एक जल अणु द्वारा बनाए जा सकने वाले हाइड्रोजन बंधों की अधिकतम संभव संख्या है –
(B). जल के अणु अपने दो हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा दो हाइड्रोजन बंध तथा O परमाणु पर उपस्थित
दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों द्वारा दो और बंध बना सकते हैं।
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एक जल अणु द्वारा बनाए जा सकने वाले हाइड्रोजन बंधों की अधिकतम संभव संख्या है –
(B). जल के अणु अपने दो हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा दो हाइड्रोजन बंध तथा O परमाणु पर उपस्थित
दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों द्वारा दो और बंध बना सकते हैं।
प्रतिरोधी की भाँति कार्य करता है इसके –
(B). प्रतिरोधी की भाँति कार्य करता है क्योंकि यह ऑक्सीकरण द्वारा जीवाणुओं को मारता है। यह नवजात ऑक्सीजन देता है जो
जीवाणुओं को मार देती है।
निःशेषित परम्यूटाइट में ............ आयन नहीं होता –
(A). परम्यूटाइट सोडियम ऐलुमिनियम सिलिकेट है। इसके आयन आयनीकरणीय होते हैं। अतः, उपयोग के दौरान ये
आयन कठोर जल में उपस्थित आदि से विनिमय कर लेते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु हाइड्रोजन को अधिशोषित नहीं कर सकती –
(B). ऐलुमिनियम के छोटे परमाणु आकार के कारण, जालक संरचना में रिक्ति का आकार भी
छोटा होता है, इसलिए यह हाइड्रोजन को अधिशोषित नहीं कर सकती।
हाइड्रोजन को क्षार धातुओं या हैलोजनों के समूह में न रखने की सर्वोत्तम व्याख्या है।
(C). हाइड्रोजन की IE क्षार धातुओं से बहुत अधिक तथा हैलोजनों से थोड़ी अधिक
होती है। उदाहरण के लिए Cl की IE 1255 kJ/mole तथा H की IE 1312 kJ/mole है।
120 ppm अस्थायी कठोरता वाले 50 लीटर कठोर जल को 1.62 kg के साथ मिलाया जाता है, परिणामी जल की कठोरता क्या है ? (कठोर जल का आपेक्षिक घनत्व = 1 gm/ml)
विलयन की आयतन सामर्थ्य ज्ञात कीजिए।
(A). हम जानते हैं कि सामर्थ्य = नॉर्मलता × तुल्यांकी भार तथा H2O2 का तुल्यांकी भार = 17
विलयन की सामर्थ्य = 1.6 × 17 g/l
अब 68g N.T.P. पर 22400 ml देता है
1.6 × 17 g देगा
N.T.P. पर
परंतु 1.6 × 17 g 1000 ml विलयन में उपस्थित है।
अतः 1000 ml विलयन N.T.P. पर 8960 ml देता है।
1 ml विलयन N.T.P. पर ml देगा।
अतः 1.6N विलयन की आयतन सामर्थ्य = 8.96 आयतन।
30ml विलयन को अम्लीकृत करने के बाद पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए 30ml विलयन की आवश्यकता हुई। विलयन की प्रतिशत तथा आयतन सामर्थ्य परिकलित कीजिए।
(B). के लिए
अभिकथन : का क्वथनांक जल से अधिक होता है।
कारण : का द्विध्रुव आघूर्ण से थोड़ा अधिक होता है।
(B). में H-आबंधन की मात्रा से अधिक होती है।
अभिकथन : बेरिलियम हाइड्राइड एक सहसंयोजी हाइड्राइड है।
कारण : तथा के बीच विद्युत्-ऋणात्मकता का अंतर बहुत अधिक है।
(C). तथा के बीच विद्युत्-ऋणात्मकता का अंतर कम है।
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