यदि लोहे की एक छड़ को CuSO4 विलयन में डुबोया जाए, तो :
विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में Fe, Cu से ऊपर है और इस प्रकार यह CuSO4 से Cu को मुक्त कर देता है।
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यदि लोहे की एक छड़ को CuSO4 विलयन में डुबोया जाए, तो :
विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में Fe, Cu से ऊपर है और इस प्रकार यह CuSO4 से Cu को मुक्त कर देता है।
अपनी सांद्रता खोए बिना ZnCl2 विलयन को किसके संपर्क में नहीं रखा जा सकता।
(b) विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में Al, Zn से ऊपर स्थित है तथा शेष सभी Zn से नीचे हैं। अतः ऐलुमिनियम ZnCl2 विलयन से जिंक को विस्थापित कर देता है। इसलिए इसे Al के संपर्क में नहीं रखा जा सकता।
Al2O3 का अपचयन कम विभव तथा उच्च धारा पर विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है। यदि पिघले हुए Al2O3 में से 6 h तक 4.0 x 104 A धारा प्रवाहित की जाए, तो कितने द्रव्यमान का ऐलुमिनियम उत्पन्न होगा? (धारा दक्षता 100% मानिए, Al का परमाणु द्रव्यमान = 27g mol-1)
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम :
w = 2 x Q
निम्नलिखित अर्ध-अभिक्रियाओं के लिए 290 K पर मानक अपचयन विभव हैं,
(i) Zn2+ + 2e— → Zn(s); E° = -0.762 V
(ii) Cr3+ + 3e → Cr(s); E° = -0.740 V
(iii) 2H+ + 2e → H2(g); · E° = -0.000 V
(iv) Fe3+ + e → Fe2+; E° = +0.77V
प्रबलतम अपचायक कौन-सा है?
(a) Zn का अधिक धनात्मक E°OP है और इस प्रकार इसमें ऑक्सीकृत होने तथा अपचायक की भाँति कार्य करने की अधिक प्रवृत्ति होती है।
लोहे से बने जहाज़ की तली की सुरक्षा का सबसे सुविधाजनक तरीका है
यह जंग लगने से रोकता है क्योंकि यह कैथोडिक संरक्षण प्रदान करता है (b) तथा जल एवं लवण की क्रिया रोकता है। जहाज़ की तली में मैग्नीशियम के कई ब्लॉक लगाए जाते हैं। मैग्नीशियम अपने हल्केपन, ऑक्सीजन के प्रति अधिक बंधुता तथा दृढ़ता के कारण जहाज़ में प्रयुक्त होता है
इलेक्ट्रोड विभव
के लिए क्रमशः +0.15 V तथा +0.50 V हैं। का मान होगा
(a)
जब MnO2-4 का 0.1 मोल ऑक्सीकृत होता है, तो MnO2-4 को पूर्णतः MnO-4 में ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक विद्युत् की मात्रा है
Zn, लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए बलिदानी अथवा कैथोडिक संरक्षण का कार्य करता है क्योंकि :
(b) लोहे के स्थान पर Zn ऑक्सीकृत होता है तथा यदि लोहे पर Zn की परत चढ़ाई जाए अर्थात् गैल्वनीकरण किया जाए तो लोहा कैथोड की भाँति कार्य करता है, इसीलिए इसे बलिदानी संरक्षण भी कहते हैं।
प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच तनु H2SO4 के विलयन का विद्युत्-अपघटन करने पर ऐनोड तथा कैथोड पर मुक्त होने वाली गैसें क्रमशः हैं :
(c)
Cu(II) लवण के विलयन में से 2 फैराडे विद्युत् प्रवाहित करने पर कितने द्रव्यमान का कॉपर निक्षेपित होगा?
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम
इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित भार इस प्रकार दिया जाता है
w= z x Q
w = Z x 2 x 96500 [1 F=96500 c]
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