संवृत संकुलित चतुष्फलकीय में धनायन तथा ऋणायन का अनुपात है:
(b) r+/ r- चतुष्फलकीय रिक्ति के लिए =0.225-0.414;
r+/ r- त्रिकोणीय के लिए =0.155-0.225
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संवृत संकुलित चतुष्फलकीय में धनायन तथा ऋणायन का अनुपात है:
(b) r+/ r- चतुष्फलकीय रिक्ति के लिए =0.225-0.414;
r+/ r- त्रिकोणीय के लिए =0.155-0.225
स्पिनेल ऑक्साइडों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है जिसमें दो प्रकार के धातु आयन होते हैं तथा ऑक्साइड आयन ccp परतों में व्यवस्थित रहते हैं। सामान्य स्पिनेल में 1/8th चतुष्फलकीय रिक्तियाँ एक प्रकार के धातु से तथा आधी अष्टफलकीय रिक्तियाँ दूसरे प्रकार के धातु आयनों से भरी रहती हैं। ऐसा स्पिनेल Zn2+, Al3+ तथा O2- द्वारा बनता है जिसमें Zn2+ चतुष्फलकीय रिक्ति में है। स्पिनेल का सरलतम सूत्र दीजिए।
(A) मान लीजिए चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = a
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = a/2
1/8 वीं चतुष्फलकीय रिक्तियाँ भरी हैं Zn2+
Zn2+ की संख्या =a/8
आधी अष्टफलकीय रिक्तियाँ भरी हैं Al3+
Al3+ की संख्या = a/4
Zn2+: Al3+ का अनुपात
1 : 2
1 मोल Zn के लिए2+, Al3+=2
कुल धनावेश = 2+3x2=8 अतः O की संख्या2- =4
सरलतम सूत्र होगा ZnAl2O4
संवृत संकुलन अधिकतम होता है किस क्रिस्टल जालक में:
(b) विभिन्न व्यवस्थाओं में कठोर गोलों द्वारा भरे गए आयतन का अधिकतम संकुलन अथवा अधिकतम अनुपात है:
(a) सरल घनीय=π/6=0.52
(b) bcc=π/√3/8=0.68
(c) fcc=π/√2/6=0.74
(d) hep=π/√2/6=0.74
(e) Diamond=π/√3/6=0.34
फ्रेंकेल दोष किसमें देखा जाता है:
(d) फ्रेंकेल दोष तब उत्पन्न होता है जब धनायन अपने जालक स्थलों से अनुपस्थित होकर अंतराकाशी स्थल ग्रहण कर लेते हैं। फ्रेंकेल दोष के परिणामस्वरूप घनत्व अपरिवर्तित रहता है परंतु परावैद्युतांक बढ़ जाता है।
परमाणुओं की फलक-केंद्रित घनीय व्यवस्था में प्रति एकक कोष्ठिका कितने अष्टफलकीय तथा चतुष्फलकीय छिद्र उपस्थित होते हैं?
(C) fcc में अष्टफलकीय रिक्तियाँ: केंद्र पर = 1
कोरों पर = 12x1/4=3
कुल =4
TiO2 किसका सुविख्यात उदाहरण है:
(b) TiO2 चतुष्कोणीय तंत्र रखता है जिसमें सममिति के पाँच तल तथा सममिति के पाँच अक्ष होते हैं।
कौन-से युग्म समरूपता दर्शाते हैं?
(c)
NaNO3 तथा KNO3 समरूप नहीं हैं क्योंकि इनका अणुसूत्र समान है परंतु क्रिस्टल संरचना भिन्न है।
समान क्रिस्टल संरचना वाले दो या अधिक पदार्थ समरूप कहलाते हैं। इनमें पदार्थ के घटक परमाणु समान परमाणु अनुपात में होते हैं।
, तथा समरूप हैं परंतु तथा समरूप नहीं हैं क्योंकि इनकी क्रिस्टल संरचनाएँ भिन्न हैं यद्यपि इनका परमाणु अनुपात, अणुसूत्र तथा रासायनिक गुण समान हैं।
क्रिस्टल में सममिति के अवयव हैं:-
(d) क्रिस्टल में इन तीन प्रकार की सममिति होती है।
ऑक्सीजन परमाणु fcc एकक कोष्ठिका बनाते हैं जिसमें 'A' परमाणु सभी चतुष्फलकीय रिक्तियाँ तथा 'B' परमाणु सभी अष्टफलकीय रिक्तियाँ भरते हैं। यदि दो काय विकर्णों से परमाणु हटा दिए जाएँ तो बनने वाले परिणामी यौगिक का सूत्र ज्ञात कीजिए।
प्रारंभ में, ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या = 1/8x8+1/2x6 = 1+3 = 4 परमाणु
'A' परमाणुओं की संख्या = 8
'B' परमाणुओं की संख्या = 1/4x12+1=3+1=4 परमाणु
दो काय विकर्णों से परमाणु हटाने के पश्चात्-
ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या = 4-1/8x4 = 4-1/2 =7/2
'A' परमाणुओं की संख्या = 8-4 = 4
'B' परमाणुओं की संख्या = 4-1 = 3
अतः यौगिक का सूत्र है
A4B3O7/2 अथवा A8B6O7
एक ठोस की संरचना ऐसी है जिसमें W परमाणु घनीय जालक के कोनों पर स्थित हैं। ऑक्सीजन परमाणु कोरों के केंद्र पर तथा Na परमाणु घन के केंद्र पर हैं। यौगिक का सूत्र है
'W' परमाणुओं की संख्या = 8*1/8=1(क्योंकि ये कोनों पर हैं)
'O' परमाणुओं की संख्या = 12*1/4 = 3(क्योंकि 'O' परमाणु फलक-कोरों के केंद्र पर हैं)
'Na' परमाणुओं की संख्या = 1x1=1(Na परमाणु घन के केंद्र पर है)
तब सूत्र होगा NaWO3
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