मुख्य विचार : अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या जितनी अधिक होगी, अनुचुंबकत्व उतना ही अधिक होगा।
[V(gly)2 (OH)2(NH3)2]+ V23 = [Ar] 4s2, 3d3 V की ऑक्सीकरण अवस्था [V(gly)2 (OH)2(NH3)2]+ में है :
x + (-l)x2 + (-l)x2 + (0)x2 = +1
x =+5
Vs+ =[Ar]3d° (कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं)
[Fe(en)(bpy)(NH3)2)2+ Fe26 =[Ar]4s2, 3d6
Fe की ऑक्सीकरण अवस्था [Fe(en) (bpy) (NH3)2]2+ में है :
x + (0) + (0) + (0) x 2 = +2
x=+2
Fe2+ = [Ar]3d6
परन्तु en, bpy तथा NH3 सभी प्रबल क्षेत्र लिगेंड हैं, अतः युग्मन हो जाता है और कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं रहता। [Co(OX)2(OH)2]-
CO27 = [Ar]4s2, 3d7
Co की ऑक्सीकरण अवस्था[CO(OX)2(OH)2]- में है :
x + (- 2) x 2+ (-1) x 2 = -1
x-6=-1
X =+ 5
CO5+ = [Ar]3d4 (4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)
[Ti(NH3)6]3+
Ti22 =[Ar]4s2, 3d2
[Ti(NH3)6]3+ में Ti की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है, अतः इसमें 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
अतः [Co(OX)2(OH)2]- उच्चतम अनुचुंबकीय व्यवहार दर्शाता है।