NaCl के विद्युत्-अपघटन में जब Pt इलेक्ट्रोड लिया जाता है तो कैथोड पर H2 मुक्त होती है, जबकि Hg कैथोड के साथ यह सोडियम अमलगम बनाता है, क्योंकि
(b) जल में सोडियम क्लोराइड इस प्रकार वियोजित होता है
NaCl Na+ + Cl-
H2O H+ + OH-
जब प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों का उपयोग करके इस विलयन में से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो Na+ तथा H+ कैथोड की ओर जाते हैं जबकि Cl- तथा OH- आयन ऐनोड की ओर जाते हैं।
कैथोड पर
H+ + e- H
H+H H2
ऐनोड पर
Cl- C1 + e-
Cl + Cl Cl2
यदि पारद को कैथोड के रूप में प्रयुक्त किया जाए, तो पारद कैथोड पर H+ आयन निर्वहित नहीं होते क्योंकि पारद का हाइड्रोजन अति-विभव उच्च होता है। H+ आयनों की अपेक्षा Na+ आयन कैथोड पर निर्वहित होकर सोडियम देते हैं, जो पारद में घुलकर सोडियम अमलगम बनाता है।