शॉट्की दोष मुख्यतः वैद्युत संयोजी यौगिकों में तब होता है जब
शॉट्की दोष मुख्यतः वैद्युत संयोजी यौगिकों में तब होता है जब धनायन तथा ऋणायन समान आकार के होते हैं।
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शॉट्की दोष मुख्यतः वैद्युत संयोजी यौगिकों में तब होता है जब
शॉट्की दोष मुख्यतः वैद्युत संयोजी यौगिकों में तब होता है जब धनायन तथा ऋणायन समान आकार के होते हैं।
विश्लेषण से पता चलता है कि निकैल के एक ऑक्साइड अयस्क का सूत्र Ni0.98O1.00 है। Ni3+ आयनों के रूप में निकैल का प्रतिशत लगभग है
अनुपात Ni : O = 98:100
अतः ऑक्सीजन के 100 परमाणु तथा Ni के 98 परमाणु।
मान लीजिए Ni2+ परमाणुओं की संख्या = x
तब Ni+3 की संख्या =98-.x
(Ni तथा O पर आवेश बराबर है)
अतः ऑक्सीजन पर आवेश =-2
3(98-x) + 2x = 2(100)
294-3x+2x=2(100)
-x=-94
x=94
Ni+2 का % =
94/98*100 = 96%
Ni+3 का प्रतिशत = 100 - 96 =4%
एक धातु दो घनीय क्रिस्टलों में क्रिस्टलीकृत होती है: FCC तथा BCC, जिनकी एकक कोष्ठिका की कोर लंबाइयाँ क्रमशः 4Å तथा 2Å हैं। इनके घनत्वों का अनुपात है:-
d = Zm/a3NA d1/d2 = 4/43 x 23/2 = 0.25
हिम एक षट्कोणीय जालक में क्रिस्टलीकृत होता है जिसकी एकक कोष्ठिका का आयतन 132 x 10-24 cm3.
यदि दिए गए ताप पर घनत्व 0.92 g/cm3 है, तो प्रति एकक कोष्ठिका H20 अणुओं की संख्या है
षट्कोणीय संकुलन में H20 के n अणुओं का द्रव्यमान।
AB अंतःकेंद्रित घनीय जालक में क्रिस्टलीकृत होता है जिसकी कोर लंबाई a, 387 pm के बराबर है। जालक में दो विपरीत आवेशित आयनों के बीच की दूरी है
BCC के लिए, 2r+ + 2r- =a
r+ + r- = a/2 = (387x1.732)/2 = 335pm
फलक-केंद्रित घनीय जालक में, परमाणु A कोनों की स्थितियाँ तथा परमाणु B फलक
केंद्र की स्थितियाँ ग्रहण करता है। यदि फलक-केंद्रित बिंदुओं में से एक से B का एक परमाणु अनुपस्थित हो, तो यौगिक का सूत्र है
A परमाणुओं की संख्या = 1/8 x 8=1
B परमाणुओं की संख्या = 1/2 x 6-1/2=5/2
अतः यौगिक का सूत्र है AB 5/2 अथवा A2B5.
घनीय संवृत संकुलित संरचना तथा अंतःकेंद्रित संकुलित संरचना में मुक्त स्थान का प्रतिशत क्रमशः है:
घनीय संवृत संकुलित संरचना में अधिकृत स्थान 74% तथा अंतःकेंद्रित संकुलित संरचना में 68% होता है।
सरल घनीय क्रिस्टल जालक का संकुलन प्रभाज है
निम्नलिखित में से किस क्रिस्टल में एकांतर चतुष्फलकीय रिक्तियाँ भरी होती हैं
ZnS, S2− आयनों की घनीय संवृत संकुलित व्यवस्था के रूप में क्रिस्टलीकृत होता है जिसमें Zn2+ आयन चतुष्फलकीय छिद्रों में रहते हैं।
यदि S2− आयन फलक-केंद्रित घनीय एकक कोष्ठिका के जालक बिंदुओं पर हों तथा Zn2+ आयन प्रत्येक एकांतर चतुष्फलकीय छिद्र में संकुलित हों, तो हमें ZnS की एकक कोष्ठिका प्राप्त होती है
एक धातु ऑक्साइड में, ऑक्साइड आयन षट्कोणीय संवृत संकुलन में व्यवस्थित हैं तथा धातु आयन दो-तिहाई अष्टफलकीय रिक्तियाँ भरते हैं। ऑक्साइड का सूत्र है
मान लीजिए ऑक्साइड आयनों की संख्या = N
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = N
अष्टफलकीय रिक्तियों में धातु आयन = 2/3 N
अतः M:O2 का अनुपात = 2/3:1 अथवा 2:3 अथवा सूत्र है M2O3
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