निम्नलिखित में से कौन दिए गए यौगिकों में अम्लता का सही क्रम निरूपित करता है?
(c) हैलोजनित अम्ल की अम्लता, उपस्थित हैलोजन की विद्युत-ऋणात्मकता बढ़ने के साथ बढ़ती है। अतः सही क्रम है F > Cl > Br
FCOOH > ClCOOH > BrCOOH > COOH
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निम्नलिखित में से कौन दिए गए यौगिकों में अम्लता का सही क्रम निरूपित करता है?
(c) हैलोजनित अम्ल की अम्लता, उपस्थित हैलोजन की विद्युत-ऋणात्मकता बढ़ने के साथ बढ़ती है। अतः सही क्रम है F > Cl > Br
FCOOH > ClCOOH > BrCOOH > COOH
एथेनॉल तथा डाइमेथिल ईथर क्रियात्मक समावयवियों का एक युग्म बनाते हैं। एथेनॉल का क्वथनांक डाइमेथिल ईथर से अधिक होता है, इसका कारण है निम्नलिखित की उपस्थिति
एथेनॉल में एक हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह होता है जो हाइड्रोजन बंधन में भाग ले सकता है, जबकि डाइमेथिल ईथर में उच्च विद्युत-ऋणात्मक परमाणुओं से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता। एथेनॉल में यह अंतराअणुक हाइड्रोजन बंधन प्रबल आकर्षण बल उत्पन्न करता है, जिससे इसका क्वथनांक अधिक होता है।
निम्नलिखित में से सबसे प्रबल अम्ल है
(c) हम जानते हैं कि प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) दूरी के साथ तेज़ी से घटता है। प्रेरणिक प्रभाव दूरी पर निर्भर करने वाला कारक है। जैसे-जैसे Cl-परमाणु की दूरी बढ़ती है, अम्लीय गुण घटता है।
दो निकटवर्ती कार्बन परमाणुओं के बीच की दूरी सबसे अधिक है
(c) एकल बंध के लिए C-C बंध लंबाई अधिकतम होती है, इसलिए ब्यूटेन में C-C बंध लंबाई सबसे अधिक होती है क्योंकि इसमें कार्बन-कार्बन एकल बंध होता है।
निम्नलिखित में से कौन इनकी अम्लीय प्रबलता का सही घटता हुआ क्रम निरूपित करता है?
(i) मेथेनोइक अम्ल
(ii) एथेनोइक अम्ल
(iii) प्रोपेनोइक अम्ल
(iv) ब्यूटेनोइक अम्ल
कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीय प्रबलता, एल्किल समूह का आकार बढ़ने के साथ घटती है। इसका कारण यह है कि बड़े एल्किल समूहों का इलेक्ट्रॉन-मुक्त करने अथवा इलेक्ट्रॉन-दान करने का प्रभाव अधिक होता है, जिससे O-H बंध की ध्रुवता घट जाती है, जिससे यह कम अम्लीय हो जाता है। अतः अम्लीय प्रबलता का सही घटता हुआ क्रम है: मेथेनोइक अम्ल > एथेनोइक अम्ल > प्रोपेनोइक अम्ल > ब्यूटेनोइक अम्ल।
कार्बऋणायनों (carbanions) CH≡C-, CH3- तथा CH2=CH- का सापेक्ष स्थायित्व क्रम है ____________
जिस परमाणु पर ऋण आवेश उपस्थित होता है उसकी विद्युत-ऋणात्मकता बढ़ने के साथ, कार्बऋणायन का स्थायित्व भी बढ़ता है। क्रम है
ट्रांस-2-ब्यूटीन का CS2 का उपयोग करके ब्रोमीनीकरण करने पर कौन सा डाइब्रोमो व्युत्पन्न प्राप्त होता है
ऐल्कीन में Br2 का योग, ऐंटी योग (anti addition) का एक उदाहरण है। ट्रांस ऐल्कीन, ऐंटी योग पर मेसो यौगिक देता है।
निम्नलिखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता पर विचार कीजिए
(i) PhCOOH
(ii) o-NO2C6H4COOH
(iii) p-NO2C6H4COOH
(iv)m-NO2C6H4COOH
ऑर्थो प्रभाव के कारण, ऑर्थो व्युत्पन्न सबसे अधिक अम्लीय होता है। यदि वलय में -NO2 जैसा इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह उपस्थित हो तो अम्लता का क्रम -o>p->m- होता है
निम्नलिखित में से किसकी C-Cl बंध लंबाई न्यूनतम होगी?
Ph-Cl में, अनुनाद (resonance) के कारण C-Cl बंध में आंशिक द्वि-बंध लक्षण होता है और इसकी बंध लंबाई न्यूनतम होती है।
एक हाइड्रोकार्बन (R) में एक छह-सदस्यीय वलय है जिसमें कोई असंतृप्तता नहीं है। दो एल्किल समूह वलय से एक दूसरे के निकट जुड़े हैं। एक समूह में श्रृंखला के प्रथम कार्बन परमाणु पर शाखन के साथ 3 कार्बन परमाणु हैं तथा दूसरे में 4 कार्बन परमाणु हैं। बड़े एल्किल समूह की मुख्य श्रृंखला में तीन कार्बन परमाणु हैं जिनमें से दूसरा कार्बन प्रतिस्थापित है। यौगिक (R) का सही IUPAC नाम है
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