जल के लिए मोलल हिमांक स्थिरांक 1.86°C/m है। अतः जल में 0.1 m NaCl विलयन का हिमांक होना अपेक्षित है [MLNR 1994]
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जल के लिए मोलल हिमांक स्थिरांक 1.86°C/m है। अतः जल में 0.1 m NaCl विलयन का हिमांक होना अपेक्षित है [MLNR 1994]
यूरिया, सोडियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के 0.01 M जलीय विलयनों के हिमांक में अवनमन का अनुपात है [Roorkee 1990; DCE 1994]
0.01 M यूरिया, NaCl तथा के कणों की सांद्रता क्रमशः इस प्रकार है, अर्थात् वे 1 : 2 : 3 के अनुपात में हैं। अतः हिमांक में अवनमन भी उसी अनुपात में होगा।
0.1 M विलयन के लिए वान्ट हॉफ गुणांक 2.74 है। वियोजन की मात्रा है [IIT 1999]
⇌
अथवा
अभिकथन : दो द्रवों के द्विअंगी विलयन के संदर्भ में पूर्णतः आदर्श विलयन संभव नहीं है।
कारण : कोई भी दो पदार्थ अंतराआण्विक बलों की ठीक एक जैसी प्रकृति तथा एक ही परिमाण नहीं रख सकते।
(A) अभिकथन सत्य है, कारण सत्य है तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
अभिकथन : जब किसी कोशिका को अतिपरासरणदाबी विलयन में रखा जाता है, तो वह सिकुड़ जाती है।
कारण : जल के विलवणीकरण के लिए प्रतिलोम परासरण का उपयोग किया जाता है।
(B) अभिकथन सही है क्योंकि कोशिका के भीतर वाष्प दाब बाहर की अपेक्षा अधिक होने से कोशिका के अंदर उपस्थित तरल बाहर आ जाते हैं।
कारण सही है क्योंकि प्रतिलोम परासरण में लवणीय जल से विलायक अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर शुद्ध विलायक में जाता है।
अभिकथन : HCl तथा HF के समान मोलर विलयनों के क्वथनांकों का अंतर उनकी
मोलरता घटाने पर घटता है।
कारण : बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार घटती है।
(C) बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार बढ़ती है।
अभिकथन : जब 0.1 मोलल यूरिया विलयन के 'a' mL को 0.1 मोलल ग्लूकोस विलयन के 'b' mL के साथ मिलाया जाता है, तो विलयन का क्वथनांक मिलाने से पहले के नमूनों के क्वथनांकों से भिन्न नहीं होता, परन्तु यदि 0.1 मोलल यूरिया के 'a' mL को 0.1 मोलल HF के 'b' mL के साथ मिलाया जाए तो मिश्रण का क्वथनांक अलग-अलग नमूनों के क्वथनांकों से भिन्न होता है।
कारण : HF एक दुर्बल विद्युत्-अपघट्य है जबकि ग्लूकोस अविद्युत्-अपघट्य है।
(A) क्योंकि तनुकरण पर HF के वियोजन की मात्रा बदल जाती है।
नीचे एक विद्युत्-रासायनिक सेल दिखाया गया है : Pt, H2(1 atm)| HCl (0.1 M)CH3COOH (0.1 M)| H2(1 atm), Pt । इस सेल का विद्युत्-वाहक बल शून्य नहीं होगा, क्योंकि
(b) सेल का विद्युत्-वाहक बल शून्य नहीं होगा क्योंकि दोनों विद्युत्-अपघट्य विलयनों में H+ आयनों की सांद्रता भिन्न है। HCl प्रबल अम्ल है जबकि ऐसीटिक अम्ल दुर्बल अम्ल है और वे भिन्न pH देते हैं।
KNO3 का संतृप्त विलयन 'लवण सेतु' बनाने के लिए प्रयुक्त होता है क्योंकि :
(c) लवण सेतु में ऐसा विद्युत्-अपघट्य होता है जिसके धनायन तथा ऋणायन की आयनिक गतिशीलताएँ लगभग समान होती हैं।
श्रेणीक्रम में जुड़े दो वोल्टामीटरों में से धारा प्रवाहित की जाती है। पहले वोल्टामीटर में XSO4(aq) है जबकि दूसरे वोल्टामीटर में Y2SO4(aq) है। X तथा Y के आपेक्षिक परमाणु द्रव्यमानों का अनुपात 2:1 है। मुक्त हुए X के द्रव्यमान तथा मुक्त हुए Y के द्रव्यमान का अनुपात है :
(a) प्रत्येक के समान तुल्यांक मुक्त होते हैं।
X के तुल्यांक = Y के तुल्यांक
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