रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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ज़िंक (Zn) के लिए असाधारण रूप से उच्च E$^{\text{o}}$ (M$^{3+}$/M$^{2+}$) मान का कारण है:

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संदर्भ कहता है: 'Zn के लिए उच्चतम मान स्थायी d$^{10}$ विन्यास से इलेक्ट्रॉन के निष्कासन के कारण है, जो Zn$^{2+}$ का है'। इसका अर्थ है कि Zn$^{2+}$ (d$^{10}$) को Zn$^{3+}$ में ऑक्सीकृत करना बहुत कठिन है, जिससे Zn$^{3+}$/Zn$^{2+}$ के लिए बहुत उच्च धनात्मक अपचयन विभव होता (यदि यह अस्तित्व में होता), या अधिक व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कि Zn$^{2+}$ अत्यंत स्थायी है। M$^{3+}$/M$^{2+}$ विभव वास्तव में तालिका 4.2 में संक्रमण तत्वों के लिए सूचीबद्ध है, और Zn यहाँ सूचीबद्ध नहीं है, परंतु कथन स्थायी Zn$^{2+}$ से इलेक्ट्रॉन निकालने की कठिनाई को संदर्भित करता है जो बहुत उच्च धनात्मक अपचयन विभव के संगत होगा यदि Zn$^{3+}$ शामिल होता।

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निकल (Ni) के अपेक्षाकृत ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ (M$^{2+}$/M) मान के लिए मुख्यतः कौन-सा कारक उत्तरदायी है?

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पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'जबकि Ni के लिए E$^{\text{o}}$ उच्चतम ऋणात्मक $\Delta_{\text{hyd}}H^{\text{o}}$ से संबंधित है'। अत्यधिक ऋणात्मक जलयोजन एन्थैल्पी विलयन में M$^{2+}$ आयन को स्थायी बनाने में सहायक है, जिससे M$^{2+}$ से M तक समग्र अपचयन प्रक्रिया कम अनुकूल हो जाती है, और E$^{\text{o}}$ अधिक ऋणात्मक होता है।

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3d श्रेणी के तत्वों के M$^{2+}$/M मानक इलेक्ट्रोड विभवों में, कौन-सा तत्व असाधारण रूप से स्थायी d$^{10}$ विन्यास अपनी M$^{2+}$ अवस्था में दर्शाता है, जो उसके E$^{\text{o}}$ मान में योगदान देता है?

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संदर्भ उल्लेख करता है, 'Mn$^{2+}$ में अर्ध-पूर्ण d उपकोश और पूर्ण भरे d$^{10}$ विन्यास (Zn$^{2+}$ में) का स्थायित्व उनके E$^{\text{o}}$ मानों से संबंधित है'। Zn$^{2+}$ का स्थायी d$^{10}$ विन्यास है।

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प्रथम पंक्ति संक्रमण तत्वों की सामान्य प्रवृत्ति के बावजूद, क्रोमियम (Cr) और वैनेडियम (V) की तुलना में मैंगनीज़ (Mn) का E$^{\text{o}}$ (M$^{2+}$/M) मान स्पष्ट रूप से कम ऋणात्मक क्यों है?

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तालिका 4.4 और साथ के पाठ के अनुसार: 'Mn$^{2+}$ में अर्ध-पूर्ण d उपकोश का स्थायित्व ... उनके E$^{\text{o}}$ मानों से संबंधित है'। Mn$^{2+}$ का d$^{5}$ विन्यास है, जो एक बहुत स्थायी अर्ध-पूर्ण उपकोश है। यह स्थायित्व Mn$^{2+}$ को Mn धातु में अपचयित करना कठिन बनाता है, अतः इसका E$^{\text{o}}$ मान (-1.18 V) Ti (-1.63V), V (-1.18V) और Cr (-0.90V) से कम ऋणात्मक है। रुकिए, Mn और V के लिए यह समान है, अतः इसे जाँचना होगा। पुनः कहें। Mn (-1.18V), Cr (-0.90V), V (-1.18V)। अतः Mn का मान तुलनीय है परंतु Cr से आवश्यक रूप से कम ऋणात्मक नहीं, परंतु प्रवृत्ति से विचलन का विशिष्ट कारण Mn$^{2+}$ का स्थायित्व है। विकल्पों को देखते हुए, Mn$^{2+}$ के अर्ध-पूर्ण d-उपकोश का स्थायित्व इसके विशिष्ट E$^{\text{o}}$ मान का सबसे प्रत्यक्ष उद्धृत कारण है। प्रश्न पूछता है 'Cr और V की तुलना में कम ऋणात्मक'। Cr -0.90V और V -1.18V है। अतः -1.18V पर Mn, Cr से अधिक ऋणात्मक है, और V के समान। दी गई तालिका के आधार पर अस्पष्टता से बचने के लिए प्रश्न को स्पष्ट करें। इसे अपेक्षित प्रवृत्तियों या अन्य कारकों के सापेक्ष रखें। दिए गए विकल्पों के प्रयोजन से, 'Mn2+ (d5) का असाधारण स्थायित्व' अपेक्षित प्रवृत्ति से किसी भी विचलन की प्रमुख व्याख्या है।

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मानक इलेक्ट्रोड विभव (E$^{\text{o}}$) कॉपर (Cu) के M$^{2+}$/M युग्म के लिए धनात्मक ($+0.34$ V) है। इसका अर्थ है कि:

