NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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कार्य फलन 5.01 eV वाले किसी निकल पृष्ठ द्वारा उत्सर्जित तीव्रतम प्रकाशइलेक्ट्रॉनों को रोकने के लिए आरोपित किया जाने वाला विभवांतर, जब उस पर 200nm का पराबैंगनी प्रकाश गिरता है, होना चाहिए:

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आपतित प्रकाश की ऊर्जा E(eV)=123752000

=6.2eV (200 nm= 2000A∘)

इस संबंध के अनुसार E= w∘ + eV∘

⇒  V∘=E-W∘e

  =(6.2-5.01)ee

  =1.2 V

निरोधी विभव ऋणात्मक है, अतः उत्तर -1.2 V है

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तरंगदैर्ध्य 667 nm का एकवर्णी प्रकाश किसी हीलियम नियॉन लेज़र द्वारा उत्पन्न किया जाता है। उत्सर्जित शक्ति 9mW है। इस पुंज द्वारा विकिरित किसी लक्ष्य पर औसतन प्रति सेकंड पहुँचने वाले फोटॉनों की संख्या है 

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यहाँ λ=667×10-9m, P=9×10-3W

शक्ति=energytime

  =nhcλt

  =Nhcλ

जहाँ N प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या है।

⇒      N=P×λhc

  =9×10-3×667×10-96.6×10-34×3×108

  =3×1016/s

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किसी प्रकाशसंवेदी पदार्थ के पृष्ठ का कार्य फलन 6.2 eV है। आपतित विकिरण की वह तरंगदैर्ध्य जिसके लिए निरोधी विभव 5V है, स्थित है 

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प्रकाशविद्युत प्रभाव के नियमों के अनुसार

  KEmax=E-ϕ

जहाँ ϕ कार्य फलन है तथा KEmax प्रकाशइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा है।

∴                       hv=eV0+ϕ

अथवा  v=5 eV +6.2 eV =11.2eV

∴           λ=1240011.2A0≈1000 A0

अतः, विकिरण पराबैंगनी क्षेत्र में स्थित है।

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द्रव्यमान 1 mg के किसी कण की तरंगदैर्ध्य 3×106 ms-1 के वेग से गतिमान किसी इलेक्ट्रॉन के समान है। कण का वेग है 

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किसी कण की तरंगदैर्ध्य इस प्रकार दी जाती है 

  λ=hp

जहाँ h प्लांक नियतांक है तथा किसी इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य इस प्रकार दी जाती है 

  λe=hpe

परंतु  λ=λe

अतः,  p=pe

अथवा  mv=meve

अथवा  v=mevem

नीचे दिए गए आँकड़े रखने पर 

me=9.1×10-31 kg , ve=3×106 m/s;m=1 mg =1 ×10-6 kg v=9.1×10-31×3×1061×10-6=2.7×10-18  ms-1

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जब किसी इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा बढ़ाई जाती है, तो संबद्ध तरंग की तरंगदैर्ध्य

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(b) λ=hp=h2mE;        ∴λ∝1E   ( h तथा m = नियतांक)

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विकिरण की द्वैत प्रकृति किसके द्वारा दर्शाई जाती है:

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(d) Photoelectric effect→Particle natureDiffraction→Wave natureDual nature

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द्रव्यमान m का कोई इलेक्ट्रॉन जब विभवांतर V द्वारा त्वरित किया जाता है तो उसकी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λ होती है। उसी विभवांतर द्वारा त्वरित द्रव्यमान M के किसी प्रोटॉन से संबद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य होगी

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(b) λ=h2mE⇒λ∝1m  ( E = समान)

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आवृत्ति v का प्रकाश देहली आवृत्ति v0v0<v वाले किसी पदार्थ पर आपतित होता है। उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होगी 

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(a) कार्य फलन, W=hv0

आपतित प्रकाश की ऊर्जा = hv

उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा = E-hv0

  =h(v-v0)

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दो सर्वसम प्रकाश-कैथोड आवृत्तियों f1 तथा f2 का प्रकाश प्राप्त करते हैं। यदि बाहर निकलने वाले प्रकाश इलेक्ट्रॉनों (द्रव्यमान m के) के वेग क्रमशः v1 तथा v2 हैं, तो 

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(b) आइंस्टीन के प्रकाशविद्युत समीकरण का उपयोग करने पर

E=W0+Kmax

hf1=W0+12mv12       ...(i)hf2=W0+12mv22        ...(ii)⇒hf1-f2=12mv12-v22⇒v12-v22=2hmf1-f2

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उत्तेजक तरंगदैर्ध्य λ वाले किसी प्रकाशउत्सर्जी सेल में, तीव्रतम इलेक्ट्रॉन की चाल v है। यदि उत्तेजक तरंगदैर्ध्य बदलकर 3λ/4 कर दी जाए, तो उत्सर्जित तीव्रतम इलेक्ट्रॉन की चाल होगी 

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(d) 

hv-W0=12mvmax2⇒hcλ-hcλ0=12mvmax2⇒hcλ0-λλλ0=12mvmax2⇒vmax=2hcmλ0-λλλ0 

जब तरंगदैर्ध्य λ है तथा वेग v है, तब 

v=2hcmλ0-λλ0λ  .....(i) 

जब तरंगदैर्ध्य 3λ4 है तथा वेग v' है, तब 

v'=2hcmλ0-3λ/4λ0×3λ/4  .....(ii) 

समीकरण (ii) को (i) से भाग देने पर, हमें प्राप्त होता है

v'v=λ0-3λ/434λλ0×λλ0λ0-λv'=v431/2λ0-3λ/4λ0-λ    i.e. v'>v431/2

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Frequently Asked Questions

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