यदि आवेश कूलॉम का कोई कण दिशा के अनुदिश वेग m/s से गति करते हुए चुंबकीय क्षेत्र के कारण न्यूटन का बल - दिशा में अनुभव करता है, तो न्यूनतम चुंबकीय क्षेत्र है
(d)
(जब = )
टेस्ला - दिशा में
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यदि आवेश कूलॉम का कोई कण दिशा के अनुदिश वेग m/s से गति करते हुए चुंबकीय क्षेत्र के कारण न्यूटन का बल - दिशा में अनुभव करता है, तो न्यूनतम चुंबकीय क्षेत्र है
(d)
(जब = )
टेस्ला - दिशा में
N फेरों वाली किसी छोटी कुंडली का प्रभावी क्षेत्रफल A है तथा वह धारा I वहन करती है। वह किसी क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार लटकाई गई है कि उसका तल के लंबवत है। उसे ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः घुमाने में किया गया कार्य है
(b)
n फेरों तथा त्रिज्या r वाले किसी तार, जो धारा i वहन करता है, के तल के अभिलंबवत क्षेत्र कुंडली की अक्ष पर कुंडली के केंद्र से छोटी दूरी h पर मापा जाता है। यह केंद्र पर क्षेत्र से जिस भिन्न द्वारा छोटा है वह है
(a) केंद्र पर क्षेत्र
केंद्र से दूरी h पर क्षेत्र
(द्विपद प्रमेय द्वारा)
अतः की तुलना से करने पर वह भिन्न से कम है
एक इलेक्ट्रॉन, एक प्रोटॉन, एक ड्यूट्रॉन तथा एक अल्फा कण, जिनमें से प्रत्येक की चाल समान है, कणों के वेगों की दिशा के लंबवत नियत चुंबकीय क्षेत्र वाले क्षेत्र में हैं। इन कणों की वृत्ताकार कक्षाओं की त्रिज्याएँ क्रमशः , , तथा हैं। इससे निष्कर्ष निकलता है कि
(c) इसका उपयोग करने पर
लंबाई 2.1 cm तथा चौड़ाई 1.25 cm की 250-फेरों वाली आयताकार कुंडली 85A की धारा वहन करती है तथा 0.85 T सामर्थ्य के चुंबकीय क्षेत्र के अधीन है। बल आघूर्ण के विरुद्ध कुंडली को घुमाने के लिए किया गया कार्य है
(a) कुंडली को घुमाने के लिए किया गया कार्य
W=MB()
जहाँ, M=चुंबकीय आघूर्ण
B=चुंबकीय क्षेत्र
दिया है.
W=MB(
= 2MB=2NIA
=
=9.1 (लगभग)
निकटतम विकल्प (a) है।
स्थिर धारा वहन करता कोई लंबा तार एक फेरे के वृत्ताकार लूप में मोड़ा जाता है। लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B है। फिर उसे n फेरों की वृत्ताकार कुंडली में मोड़ा जाता है। n फेरों की इस कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र होगा
(b)
कोई इलेक्ट्रॉन T के अनुप्रस्थ चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में वृत्ताकार पथ में गति कर रहा है। यदि e/m का मान C/kg है, तो इलेक्ट्रॉन के परिक्रमण की आवृत्ति है
(a) जैसा कि हम जानते हैं, चुंबकीय क्षेत्र B में किसी आवेशित कण की त्रिज्या इस प्रकार दी जाती है r=
जहाँ,r= कण पर आवेश
v= कण की चाल
वृत्त पूरा करने में लिया गया समय,
[समी. (i) से]
त्रिज्या R की दो समान कुंडलियाँ संकेंद्रित रूप से इस प्रकार रखी हैं कि उनके तल एक-दूसरे के समकोण पर हैं। उनमें बहती धाराएँ क्रमशः I तथा 2I हैं। केंद्र पर परिणामी चुंबकीय क्षेत्र प्रेरण होगा
त्रिज्या R तथा धारा I वाली वृत्ताकार धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र (B), B=
इसी प्रकार, यदि धारा = 2I, तो
चुंबकीय क्षेत्र=
अतः, परिणामी चुंबकीय क्षेत्र
=
=
आवृत्ति v का कोई प्रत्यावर्ती विद्युत क्षेत्र किसी साइक्लोट्रॉन के डीज़ (त्रिज्या=R) पर आरोपित किया जाता है जिसका उपयोग प्रोटॉनों (द्रव्यमान=m) को त्वरित करने के लिए किया जा रहा है। साइक्लोट्रॉन में प्रयुक्त प्रचालन चुंबकीय क्षेत्र (B) तथा उससे उत्पन्न प्रोटॉन पुंज की गतिज ऊर्जा (K) इस प्रकार दी जाती है
आवृत्ति v=
यहाँ, वेग v=
चुंबकीय क्षेत्र B=
गतिज ऊर्जा
किसी निश्चित क्षेत्र में एक एकसमान विद्युत क्षेत्र तथा एक एकसमान चुंबकीय क्षेत्र एक ही दिशा में कार्य कर रहे हैं। यदि उस क्षेत्र में कोई इलेक्ट्रॉन इस प्रकार प्रक्षेपित किया जाए कि उसका वेग क्षेत्रों की दिशा के अनुदिश हो, तो इलेक्ट्रॉन :
चुंबकीय क्षेत्र केवल बल नहीं लगाता। विद्युत क्षेत्र इलेक्ट्रॉन के वेग के विपरीत बल लगाएगा। अतः चाल घटेगी।
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