रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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[Co(NH3)4Cl2]+ संघटन वाले दो भिन्न रंगों के संकुलों का अस्तित्व किसके कारण है :-

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Explanation

[Co(NH3)4Cl2]+ के दो भिन्न रंगों वाले समावयवियों का अस्तित्व ज्यामितीय समावयवता के कारण है। एक समावयवी की ज्यामिति वर्ग समतलीय है जबकि दूसरे की चतुष्फलकीय, जिससे भिन्न d-d संक्रमण तथा फलतः भिन्न रंग प्राप्त होते हैं।

निम्नलिखित में से कौन ध्रुवण समावयवता नहीं दर्शाता ? 

(en-एथिलीनडाइऐमीन)

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(b) ध्रुवण समावयवता केवल उन्हीं संकुलों द्वारा दर्शाई जाती है जिनमें सममिति तत्व अनुपस्थित हों। [M(aa)3], [M(aa)X2,Y2] तथा [M(aa)2X2] प्रकार के अष्टफलकीय संकुलों में सममिति तत्व अनुपस्थित होते हैं, अतः ये ध्रुवण समावयवता दर्शाते हैं। यहाँ aa द्विदंतुक लिगेंड, x या y एकदंतुक लिगेंड तथा M केंद्रीय धातु आयन को निरूपित करते हैं।

अतः सममिति तत्वों की उपस्थिति के कारण [Co(NH3)3Cl3]0 ध्रुवण समावयवता नहीं दर्शाता।

निम्नलिखित में से कौन-सा संकुल उच्चतम अनुचुंबकीय व्यवहार दर्शाता है?

जहाँ gly = ग्लाइसीन, en = एथिलीनडाइऐमीन तथा bpy = बाइपिरिडिल मूलक हैं

(परमाणु क्रमांक : Ti = 22, V = 23, Fe= 26, Co = 27)

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मुख्य विचार : अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या जितनी अधिक होगी, अनुचुंबकत्व उतना ही अधिक होगा।

[V(gly)2 (OH)2(NH3)2]+ V23 = [Ar] 4s2, 3d3 V की ऑक्सीकरण अवस्था [V(gly)2 (OH)2(NH3)2]+  में है :

x + (-l)x2 + (-l)x2 + (0)x2 = +1

x =+5

Vs+ =[Ar]3d° (कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं)

[Fe(en)(bpy)(NH3)2)2+  Fe26 =[Ar]4s2, 3d6

Fe की ऑक्सीकरण अवस्था [Fe(en) (bpy) (NH3)2]2+ में है :

x + (0) + (0) + (0) x 2 = +2

x=+2

Fe2+ = [Ar]3d6

परन्तु en, bpy तथा NH3 सभी प्रबल क्षेत्र लिगेंड हैं, अतः युग्मन हो जाता है और कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं रहता। [Co(OX)2(OH)2]-

CO27 = [Ar]4s2, 3d7 

Co की ऑक्सीकरण अवस्था[CO(OX)2(OH)2]- में है :

x + (- 2) x 2+ (-1) x 2 = -1

x-6=-1

X =+ 5

CO5+ = [Ar]3d4 (4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन)

[Ti(NH3)6]3+

Ti22 =[Ar]4s2, 3d2

[Ti(NH3)6]3+ में Ti की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है, अतः इसमें 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।

अतः [Co(OX)2(OH)2]- उच्चतम अनुचुंबकीय व्यवहार दर्शाता है।

निम्नलिखित में से किस उपसहसंयोजन इकाई में  oct (अष्टफलकीय क्षेत्र में CFSE) का परिमाण अधिकतम होगा?
(परमाणु क्रमांक Co = 27)

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(c) मुख्य विचार: oct (कक्षक विपाटन ऊर्जा) का परिमाण लिगेंड की प्रकृति से निर्धारित होता है। प्रबल क्षेत्र लिगेंड का oct सर्वाधिक होता है। क्षेत्र प्रबलता का बढ़ता क्रम है

I-<Br-<Cl-<F-<OH-<H2O<C2O42-<NH3<en<NO2-<CN-

इनमें CN प्रबलतम लिगेंड है, अतः oct का परिमाण अधिकतम होगा
इसमें : [Co(CN)6]3-.

नोट : oct का परिमाण धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था से भी निर्धारित होता है। अतः केंद्रीय धातु आयन पर आयनिक आवेश जितना अधिक होगा, उतना ही अधिक होगा मान oct। परन्तु यहाँ
Co धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था सभी संकुलों में समान है।

कॉपर सल्फेट KCN के आधिक्य में घुलकर देता है :

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(b) कॉपर सल्फेट KCN के साथ अभिक्रिया करके पहले क्यूप्रिक सायनाइड का अवक्षेप देता है जो अपचयित होकर Cu2CN2 बनाता है तथा KCN के आधिक्य में घुलकर विलेय K3[Cu(CN)4] संकुल लवण देता है

CuSO4 + 2KCN                CuCN2   + K2SO4 × 2                                           Cupric cyanide2CuCN2               Cu2CN2 +    NC-CN                                                            cyanogenCu2CN2 + 6KCN               2K3CuCN4                                               soluble complex salt______________________________________________2CuSO4 + 10KCN     2K3CuCN4+2K2SO4 +CN2

[Co(NH3)4(NO2)2]Cl दर्शाता है:

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अमोनिया क्षारीय विलयन में कॉपर आयनों के साथ संकुल Cu(NH3)42+ बनाती है परन्तु अम्लीय विलयन में नहीं। इसका कारण है :

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(d) Cu2+(aq)+4NH3OH-Cu(NH3)42+Cu2+(aq)+4NH3 H+Cu2++4NH4+ 

(कोई संकुल निर्माण नहीं)

चूँकि NH3 संयोग करता है H+ से और बदल जाता है NH4+ में, जिसमें कोई दाता स्थल नहीं होता।

निम्नलिखित में से कौन ऑक्सीकारक है?

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(a) Mn(CO)s+e  -Mn(CO)s-less stable           more stable,as EAN of Mn=36(Kr)(O.A.)        

किसी संकुल आयन का चुंबकीय आघूर्ण 2.83 BM है। वह संकुल आयन है

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संकुलों के निम्नलिखित युग्मों में से किस स्थिति में 0 मान पहले वाले के लिए अधिक है ?

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(d) संकुलों Rh(H2O)63+ and Co(H2O)63+ में केंद्रीय धातु धनायनों की ऑक्सीकरण अवस्था तथा लिगेंड समान हैं और वे एक ही वर्ग में आते हैं, परन्तु 0 का Rh(H2O)63+>0 of Co(H2O)63+ क्योंकि Rh3+ का Zeff मान CO3+ से अधिक है।

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