वह गुण जिसके कारण कोई यौगिक प्रकाश के ध्रुवण तल को घुमा सकता है, कहलाता है:
(c) यह प्रकाशिक सक्रियता की परिभाषा है।
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वह गुण जिसके कारण कोई यौगिक प्रकाश के ध्रुवण तल को घुमा सकता है, कहलाता है:
(c) यह प्रकाशिक सक्रियता की परिभाषा है।
किसी संतृप्त यौगिक का आण्विक सूत्र C2H4Br2 है। यह सूत्र निम्नलिखित के अस्तित्व की अनुमति देता है:
(c) 1,1-डाइब्रोमोएथेन तथा 1,2-डाइब्रोमोएथेन।
ऐल्केन C6H14 से कितने समावयवी प्राप्त किए जा सकते हैं?
2-मेथिलपेंट-3-ईन काइरल है क्योंकि इसमें है:
2-मेथिलपेंट-3-ईन में न तो सममिति केंद्र है और न ही सममिति तल। इसमें एक काइरल कार्बन (C2) होता है क्योंकि इससे चार भिन्न समूह जुड़े होते हैं, जिससे अणु काइरल अथवा प्रकाशिक सक्रिय हो जाता है।
किसी प्रकाशिक सक्रिय यौगिक के (R)- तथा (S)- एनैंशियोमर किसमें भिन्न होते हैं
(c) किसी प्रकाशिक सक्रिय यौगिक के R तथा S रूप, समतल ध्रुवित प्रकाश के प्रति अपने व्यवहार में भिन्न होते हैं। जो स्पीशीज़ ध्रुवित प्रकाश के तल को दाईं ओर घुमाती है उसे R-रूप (rectus रूप) अथवा d-रूप (dextro-रूप) कहते हैं तथा जो स्पीशीज़ ध्रुवित प्रकाश के तल को बाईं ओर घुमाती है उसे S-रूप (sinister-रूप) अथवा L-रूप (laevo-रूप) कहते हैं।
ऐल्काइन का बेलनाकार आकार निम्नलिखित के कारण होता है
(d) ऐल्काइनों में C≡C उपस्थित होता है, ऐसे बंध में एक सिग्मा तथा दो π C-C बंध उपस्थित होते हैं। सिग्मा बंध sp-संकर कक्षकों द्वारा बनता है जबकि π-बंध असंकरित कक्षकों द्वारा बनते हैं।
अतः यह बेलनाकार आकार दर्शाता है।
1°, 2° तथा 3° एथिल ऐमीन तथा अमोनिया की क्षारकता का घटता हुआ क्रम क्या है?
(d) एल्किल समूहों की संख्या बढ़ने के साथ, नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व भी बढ़ता है, इसलिए क्षारीय गुण बढ़ता है, परंतु 3° ऐमीन, 3° ऐमीनों की त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण 2° ऐमीनों से कम क्षारीय होते हैं, अतः क्षारकता का सही क्रम है
अमोनिया < 1° < 2° < 3°
NH3<C2H5NH2<(C2H5)3N<(C2H5)2NH
सबसे छोटी C-C बंध दूरी किसमें पाई जाती है
(d) ऐसीटिलीन की C-C बंध लंबाई सबसे कम होती है क्योंकि इसमें C≡C त्रि-बंध होता है। बंध लंबाई निम्नलिखित क्रम का पालन करती है
C-C>C=C>C≡C
निम्नलिखित में से कौन एनिलीन से अधिक क्षारीय है?
(d) बेंज़िल ऐमीन, C6H5CH2-NH2, एनिलीन से अधिक क्षारीय है क्योंकि बेंज़िल समूह (C6H5CH2-) +I प्रभाव के कारण एक इलेक्ट्रॉन-दाता समूह है। अतः यह -NH2 समूह के N पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाने में सक्षम है। इस प्रकार, अधिक इलेक्ट्रॉन घनत्व के कारण, मुक्त इलेक्ट्रॉन युग्म के दान की दर बढ़ जाती है, अर्थात् क्षारीय गुण अधिक होता है। फेनिल तथा नाइट्रो समूह इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह हैं, इसलिए वे -NH2 समूह के N का इलेक्ट्रॉन घनत्व घटाने में सक्षम हैं। अतः वे एनिलीन से कम क्षारीय होते हैं।
निम्नलिखित में से किसकी कार्बन-कार्बन बंध लंबाई सबसे कम है?
(c) एथाइन (ऐसीटिलीन) की C-C बंध लंबाई सबसे कम होती है क्योंकि इसमें CC बंध होता है। बंध लंबाई निम्नलिखित क्रम का पालन करती है
CC <C=C<C-C
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