया जाता है,
S = nCpln(Tf/Ti) + nRln(pi/pf) ....(i)
समतापीय प्रक्रम के लिए, Ti = Tf
... nCpln(Tf/Ti) =0 [ln1 = 0]
समी. (i) से S = nRln(pi/pf)
कार्बन की CO2 में दहन ऊष्मा -393.5 kJ/mol है। कार्बन तथा ऑक्सीजन गैस से 35.2 g CO2 के बनने पर मुक्त ऊष्मा है
दिया है, C(s) + O2(g) CO2(g);
fH = -393.5 kJ mol-1
... 44 g अर्थात् 1 मोल के बनने पर मुक्त ऊष्मा
CO2 = -395.5 kJ mol
... 35.2 g CO2 के बनने पर मुक्त ऊष्मा
= -393.5 kJ mol-1/44 g x 35.2 g = -315 kJ mol-1
जल के लिए वाष्पन की मानक एन्थैल्पी vapH 100C पर 40.66 kJ mol-1 है। 100C पर जल के वाष्पन की आंतरिक ऊर्जा (kJ mol-1) है
(मान लीजिए कि जलवाष्प आदर्श गैस की भाँति व्यवहार करती है)
H2O(l) H2O(g)
ng = np - nr = 1-0=1
... 40.66 kJ mol-1 = vapE + 1x8.314x10-3x373
vapE = 40.66 kJ mol-1 -3.1 kJ mol-1
= +37.56 kJ mol-1
अभिक्रिया के लिए H तथा S के मान,
C(ग्रेफाइट) + CO2(g) 2CO(g) क्रमशः 170 kJ तथा 170 JK-1 हैं। यह अभिक्रिया स्वतःप्रवर्तित होगी
मुख्य विचार: स्वतःप्रवर्तित प्रक्रम के लिए G<0
G=H-TS
दिया है, H = 170 kJ = 170 x 103 J
S = 170 JK-1
T=?
0<170 x103 - Tx170
T>1000
... T=1110 K
निम्नलिखित में से कौन-से अवस्था फलन नहीं हैं?
(I) q + W (II) q
(III) W (IV) H-TS
मुख्य विचार: अवस्था फलन निकाय का वह गुण है जिसका मान केवल निकाय की प्रारंभिक तथा अंतिम अवस्था पर निर्भर करता है और पथ से स्वतंत्र होता है।
... आंतरिक ऊर्जा (E) = q + W
यह एक अवस्था फलन है क्योंकि यह पथ से स्वतंत्र है। यह एक विस्तीर्ण गुण है।
... गिब्स ऊर्जा (G) = H-TS
यह भी एक अवस्था फलन है क्योंकि यह पथ से स्वतंत्र है। यह भी एक विस्तीर्ण गुण है। ऊष्मा (q) तथा कार्य (W) अवस्था फलन नहीं हैं क्योंकि वे पथ पर निर्भर हैं।
H2, Cl2 तथा HCl की बंध वियोजन एन्थैल्पी क्रमशः 434, 242 तथा 431kJ mol-1 हैं। HCl की संभवन एन्थैल्पी है
मुख्य विचार: ΔHअभिक्रिया = Σ अभिकारकों की बंध ऊर्जा - Σ उत्पादों की बंध ऊर्जा
यहाँ, ΔHH-H = 434 kJ mol-1
ΔHCl-Cl = 242 kJ mol-1
ΔHH-Cl = 431 kJ mol-1
1/2H2=1/2Cl2 HCl
ΔHअभिक्रिया = 1/2ΔHH-H + 1/2ΔHCl-Cl - ΔHH-Cl
= (1/2)x434 = (1/2)x242-431
= 217+121-431
= -93 kJ mol-1
दिया है कि H-H तथा Cl-Cl की बंध ऊर्जाएँ क्रमशः 430 kJ mol-1 तथा 240 kJ mol-1 हैं और HCI के लिए ΔHf -90 kJ mol-1 है। HCl की बंध एन्थैल्पी है:
25°C पर एक मोल आदर्श गैस के 10 लीटर से 20 लीटर आयतन तक उत्क्रमणीय प्रसार में किया गया कार्य अर्ग में है
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