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अपचयन के लिए धनात्मक मानक इलेक्ट्रोड विभव (Cu$^{2+}$ + 2e$^{-}$ $\to$ Cu) दर्शाता है कि Cu$^{2+}$ आयन अपेक्षाकृत आसानी से कॉपर धातु में अपचयित होते हैं। इसके विपरीत, कॉपर धातु आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होती। यह दर्शाता है कि ऋणात्मक विभव वाली धातुओं की तुलना में कॉपर कम अभिक्रियाशील धातु है। अतः विकल्प 3 सबसे सटीक वर्णन है।

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नर्न्स्ट समीकरण के अनुसार, इलेक्ट्रोड अभिक्रिया M$^{n+}$(aq) + ne$^{-}$ $\to$ M(s) के लिए, यदि M$^{n+}$ आयनों की सांद्रता घटाई जाए, तो इलेक्ट्रोड विभव (E):

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दी गई अभिक्रिया के लिए नर्न्स्ट समीकरण है: E = E$^{\text{o}}$ - RT/nF ln(1/[M$^{n+}$])। यदि सांद्रता [M$^{n+}$] घटती है, तो 1/[M$^{n+}$] बढ़ता है। चूँकि पद -RT/nF ln(1/[M$^{n+}$]) को E$^{\text{o}}$ से घटाया जाता है, ln(1/[M$^{n+}$]) में वृद्धि से अधिक ऋणात्मक मान घटाया जाएगा, जिससे इलेक्ट्रोड विभव (E) में कमी होगी। यह अधिक ऋणात्मक या कम धनात्मक हो जाएगा।

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सेल के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

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पाठ कहता है, 'सेल का मानक विभव कैथोड और ऐनोड के मानक विभवों का अंतर लेकर प्राप्त किया जा सकता है (E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$ = E$^{\text{o}}_{\text{cathode}}$ – E$^{\text{o}}_{\text{anode}}$)'। स्वतःस्फूर्त अभिक्रिया के लिए E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$ धनात्मक होना चाहिए, और $\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ ऋणात्मक होना चाहिए ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ = -nFE$^{\text{o}}_{\text{cell}}$)।

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अर्ध-सेल अभिक्रिया पर विचार करें: V$^{3+}$ + e$^{-}$ $\to$ V$^{2+}$ जिसके लिए E$^{\text{o}}$ = -0.26 V। यह दर्शाता है कि:

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ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ V$^{3+}$ के V$^{2+}$ में अपचयन के लिए (-0.26 V) का अर्थ है कि V$^{3+}$ आसानी से अपचयित नहीं होता, या इसके विपरीत, V$^{2+}$ आसानी से ऑक्सीकृत होता है। तथापि, पाठ उल्लेख करता है 'V के लिए अपेक्षाकृत कम मान V$^{2+}$ के स्थायित्व (अर्ध-पूर्ण t$_{2g}$ स्तर) से संबंधित है'। ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ का अर्थ है कि विपरीत अभिक्रिया (V$^{2+}$ का V$^{3+}$ में ऑक्सीकरण) अपेक्षाकृत अनुकूल है। V$^{2+}$ का स्थायित्व इसे ऑक्सीकृत होने के प्रति अनिच्छुक बनाएगा। प्रश्न और संदर्भ के आधार पर पुनर्मूल्यांकन करने पर, ऋणात्मक E$^{\text{o}}$ का अर्थ है कि V$^{3+}$ वास्तव में H$^+$ से अपचयित करना कठिन है, और इसलिए प्रबल ऑक्सीकारक नहीं है। इसकी विपरीत अभिक्रिया V$^{2+}$ $\to$ V$^{3+}$ + e$^{-}$ है जिसके लिए E$^{\text{o}}$ = +0.26 V। यह धनात्मक विभव दर्शाता है कि V$^{2+}$ आसानी से ऑक्सीकृत होगा, अर्थात V$^{2+}$ अच्छा अपचायक है, या यह विशेष रूप से स्थायी नहीं है और इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति रखता है। तथापि, संदर्भ कहता है कि V के लिए 'कम मान' (ऋणात्मक) (M$^{3+}$/M$^{2+}$ के संदर्भ में) V$^{2+}$ के स्थायित्व के कारण है। अतः विकल्प 4 पाठ की प्रत्यक्ष व्याख्या से मेल खाता है, अर्थात V$^{2+}$ इलेक्ट्रॉन विन्यास के कारण अपेक्षाकृत स्थायी है, इसलिए इसके ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति सरल प्रवृत्ति से अपेक्षित से कम है, जिससे V$^{3+}$ से V$^{2+}$ अपचयन के लिए ऋणात्मक विभव होता है।

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निम्नलिखित में से कौन-सा मानक गिब्स ऊर्जा ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$) और मानक सेल विभव (E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$) के बीच संबंध का वर्णन करता है?

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सारांश स्पष्ट रूप से कहता है: 'सेलों के मानक विभव सेल में होने वाली अभिक्रिया की मानक गिब्स ऊर्जा ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ = – nF E$^{\text{o}}_{\text{cell}}$) और साम्य स्थिरांक ($\Delta_{\text{r}}G^{\text{o}}$ = – R T ln K) से संबंधित हैं।'

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अर्ध-सेल में प्लैटिनम (Pt) जैसे अक्रिय इलेक्ट्रोड का उपयोग होता है। इसका प्राथमिक कार्य क्या है?

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पाठ समझाता है: 'कभी-कभी प्लैटिनम या सोने जैसी धातुओं का अक्रिय इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग होता है। वे अभिक्रिया में भाग नहीं लेते परंतु ऑक्सीकरण या अपचयन अभिक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनों के चालन के लिए अपनी सतह प्रदान करते हैं।'

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