200g जल में 50 g प्रतिहिम (एथिलीन ग्लाइकॉल) मिलाया जाता है। कितनी मात्रा में बर्फ पृथक् होगी
-9.3°C पर। (Kf = 1.86 K Kg mol-1) :-
ΔTf = 1000 Kf w ⇒ 9.3 = 1000 x 1.86 x 50
mW 62 x W
⇒ W= 161.29g
पृथक् हुई बर्फ= 200-161.29= 38.71g
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200g जल में 50 g प्रतिहिम (एथिलीन ग्लाइकॉल) मिलाया जाता है। कितनी मात्रा में बर्फ पृथक् होगी
-9.3°C पर। (Kf = 1.86 K Kg mol-1) :-
ΔTf = 1000 Kf w ⇒ 9.3 = 1000 x 1.86 x 50
mW 62 x W
⇒ W= 161.29g
पृथक् हुई बर्फ= 200-161.29= 38.71g
40 g NaOH (i=2) को 1L वाष्पशील विलायक में घोला जाता है; इस विलयन का वाष्प दाब 300K पर इसकी ठोस प्रावस्था के बराबर हो जाता है। शुद्ध विलायक का हिमांक क्या है।
(घनत्व = 1g/mL) (kf=1.8 k kgmol-1)
Tf = iKfm
Tf - 300 = 2x1.8x(40/40)/1
Tf = 303.6K
1400 g विलायक में 100 g विलेय घोला जाता है। परिणामी विलयन का घनत्व 1.5 g/mL है। इसकी मोलरता तथा मोललता का अनुपात होगा :-
विलयन की मोलरता विलेय के मोलों की संख्या को लीटर में विलयन के आयतन से भाग देकर प्राप्त होती है। मोललता विलेय के मोलों की संख्या को किलोग्राम में विलायक के द्रव्यमान से भाग देकर प्राप्त होती है। चूँकि विलयन का घनत्व 1.5 g/mL है, अतः मोलरता तथा मोललता का अनुपात (1.5 g/mL) / (1000 g/kg) = 1.4 होगा।
जब स्कूबा गोताखोर जल के भीतर से जल की सतह की ओर आते हैं, तो उनके रक्त में गैसों की विलेयता :-
हेनरी के नियम के अनुसार, विलेयता आंशिक दाब के अनुक्रमानुपाती होती है।
Ag2SO4 के संतृप्त विलयन में क्वथनांक में 0.003K की वृद्धि होती है, Ksp होगा :(Kb = 5 K kg mol-1)(1m=1M)
Tb = iKbm
0.003=3x5xS
S=2x10-4
Ksp = 4S3=3.2x10-11
जब मूलानुपाती सूत्र CH2O वाले विलेय के 36 g को 1.2 kg जल में घोला जाता है, तो विलयन जमता है
-0.93°C पर। विलेय का अणुसूत्र क्या है (Kf = 1.86 kg K mol-1)
ΔTf= i Kf m
0.93= 1 x 1.86 x 36/M ; M=60
1.2
0.03659 g/ml HCl युक्त एक विलयन तथा 0.04509 g/ml ऐसीटिक अम्ल युक्त एक विलयन। तब:
NHCl=
1000 g जल में किसी पदार्थ के 71.3 g घोलने से उत्पन्न वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन 7.13 X 10-3 है। पदार्थ का आण्विक द्रव्यमान है :-
1 मोल तथा 2 मोल के मिश्रण का कुल वाष्प दाब 200 torr है। इस स्थिति में:
मिश्रण का कुल वाष्प दाब शुद्ध घटकों के वाष्प दाबों के योग (A के लिए 150 torr तथा B के 2 मोल के लिए 240 torr) से कम है, जो राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन दर्शाता है। इससे संकेत मिलता है कि A तथा B अणुओं के बीच आकर्षी अंतराअणुक बल हैं, जिससे वाष्प दाब अपेक्षा से कम हो जाता है।
जब 0.1 m CH3COOH किसी विलायक में उपस्थित हो तो यह 0.75 का क्वथनांक उन्नयन दर्शाता है। अम्ल वियोजन स्थिरांक होगा -(Kb=5 K Kg mol-1) (1M =1m)
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