जूल-थॉमसन प्रसार है [JIPMER 2000]
जूल-थॉमसन प्रसार समएन्थैल्पिक होता है।
ऊष्मागतिकी में, जूल–थॉमसन प्रभाव (जिसे जूल–केल्विन प्रभाव या केल्विन–जूल प्रभाव भी कहा जाता है) किसी वास्तविक गैस या द्रव (आदर्श गैस से भिन्न) के ताप में होने वाले उस परिवर्तन का वर्णन करता है जब उसे किसी वाल्व या सरंध्र प्लग से इस प्रकार प्रवाहित किया जाता है कि वह ऊष्मारोधी बना रहे और पर्यावरण के साथ कोई ऊष्मा विनिमय न हो। इस प्रक्रिया को अवरोधन प्रक्रम या जूल–थॉमसन प्रक्रम कहते हैं। कक्ष ताप पर हाइड्रोजन, हीलियम तथा निऑन को छोड़कर सभी गैसें छिद्र से अवरोधित होकर प्रसार करने पर ठंडी हो जाती हैं; ये तीन गैसें भी यही प्रभाव दर्शाती हैं परंतु केवल निम्न तापों पर। हाइड्रॉलिक तेल जैसे अधिकांश द्रव जूल-थॉमसन अवरोधन प्रक्रम से गर्म हो जाते हैं।
गैस को ठंडा करने वाला यह अवरोधन प्रक्रम प्रशीतन प्रक्रमों जैसे एयर कंडीशनर, ऊष्मा पंप तथा द्रवीकारकों में सामान्यतः प्रयुक्त होता है। हाइड्रॉलिक्स में जूल-थॉमसन अवरोधन से उत्पन्न ऊष्मन प्रभाव का उपयोग आंतरिक रूप से रिसने वाले वाल्वों को खोजने में किया जा सकता है, क्योंकि इनसे उत्पन्न ऊष्मा को तापयुग्म या तापीय प्रतिबिंबन कैमरे द्वारा संसूचित किया जा सकता है। अवरोधन मूलतः एक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम है। आपूर्ति लाइनों, ऊष्मा विनिमयकों, पुनर्जनकों तथा (तापीय) मशीनों के अन्य घटकों में प्रवाह प्रतिरोध के कारण होने वाला अवरोधन हानियों का स्रोत है जो निष्पादन को सीमित करता है।