ईथर अणु में C-O-C कोण का मान है:-
(d) आबंध कोण 110° है, जो स्थूल ऐल्किल समूहों की त्रिविम बाधा के कारण है।
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ईथर अणु में C-O-C कोण का मान है:-
(d) आबंध कोण 110° है, जो स्थूल ऐल्किल समूहों की त्रिविम बाधा के कारण है।
पायरोलिग्नियस अम्ल में होता है:
(a) काष्ठ के भंजक आसवन से प्राप्त पायरोलिग्नियस अम्ल में मुख्यतः ऐसीटिक अम्ल (9 10%), मेथिल ऐल्कोहॉल (2-25%) तथा लगभग 0.5% ऐसीटोन होता है; अन्य आसवन उत्पाद काष्ठ गैस, काष्ठ चारकोल तथा काष्ठ तारकोल हैं।
किसी ऐल्डिहाइड को Zn/HCl के साथ उपचारित करने पर प्राप्त होता है:
(a) CH3CHOCH3CH2OH
प्रचंड परिस्थितियों में सभी ऐल्कोहॉल कार्बोक्सिलिक अम्लों में ऑक्सीकृत किए जा सकते हैं, परंतु निम्नलिखित ऐल्कोहॉल समान संख्या में कार्बन परमाणुओं वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल देते हैं:
(a) CH3.CH2OH CH3COOH; द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल कम कार्बन परमाणुओं वाले अम्ल देते हैं।
CH3OH, C2H5OH तथा C3H7OH के लिए विषाक्तता का क्रम है:
(c) मेथेनॉल की विषाक्तता अधिकतम होती है, एथेनॉल की न्यूनतम।
आयोडीन के टिंक्चर में उपस्थित कार्बनिक यौगिक है:
(a) आयोडीन का टिंक्चर ऐल्कोहॉल में I2 का विलयन है।
हाइड्रोजन हैलाइड के साथ किसी ऐरिल-ऐल्किल ईथर के विदलन से प्राप्त होगा:
(d) C6H5OR C6H5OH + C2H5Br
वुड स्पिरिट है:
(a) काष्ठ के भंजक आसवन से पायरोलिग्नियस अम्ल प्राप्त होता है, जिससे प्रभाजी आसवन द्वारा CH3OH प्राप्त किया जाता है।
ईथर की आग किसके द्वारा बुझाई जा सकती है:
(d) इनमें से किसी का भी उपयोग ईथर की आग बुझाने के लिए किया जा सकता है।
फीनॉल है:
(c) फीनॉल दुर्बल अम्ल है।
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