निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
यह कथन कि SeF4 तथा CH4 की आकृति समान है, गलत है। SeF4 की आकृति सी-सॉ (विकृत चतुष्फलकीय) है, जबकि CH4 चतुष्फलकीय है। दिए गए अन्य कथन सही हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
यह कथन कि SeF4 तथा CH4 की आकृति समान है, गलत है। SeF4 की आकृति सी-सॉ (विकृत चतुष्फलकीय) है, जबकि CH4 चतुष्फलकीय है। दिए गए अन्य कथन सही हैं।
जब कॉपर को सांद्र HNO3 के साथ गर्म किया जाता है तो प्राप्त होता है
(d) कॉपर से अभिक्रिया करते समय नाइट्रिक अम्ल ऑक्सीकारक का कार्य करता है। जब तनु HNO3 अभिक्रिया करता है, तो अभिक्रिया इस प्रकार होती है:
तथा जब सांद्र HNO3 का उपयोग किया जाता है, तो अभिक्रिया इस प्रकार होती है
स्तंभ I में दिए गए यौगिकों का स्तंभ II में दिए गए संकरण तथा आकृति से मिलान कीजिए तथा सही विकल्प चुनिए।
स्तंभ I स्तंभ II
A. XeF6 1. विकृत अष्टफलकीय
B. XeO3 2. वर्ग समतलीय
C. XeOF4 3. पिरामिडी
D. XeF4 4. वर्ग पिरामिडी
कोड
A B C D
दिए गए अम्लों के लिए कौन-सा कथन सही है?
निम्नलिखित में से किसमें नाइट्रोजन पर अधिकतम बंध कोण होता है?
स्पीशीज़ संकरण बंध कोण
NO2 sp 120°
NO2- sp2 115.4°
NO2+ sp(linear) 180°
NO3- sp2 120°
अतः No2+ का बंध कोण अधिकतम है।
हाइड्रोजन हैलाइडों के क्वथनांक का क्रम HF > HI > HBr > HCl है। हाइड्रोजन फ्लुओराइड के उच्च क्वथनांक की व्याख्या क्या है?
चूँकि HF अणुओं के बीच प्रबल हाइड्रोजन बंधन होता है, अतः HF का क्वथनांक सर्वाधिक है।
HF > HI > HBr > HI
जलीय विलयनों में द्विप्रोटॉनी अम्लों की अम्लता किस क्रम में बढ़ती है:-
(a) केंद्रीय परमाणु का आकार बढ़ने पर हाइड्राइडों की अम्लीय प्रबलता बढ़ती है, क्योंकि इससे M-H बंध दुर्बल हो जाता है। चूँकि S से Te तक आकार बढ़ता है, अतः अम्लीय प्रबलता का क्रम है
H2S<H2Se<H2Te
सल्फाइडों के भर्जन से उपोत्पाद के रूप में गैस X प्राप्त होती है। यह जली हुई सल्फर की दम घोंटने वाली गंध वाली रंगहीन गैस है और अम्लीय वर्षा के परिणामस्वरूप श्वसन अंगों को भारी क्षति पहुँचाती है। इसका जलीय विलयन अम्लीय है, यह अपचायक का कार्य करती है और इसका अम्ल कभी पृथक नहीं किया जा सका है। गैस X है
(b) जब किसी सल्फाइड अयस्क का भर्जन किया जाता है तो SO2 गैस प्राप्त होती है।
2M2S + 3O2 2M2O + 2SO2
यह गैस प्रश्न में दिए गए सभी अभिलक्षण प्रदर्शित करती है।
जब Cl2 गैस गर्म तथा सांद्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन से अभिक्रिया करती है, तो क्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या बदलती है
जब Clâ‚‚ गैस गर्म तथा सांद्र NaOH विलयन से अभिक्रिया करती है, तो क्लोरीन का विषमानुपातन होता है। इसकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ 0 से -1 (NaOCl में) तथा 0 से +5 (NaClO₃ में) में बदल जाती हैं। इस विषमानुपातन अभिक्रिया का उपयोग विरंजक चूर्ण के निर्माण में किया जाता है।
हाइड्रोजन तथा आयोडीन मोनोक्लोराइड की अभिक्रिया इस प्रकार दी गई है :
H2(g)+ 2ICl(g) 2HCl(g)+ I2(g)
यह अभिक्रिया H2(g) तथा 2ICl(g) के सापेक्ष प्रथम कोटि की है; निम्नलिखित क्रियाविधियाँ प्रस्तावित की गईं:
क्रियाविधि A:
H2(g)+ 2ICl(g) 2HCl(g)+ I2(g)
क्रियाविधि B :
H2(g)+ ICl(g) HCl(g)+ HI(g) ; धीमी
HI(g)+ ICl(g) HClCg) + I2(g); तेज
उपरोक्त में से कौन-सी क्रियाविधि(याँ) अभिक्रिया के बारे में दी गई जानकारी के अनुरूप हो सकती है/हैं ?
अभिक्रिया की दर सदैव धीमी अभिक्रिया पर निर्भर करती है।
H2(g)+ 2ICl(g) 2HCl(g)+ I2(g) अभिक्रिया H2 तथा I2 के सापेक्ष प्रथम कोटि की है और इसे क्रियाविधि A तथा B दोनों की सहायता से मापा जा सकता है।
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