NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

NEET के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

सभी Physics Chemistry Botany Zoology
भाषा English हिंदी
Register free for difficulty & keyword filters
● ● ● ● ●

त्रिज्या R मीटर के किसी पतले वलय पर q कूलॉम आवेश एकसमान रूप से फैला है। वलय अपनी अक्ष के परितः f परिक्रमण/s की नियत आवृत्ति से घूमता है। वलय के केंद्र पर Wb m-2 में चुंबकीय प्रेरण का मान है 

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

वृत्त के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र

  =μ04π×2πiR=μ02qRt

● ● ● ● ●

किसी धारामापी की कुंडली का प्रतिरोध 100Ω है तथा वह 30 mA धारा के लिए पूर्ण पैमाना विक्षेप देता है। यदि उसे 30V परास के वोल्टमीटर के रूप में कार्य करना है, तो जोड़ा जाने वाला आवश्यक प्रतिरोध होगा 

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

आवश्यक प्रतिरोध R=Vig-G

  =3030×10-3-100=900 Ω

● ● ● ● ●

किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में, कोई आवेशित कण त्रिज्या R के वृत्त में नियत चाल v से गति करता है। कण के परिक्रमण का आवर्तकाल -

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

आवेशित कण की वृत्तीय गति का आवर्तकाल इस प्रकार दिया जाता है 

                  T=2πrv=2πv×mvBqor             T=2πmBq 

अतः, एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण के परिक्रमण का आवर्तकाल  v तथा R दोनों से स्वतंत्र है।

● ● ● ● ●

y-दिशा में कार्य करते 2T के चुंबकीय क्षेत्र में आवेश -2μC के किसी आवेशित कण पर कार्य करने वाला चुंबकीय बल, जब कण का वेग 2i^+3j^×106 ms-1 है, है।

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

जब कोई आवेश q सामर्थ्य B,→ के चुंबकीय क्षेत्र के अंदर वेग v→ से गति करता है तो आवेश पर लगने वाला बल चुंबकीय लॉरेंज बल कहलाता है। चुंबकीय लॉरेंज बल सदिश v→×B→ की दिशा में होता है।

चुंबकीय लॉरेंज बल F→=qv→×B→

  =-2×10-62×2×106

  = 8 N ऋणात्मक z-अक्ष के अनुदिश

● ● ● ● ●

किसी छड़ चुंबक को किसी एकसमान क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में पतले सूती धागे से लटकाया जाता है तथा वह साम्य अवस्था में है। उसे 60o घुमाने के लिए आवश्यक ऊर्जा W है। अब चुंबक को इस नई स्थिति में रखने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण है:

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

बल आघूर्ण = MBsinθ 
= MB sin600  -------(1) 
चुंबक को कोण θ1 से θ2 तक विस्थापित करने में किया गया कार्य है -
W = MB(cosθ1 – cosθ2) 
W = MB(1 – cos600)  -------(2) 
(1) तथा (2) से 
बल आघूर्ण=3W212=3W

● ● ● ● ●

लंबाई 2.1 cm तथा चौड़ाई 1.25 cm की 250-फेरों वाली आयताकार कुंडली 85μकी धारा वहन करती है तथा 0.85 T सामर्थ्य के चुंबकीय क्षेत्र के अधीन है। बल आघूर्ण के विरुद्ध कुंडली को 180° घुमाने के लिए किया गया कार्य है:

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

दी गई है लंबाई 2.1 cm तथा चौड़ाई 1.25 cm की एक आयताकार कुंडली 
कुंडली से धारा = 85 μA 
फेरों की संख्या = 250 
B= 0.85 T 
किया गया कार्य, W= MBcosθ1-cosθ2 
जब उसे कोण 1800 से घुमाया जाता है तब 
W= MBcos00-cos1800=MB1+1=2MB 
W = 2(NIA)B 
W=2×250×85×10-61.25×2.1×10-4×85×10-2

W=9.8 μJ

● ● ● ● ●

चुंबकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

 

(d) जैसा कि हम पदार्थ की चुंबकीय पारगम्यता तथा प्रवृत्ति के बीच संबंध जानते हैं अर्थात्

  μr=1+xm    ...(i)

अतः, प्रतिचुंबकीय पदार्थों के लिए, μr<1

अतः, समीकरण (i) के अनुसार, प्रतिचुंबकीय पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति (xm) ऋणात्मक होगी।

जबकि अनु तथा लौहचुंबकीय पदार्थों की स्थिति में, चुंबकीय प्रवृत्ति धनात्मक होती है।

● ● ● ● ●

चुंबकीय आघूर्ण 0.4 JT-1 का कोई छोटा छड़ चुंबक 0.16 T. के किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया है। चुंबक स्थायी साम्य में है जब स्थितिज ऊर्जा है

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

हम जानते हैं कि 

  U=-MB cos θ

   स्थायी साम्य के लिए θ=0°

   अतः, U=-MB

  =-(0.4)(0.16)=-0.064 J

● ● ● ● ●

चुंबकीय याम्योत्तर में रखे किसी कंपन चुंबकत्वमापी में एक छोटा छड़ चुंबक है। चुंबक पृथ्वी के 24 μT के क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में 2s के आवर्तकाल के साथ दोलन करता है। जब किसी धारावाही तार को रखकर पृथ्वी के क्षेत्र के विपरीत 18 μT का क्षैतिज क्षेत्र उत्पन्न किया जाता है, तो चुंबक का नया आवर्तकाल होगा

 

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

कंपन चुंबकत्वमापी में आवर्तकाल

  T=2πIM×BH

⇒  T∝1BH

⇒  T1T2=(BH)2(BH)1

⇒  2T2=624

  T = 4s

● ● ● ● ●

n फेरों तथा प्रतिरोध RΩ वाली कोई कुंडली प्रतिरोध 4RΩ के किसी धारामापी से जोड़ी जाती है। यह संयोजन t सेकंड के समय में चुंबकीय क्षेत्र W1 weber/m2 से W2 weber/m2 तक गति कराया जाता है। परिपथ में प्रेरित धारा है 

You've reached today's free limit of 20 questions. Log in to keep practising for free.
Explanation

i=eR=−NR(ϕ2−ϕ1)Δt=−n(W2−W1)5Rt 

Ready to ace NEET?

Free access · No credit card required

Frequently Asked Questions

हाँ। इस पेज के हर NEET प्रश्न को बिना लॉगिन किए मुफ़्त हल किया जा सकता है, और सही उत्तर व विस्तृत व्याख्या तुरंत देखी जा सकती है।

नहीं। प्रश्न हल करने और उत्तर देखने के लिए किसी खाते की आवश्यकता नहीं है। मुफ़्त खाता बुकमार्क, निजी नोट्स और प्रगति ट्रैकिंग जोड़ देता है।

इस प्रश्न बैंक में NEET के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और अभ्यास प्रश्न दोनों शामिल हैं — जहाँ लागू हो, हर प्रश्न पर उसका परीक्षा वर्ष अंकित है।